रविवार, 17 अप्रैल 2016

आइपीएल का मनोरंजन

आइपीएल क्रिकेट नहीं है। केवल 'मनोरंजन' है। दिल बहलाने का सहारा भर है। फिर भी, नादान टाइप लोग आइपीएल में क्रिकेट को ढूंढ़ते हैं। खिलाड़ियों से 'क्लासिक खेल' खेलने की उम्मीद पालते हैं। लगभग प्रत्येक बॉल पर पड़ने वाले चौक्के-छक्के उन्हें 'बर्दाशत' नहीं होते। मुंह फुलाकर घर के कोने में यों बैठ जाते हैं मानो बहू ने सास को किसी बात पर 'दुत्कार' दिया हो।

आइपीएल बदलते दौर का दिलचस्प खेल है। यहां ग्लैमर के साथ-साथ पैसा और शोहरत भी है। खिलाड़ी भले ही मैदान पर खेलता नजर आता हो। असल में वो खड़ा मंडी में होता है। मंडी में उसकी बोली लगती है। तरह-तरह के खरीददार होते हैं वहां। जो खिलाड़ी जित्ते ऊंचे दामों पर बिकता है, उसे ही 'सर्वश्रेष्ठ' माना जाता है।

गजब यह है कि खिलाड़ी अपने बिकने का बुरा नहीं मानते। खुश होते हैं। ऊंचे दामों पर बिक कर दूसरे खिलाड़ियों के समक्ष नजीर पेश करते हैं। देखा, बिका ऐसे जाता है। बिक कर जो पैसा मिलता है, खिलाड़ी के तईं उसका सुख अद्भूत होता है। बिकने में अब किसी खिलाड़ी की 'इज्जत' को बट्टा नहीं लगता।

कुछ खिलाड़ी तो ऐसे हैं, जो सिर्फ आइपीएल में ही खेलते नजर आते हैं। जब एक खेल ही खिलाड़ी का पूरे साल का इंतजाम कर दे रहा है फिर अन्य जगह खेलके क्या फायदा? पैसा और विज्ञापन मिलना चाहिए, चाहे कहीं से भी आए। इधर खिलाड़ी गेम में हिट हुआ नहीं कि उधर विज्ञापन और बाजार तुरंत उसे 'हाईजैक' कर लेते हैं। क्रिकेट का शायद ही ऐसा कोई खिलाड़ी होगा, जो किसी न किसी विज्ञापन में न आता है।

खिलाड़ी की असली 'मार्केट वैल्यू' तो विज्ञापन से ही तय होती है। विज्ञापन खिलाड़ी के लिए भविष्य की पेंशन का काम करते हैं। यह विज्ञापन ने ही बताया है अगर टी-ट्वेंटी या आइपीएल का लुत्फ लेना है तो घर में डिब्बा नहीं फुल एचडी टीवी होना चाहिए। बिना एचडी टीवी के आपकी लाइफ उसी तरह अधूरी है, जिस तरह शराबी के लिए शराब के न मिलने पर हो जाती है।

जग-जाहिर है, क्रिकेट के प्रति दीवानगी का हमारे यहां कोई नियम-कायदा नहीं। क्रिकेट को 'धर्म' बनाए रखने और खिलाड़ियों को 'भगवान' मान लेने पर किसी को आपत्ति नहीं। हां, जिन्हें आपत्ति है, उनकी कोई सुनता नहीं। भले क्रिकेट में आवारापूंजी कित्ती ही बेशर्मी से खुद एक्सपोज करती हो मगर परवाह किसे है। टी-ट्वेंटी और आइपीएल में इसी आवारापूंजी का खेल बिंदास चलता है। दूसरी तरफ, चियर लिडर्स का डांस दर्शकों की मदहोशी में इजाफा करता रहता है। निपट मनोरंजन के अलावा उन्हें और चाहिए भी क्या।

मस्ती-मनोरंजन के बीच महाराष्ट्र में बनी पानी की कमी पर ध्यान शायद आइपीएल वालों का गया भी नहीं होगा। हालांकि कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए आइपीएल के मैचों को बाहर करवाने का निर्देश दिया है। उस पर एक महान सज्जन ने तर्के दिया है कि जहां आइपीएल के मैच होने हैं, वहां पानी की कमी नहीं। बिल्कुल, जब तलक खुद के घर में आग न लगे, आग की त्रासदी का पता ही नहीं चल पाता।

फिलहाल, तो आइपीएल की घंटी रोहित शर्मा, नीता अंबानी, रिकी पॉइंटिग ने साथ मिलकर बीएसई में जाकर बजा दी है।

पानी, सूखे और किसानों की आत्महत्यों की मार झेल रहे एक राज्य के बीच ग्लैमरस आइपीएल का होना बेशक मुझे-आपको 'विद्रूप' लगे लेकिन मनोरंजन के दीवानों के लिए कहां ये सब मायने रखता है। वे तो ग्लैमर और मनोरंजन के डांस-फ्लोर पर थिरकते रहने के आदी हो चुके हैं।

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