बुधवार, 9 मार्च 2016

देशभक्त, देशद्रोही और पागलखाना

प्यारे, मैं अभी तलक यह तय नहीं कर पाया हूं कि मैं 'देशभक्त' हूं या 'देशद्रोही'! कित्ती ही दफा आईने के सामने खड़े होकर अपनी शक्ल को गौर से देखा है, फिर भी, पता न चल पाया। उस दिन अपने करीबी पड़ोसी को बोला कि जरा मेरी हरकतों को देखकर बताए कि मैं व्यवहार में देशभक्त हूं या देशद्रोही। उसे भी कुछ समझ नहीं आया। चुप ही रहा।

पागलखाना मेरे घर से ज्यादा दूर नहीं। वहां भी इसी उम्मीद में गया था कि पागलों से ही पूछूंगा अपनी देशभक्ति और देशद्रोह के बारे में। पगालखाने में अंदर घूसते ही दो-चार पागल मिले। मुझे देखकर मुस्कुराए। उनकी मुस्कुराहट में शायद यह बात छिपी थी, लो आ गया हमारा एक और साथी।

चलिए। खैर। वहां मुझे एक ठीक-ठाक ढंग का पागल दिखा- उसी से मैंने पूछा- अच्छा, ये बताओ कि मैं शक्ल से देशभक्त लगता हूं या देशद्रोही। एक मिनट तो उस पागल ने मेरी शक्ल देखी फिर जोर का एक झापड़ मेरी थोपड़े पर जमाया और हंसता-कूदता 'पागल है, पागल है, पागल है' कहता हुआ वहां से भाग निकला।

जीवन में संभवता यह पहला झापड़ था मेरे गाल पर किसी पागल का। कहिए कुछ भी पर पागल झापड़ बड़ा ही मस्त मारते हैं। दिन में तारे क्या साक्षात यमराज तक नजर आ जाते हैं।

खैर। कुछ आगे बढ़ने पर एक पागल और मिला। सेम वही सवाल मैंने उससे भी किया। उसने तो सवाल पूरा होने से पहले ही मेरा गिरेबान पकड़ लिया। और खींचकर अपने साथियों के बीच ले जाने लगा। वो तो गनीमत रही नजदीक ही खड़े कुछ डॉक्टर्स ने मुझे उससे छुड़वा लिया। नहीं सारे के सारे पागल मिलकर मुझे कंप्लीट पागल बना चुके होते।

बेहद झुंझलाहट में एक डॉक्टर ने मुझे कहा- 'क्या आप सिरफिरे हैं, जो इन पागलों के बीच ऐसे पगलैटी भरे सवाल पूछने आ गए। अरे, इन बेचारों को क्या मालूम आपकी शक्ल देशभक्त से मिलती है या देशद्रोही से। इन्हें तो सब अपने जैसे ही नजर आते हैं। इनकी दुनिया आप जैसे पढ़े-लिखों से बिल्कुल अलग और कहीं बेहतर है। ये न नेता, न भक्ति, न बयान, न संप्रदायिकता किसी के लिए नहीं लड़ते-झगड़ते। ये अपने ही संघर्ष में मस्त रहते हैं।'

चलिए भागिए यहां से। अपना ये सवाल जाके किसी नेता या भक्त टाइप बंदे से पूछिएगा। चले आते हैं, जाने कहां-कहां से।

फिलहाल, पागलखाने से तो मैं लौट आया। मगर मुझे ये सवाल अब भी पागल किए जा रहा है कि मेरी शक्ल देशभक्त से मिलती है या देशद्रोही से?

1 टिप्पणी:

राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन मिट जायेंगे मिटाने वाले, ये हिन्दुस्तान है - ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...