रविवार, 28 फ़रवरी 2016

सेल्फी स्टिक की मार्केटिंग

पिछले दिनों एक मार्केटिंग का बंदा मुझसे टकराया। टकराते ही पूछा- 'क्या आपके पास सेल्फी स्टिक है?' मैं कहा- 'नहीं'। उसने बेहद आश्चर्यात्मक नजरों से मुझे घूरा और कहा- 'क्या बात करते हैं सर। आपके पास सेल्फी स्टिक नहीं है।' दो सेकेंड को तो मुझे ऐसा महसूस हुआ कि मेरे कने सेल्फी स्टिक का 'न' होना दुनिया का सबसे अजूबा वाकया है। और, मैं बिना सेल्फी स्टिक के दोयम दर्जे का प्राणी हूं।

फिर भी, खुद को संभालते हुए मैंने उसे जवाब दिया- 'क्या हुआ अगर मेरे पास सेल्फी स्टिक नहीं है। ऐसा कोई शौक नहीं मुझे।' इत्ता सुनते ही उसने जोर का ठहाका लगाया। मेरे कंधे पर हाथ जमाते हुए बोला- 'सर, आपको मालूम नहीं। सेल्फी स्टिक स्मार्टफोन रखने वालों का 'स्टेटस सिंबल' है। इस स्टिक की हेल्प से आप खुद की कभी भी, कहीं भी ले सकते हैं सेल्फी। आज का दौर सेल्फी का है। अगर शौक नहीं है तो पालिए सर।'

मैंने उसे बीच में टोकते हुए कहा- 'यार, पहले से जो शौक पाल रखे हैं, वो तो कम हो न रहे। और तुम और शौक पालने को कह रहे हो। ये भी क्या शौक है कि आड़े-तिरछे मुंह या होंठ बनाकर भिन्न-भिन्न ऐंगल से अपनी ही सेल्फियां लेते रहो। छड़ी की हेल्प से सेल्फी लेने का नया रिवाज चल पड़ा है। हद है।'

मार्केटिंग का बंदा थोड़ा कूल हुआ। मुझे पड़ोस के रेस्त्रां में ले गया। दो कोल्ड ड्रिंक और पिज्जा आर्डर किए। फिर अपने बैग से एक छड़ी और कुछ पेपर्स निकाले। अब वो मुझे समझाने की मुद्रा में आया। बोला- सर, हमारी कंपनी सेल्फी स्टिक बनाती है। ये रही हमारी कंपनी की बनाई सेल्फी स्टिक। दूसरी कंपनियों से लाख गुना बेहतर। देखने में हॉट। चलने में कूल। पकड़ने में मोर-कंफर्टेबल। किसी भी आकार-प्रकार के स्मार्टफोन को आप इसमें फंसाकर अपनी 'यूनिक सेल्फी' ले सकते हैं।

फिर उसने मेरा स्मार्टफोन लेकर उस कथित छड़ी में घुसेड़ा। और सेल्फी ली। एक सेल्फी कोल-ड्रिंक पीते और एक पिज्जा खाते हुए, जिसे उसने अपने बॉस को वाट्सएप कर दिया। ताकि बॉस को भी लगे बंदा कस्मटर को खिला-पिलाकर पटा रहा है।

इत्ते पर भी मैंने उससे यही कहा- 'यार, फिलहाल तो मुझे इस छड़ी की अभी जरूरत नहीं। जब होगी तुम्हें कॉल कर दूंगा।' मगर वो ठहरा मार्केटिंग का घाघ बंदा। इत्ती जल्द कैसे हार मान जाता। फिर उसने मुझे 'इमोशनली ब्लैकमेल' करना शुरू किया। बोला- 'आपकी वाइफ की बर्थडे कब है?' मैंने कहा- 'अभी टाइम है। क्यों?' 'अरे कुछ नहीं सर यों ही पूछा। मेरी मानो इस बर्थडे आप अपनी वाइफ को सेल्फी स्टिक का गिफ्ट दे डालो। गारंटी इसे पाकर वे बहुत खुश होंगी। जरा सोचिए, सेल्फी स्टिक से जब आप अपनी 'कपल-सेल्फी' फेसबुक पर पोस्ट करेंगे। कित्ते सारे लाइक आपके खाते में जमा होंगे। तब आप भी सीना तानकर कह सकेंगे, मेरे कने सेल्फी स्टिक है।'

'सर, एक दफा इस्तेमाल करके तो देखिए। अभी हमारी कंपनी एक पर दो का ऑफर दे रही है। बेहद रीजनेबल रेट्स में। डू ट्राई दिस सर।'

बातों ही बातों में कोल-ड्रिंक और पिज्जा दोनों खत्म हो चुके थे। वेटर बिल ले आया था। मैंने पे करने को जैसे ही पर्स निकाला बंदे ने मुझे रोककर खुद ही पेमेंट कर दिया। बोला- 'कस्टमर गॉड समान होता है।'

वाकई मार्केटिंग के लिए अक्ल से ज्यादा व्यवहार की जरूरत होती है। नए बकरे कैसे फंसाए जाते हैं, यही तो मार्केटिंग का सबसे पहला टेक्ट होता है।

'तो क्या सोचा सर आपने।' मुझे ध्यान से भटकाते हुए उसने पूछा। 'ले लीजिए। कहीं बाद में आपको पछताना न पड़े। वाइफ का बर्थडे गिफ्ट... याद है न सर।'

अब ज्यादा उससे मैं क्या हुज्जत करता। इत्ता टाइम तो मेरा वो पहले की खराब कर चुका था। फिलहाल, सेल्फी छड़ी (स्टिक) लाने के लिए मैंने हां कर ही दी। सोचा, बदलते वक्त के साथ जब स्मार्टफोन जरूरत बन गया है तो सेल्फी स्टिक भी बन जाएगी। यों, आज के दौर में आदमी की पहचान या तो एचडी टीवी से होती है या फिर स्मार्टफोन से। व्यवहार, रूतबा या आदत बाद की बातें हैं।

बहरहाल, सेल्फी स्टिक के आ जाने से घर में 'उत्सव' का सा माहौल है। कुछ कद्र मेरी भी बढ़ गई है।

1 टिप्पणी:

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " जय जय संतुलन " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !