रविवार, 14 फ़रवरी 2016

सेंसेक्स और वैलेंटाइन

यों सेंसेक्स का गिरना मेरे दिल को बड़ी चोट देता है। ये एक ऐसा दर्द है, जिसे किसी पर बयां करने में भी मुझे सौ दफा सोचना पड़ता है। अगले का क्या भरोसा- कहने ही लग जाए, तुम्हें बेजान सेंसेक्स की बड़ी चिंता है। सेंसेक्स के दर्द में दुबले हुए जा रहो हो। अब उन्हें क्या बतलाऊं कि सेंसेक्स मेरे लिए क्या है। मेरे दिल में जो जगह सेंसेक्स के लिए है, उत्ती तो किसी 'खास' के लिए भी नहीं!

कसम से कलेजा मुंह को आ जाता है, जब सेंसेक्स अपने हाथ-पैर छोड़के औंधे मुंह धड़ाम हो जाता है। तब उसके दिल पर क्या बितती होगी, नहीं जानता, पर मैं जरूर 'मायूस' हो जाता हूं।

इधर, सेंसेक्स ने अपनी जो हालत बना रखी है, देखकर बड़ा दुख होता है। न जाने उसकी जान को ऐसा कौन-सा अंदरूनी गम लग गया है, जिसकी पीड़ा में निरंतर घुले ही चला जा रहा है। इत्ता तो आशिक भी अपनी महबूबा के लिए नहीं रोता, जित्ता सेंसेक्स रो रहा है। मगर यहां ऐसा कौन है, जो बेचारे सेंसेक्स की भावनाओं को समझने की कोशिश करेगा। सब अपने में मस्त हैं। ऊपर से सेंसेक्स को ही गरियाने में लगे हैं, देखो सुसरा हर रोज गिर-गिरकर पूरे बाजार की ऐसी-तैसी किए हुए है।

कोई न समझे पर मैं सेंसेक्स की भावनाओं को समझता हूं। उससे पूरी 'सहानुभूति' रखता हूं। उसके गम और खुशी में बराबर का शरीक हूं। क्योंकि सेंसेक्स को मैं अपना वैलेंटाइन मानता हूं। उससे दिली मोहब्बत करता हूं।

हो सकता है, आपको सेंसेक्स के प्रति मेरी 'सिम्पथी' देखकर थोड़ा अजीब-सा लग रहा हो लेकिन ये सच है। गिरते हुए को सहारा देने में भला कैसी शर्म। दिल तो सेंसेक्स का भी है। हां, ये बात और है कि सेंसेक्स दिल का बेहद कमजोर होता है। किसी की जरा-सी छींक से भी बैठ जाता है। पर ये क्या कम बड़ी बात नहीं कि कमजोर दिल के बावजूद वो पूरे बाजार, पूरी अर्थव्यवस्था को अपने दम पर चला रहा है।

कभी-कभी तो मुझे भी सेंसेक्स के मूडी होने से डर लगता है। ये आभास ही नहीं रहता कि कब कौन सी राह चल पड़ेगा। क्या करें, बरसों से सेंसेक्स का ऐसा ही स्वभाव रहा है। निवेशक तो क्या सरकार भी उसके इस मूडी व्यवहार से अक्सर घबरा जाती है। मैं तो प्रायः यही कहता हूं कि सेंसेक्स और बीवी के मूड का कोई भरोसा नहीं रहता, कब में पलटी मार दे।

जो भी हो लेकिन लग बड़ा बुरा रहा है कि वैलेंटाइन डे के मौके पर सेंसेक्स की हालत इत्ती नाजुक है। सेंसेक्स का मर्ज भी ऐसा है कि इसकी दवा वित्तमंत्री के पास भी नहीं। अगर जबरन डोज दे भी दो तो क्या भरोसा कि उसे बुरी तरह से उल्टी कर निकाल न दे। हद है, चीन के गम में हमारा सेंसेक्स अपनी हालत की ऐसी-तैसी करने पर तुला हुआ है। कुछ समझाओ तो समझने को तैयार नहीं होता।

काश! सेंसेक्स की भी कोई महबूबा होती। टेढ़े वक्त में कम से कम उसके साथ तो खड़ी होती। जब गिरता तो आगे बढ़कर संभाल लेती। उसके लिए दुनिया-जहान से लड़-भिड़ लेती। अच्छा लगता मेरी जगह वो सेंसेक्स की वैलेंटाइन होती। मैंने तो बेचारे सेंसेक्स का दिल रखने के लिए ही उसे वैलेंटाइन माना है।

सिर्फ दुआ ही कर सकता हूं कि सेंसेक्स की गिरताऊ सेहत में जल्द सुधार हो। चीन और ग्लोबल दर्द से जल्द बाहर निकले। खुद भी मस्त रहे और हम भी उसकी खुशी में साझीदार बनें। सेंसेक्स भी अपना वैलेंटाइन डे हमारी तरह खुशी-खुशी सेलिब्रेट करे। आमीन।

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