मंगलवार, 8 दिसंबर 2015

मुझे भी कुछ दान करना है

जब से मार्क जकरबर्ग के पिता बनने पर अपने 99 फीसद शेयर दान करने की खबर पढ़ी है, मेरा दिल भी 'कुछ' दान करने को मचल उठा है। लेकिन 'कुछ' क्या दान करूं, यह तय नहीं कर पा रहा। ऐसा नहीं है कि मेरे कने दान करने को कुछ नहीं। है बहुत कुछ पर समझ में नहीं आ पा रहा, क्या करूं?

दिमाग पर काफी देर तलक जोर डालने के बाद एक चीज ध्यान में आई है, जिसे मैं दान कर सकता हूं। मगर थोड़ी अड़चन है। वो क्या है, उस चीज को बहुत लंबे समय से मैंने इस्तेमाल नहीं किया है इसलिए मिलने में कठिनाई हो रही है। वैसे खोजने से तो सुई भी आराम से मिल सकती है। पर सबसे बड़ी बात तो खोजना है न।

मुझ जैसा आलसी व्यक्ति भीड़ में पत्नी के गुम हो जाने को जब नहीं खोज पाता फिर उस चीज को क्या खोज पाऊंगा, जिसे मेरा दिल दान करने की सोच रहा है। क्यों न उस चीज को खोजने के लिए मैं अमेरिकी खोजी एजेंसी की सहायता ही ले लूं! अपनी खोज को अमेरिकी खोजी एजेंसी के सुपुर्द कर, देश-समाज-बिरादरी में मेरा रूतबा बढ़ेगा सो अलग। अरे, जब अमेरिकी लोग पाकिस्तान में छिपे ओसामा बिन लादेन को खोजकर टपका सकते हैं, फिर मेरी चीज को खोजना तो उनके बाएं हाथ का गेम होगा।

खैर, आप लोगों की तसल्ली के लिए बता देता हूं कि मैं दान क्या करना चाहता हूं। दरअसल, मैं मेरी 'कलम' दान करना चाहता हूं। मुझ जैसा लेखक कलम के सिवाय और दान भी क्या कर सकता है। चूंकि बहुत लंबे समय से मैंने कलम का इस्तेमाल बंद कर दिया है, इसलिए उसे कहां रखकर भूल गया हूं, यह अब मुझे भी याद नहीं। जब से कलम की जगह की-बोर्ड ने ली है, तब से हाथ से लिखना न के बराबर हो गया है। आलम ये है कि अब तो कलम से अपना नाम लिखने के लिए भी जोर-आजमाइश करनी पड़ती है। आदत छूट गई है न।

पहले लेखक लोग कलम से 'क्रांति' किया करते थे, अब की-बोर्ड से कर लेते हैं। अंतर केवल इत्ता ही आया है। स्कूल जाने वाला बच्चा भी अब कलम की जगह पहले की-पैड मांगता है। ऐसे में लाजिमी है, कलम का खो जाना।

फिलहाल, खोज-बीन में- अमेरिकी खोजी ऐजेंसी के साथ- मैं भी लगा हुआ हूं। जैसे ही मिल जाती है, उसे दान कर दूंगा। फिर मेरा रूतबा भी मार्क जकरबर्ग जित्ता हो जाएगा।

दुनिया की निगाह में 'महान' बनने के लिए अगर कुछ दान करना पड़े तो कोई हर्ज नहीं। क्यों ठीक है न...।

1 टिप्पणी:

Dilbag Virk ने कहा…

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 10 - 12 - 2015 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2186 में दिया जाएगा