गुरुवार, 12 नवंबर 2015

बिहार में गली दाल

जिस दाल को लेकर दिल्ली समेत पूरे देश में 'हो-हल्ला' कट रहा था, आखिरकार नीतीश बाबू ने उसे बिहार में- महागठबंधन के सहारे- 'गलाकर' दिखला ही दिया। साफ शब्दों में कहूं तो बिहार में दाल गली और दिल्ली में दिवाला निकाला। जी हां, दीवाली से पहले हुआ यह 'महा-धमाका' किसी 'दिवाला निकल जाने' से कम नहीं बीजेपी के लिए।

भक्तों द्वारा बिहार की कथित जीत के वास्ते जमा करके रखे गए पटाखे सुबह तो खूब धूम-धाम से जले लेकिन दोपहर होते-होते पटाखों पर 'सील' जमने लगी और धूम-धाम 'फिकी' पड़ गई। इत्ती बड़ी हार की उम्मीद तो खूब प्रधानमंत्रीजी ने भी न की होगी। इत्ते बड़े-बड़े वायदों के अच्छे दिन दिखाने के बाद भी बदले में हार की सौगात ही मिली। करोड़ों के दिए पैकेज पर पानी फिरा सो अलग। न गाय का उन्माद काम आया, न बीफ पर राजनीति ने रंग दिखाया, न सहिष्णुता-असहिष्णुता का ड्रामा चला, न पोती गई कालिख ने ही कोई सहारा दिया। अंत में, जनता महागठबंधन को जीता कर ही मानी।

यह हकीकत स्वीकार कर ही लीजिए कि राजनीति में 'अच्छे दिन' की बहार बार-बार नहीं आती। अच्छे दिन सुनने में बहुत भाते हैं परंतु अच्छे दिन काम करने, सबको साथ लेकर चलने से ही आ पाते हैं। लेकिन यहां तो अच्छे दिनों के बहाने कुछ अलग टाइप की राजनीति हुई। ऐसे-ऐसे धांसू टाइप बयान सुनने को मिले कि बिचारी जुबान भी शर्मा गई। इन्होंने असहिष्णुता को भुनाने में पूरा आनंद लिया तो उन्होंने जातिवाद की धार को मोथरा नहीं होने दिया। और बिहार में जाति का सिक्का चल ही गया।
 
चुनावों में जो हुआ, जैसा हुआ, क्यों हुआ, कैसे हुआ जीत मिलने के बाद इस पर ध्यान भला कौन देता है। प्रमुख तो जीत ही होती है। जीत के आगे हर समीकरण फेल है। थोड़े दिनों के बाद लोग जाति, असहिष्णुता, भद्दी जुबान सबको भूल जाएंगे। भूलना ही नियति है। जो जीता वही सिकंदर है यहां।

बहरहाल, हार का ठिकरा और जीत का सेहरा चाहे किसी के सिर पर फोड़ते या बांधते रहिए। जो होना था, हुआ। बिहार में महागठबंधन की दाल गल चुकी है, अब यही सत्य है। हां, देखना अब यह होगा कि यह दाल कित्ते दिनों तलक गली रह पाती है। कित्ते लोग साथ बैठकर इस गली दाल को खा-पचा पाते हैं। सनद रहे, महागठबंधनों की दालें पहले भी गलकर सूख चुकी हैं।

2 टिप्‍पणियां:

Kajal Kumar ने कहा…

कोई लाख समझा ले, लोगों को वहीं करना होता है जो वो करना चाहते हैं


Rushabh Shukla ने कहा…


सुन्दर रचना ......
मेरे ब्लॉग पर आपके आगमन की प्रतीक्षा है |

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