सोमवार, 5 अक्तूबर 2015

मंगल पर पानी

मंगल ग्रह पर पानी मिलने की खबर 'जंगल में आग' की तरह मेरे मोहल्ले में फैल चुकी हैं। अपने सभी जरूरी कामों को छोड़कर हर कोई बस मंगल पर पानी होने की बहस में उलझा हुआ है। सुनने में आया है कि कुछ मोहल्ले वालों ने 'प्लान' किया है, मंगल पर जाकर पानी लाने का। दरअसल, उनकी निगाह में मंगल पर मिला पानी 'गंगाजल' से कम नहीं! मंगल के पानी से नहाकर वे अपने समस्त पापों को धो लेना चाहते हैं।

जब से मैंने मोहल्ले वालों की मंगल ग्रह पर जाकर पानी लाने की बात को सुना है, कसम से, मेरा दिल भी मंगल पर जाने को 'बेताब' है। मैं स्वयं मंगल के पानी से नहाकर अपने समस्त पापों को धो लेना चाहता हूं। हालांकि इससे पहले भी मैं कई दफा गंगा में डूबकी लगाकर अपने पापों को धो आया हूं मगर अभी भी वो सही से धुले नहीं हैं। शरीर के कुछ हिस्सों में कुछ पाप अब भी धुलने से रह गए हैं। यों भी, मैंने जिंदगी में पाप क्या कम किए हैं प्यारे!

चलो अच्छा ही हुआ, जो मंगल पर पानी की संभावना की पुष्टि हो गई। अब धरती का इंसान आराम से मंगल ग्रह पर जाकर बस सकेगा। मंगल पर जीवन की संभावना की पुष्टि वैज्ञानिक लोग पहले ही कर चुके हैं। यों भी, धरती अब रहने लायक बची भी कहां है। हवा से लेकर पानी तक सबकुछ 'अशुद्ध' हो चला है। सुनने में आया है कि आने वाले सालों में धरती पर पानी का लेबल भी काफी नीचे खिसक जाएगा। ऐसे में मंगल ग्रह पर पानी का मिलना, वहां कम से कम पानी की किल्लत के झाड़-झंझट से तो निजात दिलायगा ही।

कुछ लोग मंगल के पानी का उपयोग अपने पापों को धोने में करेंगे तो कुछ आड़े वक्त के लिए पानी को स्टोर करने में। धरती पर पानी की कमी के बाद हमारे कने एक ही ऑप्शन होगा- मंगल के पानी का सद्पयोग।

वैसे, मनुष्य के जुगाड़ू होने में कोई शक नहीं। चाहे धरती हो या पाताल या आकाश या मंगल ग्रह अपने जीने-रहने की जुगाड़ कर ही लेता है। ये जो मंगल ग्रह पर पानी की खोज हुई है न, यह केवल अपनी 'वाह-वाह' के लिए नहीं बल्कि वहां जाकर बसने की 'प्यूचर प्लानिंग' भी इसमें शामिल है। इंसान कभी भी कोई काम एंवई नहीं करता। करता तब ही है, जब उसे अपना फायदा नजर आता है।

हालांकि अभी जो पानी मंगल पर मिला है, उसमें 'नमक' की मात्रा अधिक है। पर कोई नहीं, इंसान उसे भी 'प्योरिफाई' करके अपने पीने-नहाने लायक बना ही लेगा। बहुत संभव है, आगे ऐसी तकनीक भी विकसित हो जाए कि फाबर केबल या डिजिटल विधि के सहारे पानी सीधा धरती को सप्लाई होने लगे। जब समूची दुनिया एक हथेली बराबर स्मार्टफोन में समा सकती है, तो फिर मंगल के पानी का धरती पर आना कौन-सी बड़ी बात है प्यारे। हो सकता है, पानी भी वाह्टसएप या मेसैंजर के सहारे मिलने लगे।

फिलहाल, अभी तो हम धरतीवासियों के लिए मंगल ग्रह पर पानी मिलना अजूबी और अनूठी खोज-खबर ही है। कुछ दिनों तलक हम अभी इसी खुमारी में डूबे रहेंगे। मंगल के पानी से पापों को धोना है या पीने लायक बनाना है या बिजली पैदा करती है, इसकी जोड़-जुगाड़ में व्यस्त रहेंगे। क्योंकि पानी हमारे लिए कोई छोटी-मोटी चीज नहीं। पानी हमारी जान और शान है। पानी के लिए तो गली-मोहल्लों में बड़ी-बड़ी लड़ाईयां तक हो जाती है। बिन पानी सब सून।

अभी तो फिलहाल मेरी मेरे मोहल्ले वालों के साथ मंगल ग्रह पर जाने की तैयारियां चल रही हैं। शायद मंगल का पानी ही हमारे पापों को धोकर हमें 'और पवित्र' बना दे!

3 टिप्‍पणियां:

Kavita Rawat ने कहा…

खबर के लिए बधाई ....
अब समझे पृथ्वी पर पानी की किल्लत क्यों हो रही है?
रोचक प्रस्तुति!

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, उधर मंगल पर पानी, इधर हैरान हिंदुस्तानी - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

गर्म पानी मिलेगा वहाँ तो ..लाल भी हो शायद !