मंगलवार, 15 सितंबर 2015

करते रहिए हवाबाजी

हवाबाजी बहुत उम्दा शगल है। हवाबाजी करना हर किसी के बस की बात नहीं। हवाबाजी करने वाले हवाओं के रूख तक को मोड़ने की ताकत रखते हैं। कुछ हवाबाज तो मैंने ऐसे भी देखे-सुने हैं, जिनकी अपनी निजी हवाएं हैं। जब मन चाहा कोई-सी भी हवा उड़ा ली।

ऐसा नहीं है कि हवाबाज केवल राजनीति में ही हैं, साहित्य में भी हैं, कला में भी और समाज में भी। लेकिन हवाबाजी करने में सबकी अपनी-अपनी 'प्राथमिकताएं' तय हैं। इन सब में सबसे अधिक जोर और शोर राजनीति के हवाबाजों का ही रहता है। दरअसल, न राजनीति और न राजनेता बिना हवाबाजी के चल ही नहीं सकते।

हां, यह सच है कि हवाबाज दहाड़ें बहुत ऊंची-ऊंची मारता है। जब बोलने पर आता है, तो बोलता ही चला जाता है। किसी दूसरे को बोलने का मौका ही नहीं देता। बोलते-बोलते हवा में पतंग इत्ती ऊंची उड़ा लेता है कि उतार ही नहीं पाता। जब उतार नहीं पाता तो हवा को नहीं पतंग को दोष देकर आगे बढ़ जाता है।

सीधी-सी बात यह है कि हवाबाजी करने में सिर्फ जुबान ही खर्च हुआ करती है, पैसा नहीं। यों भी, हमारे देश के नेता लोग जुबानी जमा-खर्च के मामले में सबसे आगे रहते हैं। हवाबाजी के साथ-साथ जुमलेबाजी भी तो जुबानी खर्च ही है न। फर्क बस इत्ता है कि जुमालेबाजी का हिसाब देना पड़ता है किंतु हवाबाजी का कोई हिसाब ही नहीं बनता। भला बहती हवा का हिसाब कौन रख पाया है आज तलक।

हवाबाजी, हावालाबाजी और जुमलेबाजी पर हो रही बहसों को देखना व सुनना मुझे अच्छा लगता है। राजनीति में मनोरंजन इन्हीं बाजियों के दम ही तो कायम है। ऐसी राजनीति और ऐसे चुनाव भला किस काम के जिसमें हवाबाजी के साथ-साथ जुमलेबाजियां न हों। अब आप इसे देश के नेताओं की 'अभद्र भाषा' कहकर 'दुत्कारिएगा' नहीं। यह तो राजनीति और नेताओं की 'भाषा शैली' में आया एक नए किस्म का बदलाव है। इस बदलाव का स्वागत किया जाना चाहिए।

हवाबाजी और हवाबाजों को अपनी 'प्रेरणा' मानकर मैंने भी इसे अपने जीवन का महत्त्वपूर्ण अंग बना लिया है। अब तो मैं पत्नी और रिश्तेदारों से भी केवल हवाबाजी में ही बातें किया करता हूं। हवाबाजी में यही तो स्वतंत्रता है कि जब जित्ता चाहो, उत्ता छोड़ते चले जाओ। न कोई रोकने वाला है, न टोकने वाला।

मेरे विचार में हवाबाजी ऑल-टाइम हिट फंडा है। हममें से हर किसी को इसे अपनाना चाहिए। हवाबाजी को केवल राजनीति तक ही नहीं, हमें अपने निजी एवं सामाजिक जीवन में भी इसका सद्पयोग करना चाहिए। जित्ती हवाबाजी करेंगे, उत्ता ही सम्मान पाएंगे। तो फिर करते रहिए हवाबाजी।

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