सोमवार, 14 सितंबर 2015

खोपड़ी पर प्रेशर

अपनी खोपड़ी पर मैं उत्ता ही प्रेशर डालता हूं, जित्ता वो सह सके। खोपड़ी पर 'अतिरिक्त प्रेशर' डालने का मुझे शौक है, आदत। मैं अपनी खोपड़ी के स्वभाव को अच्छी तरह से जानता हूं। जैसे ही इस पर अतिरिक्त प्रेशर पड़ना शुरू होता है, यह घोड़ी के माफिक 'बिदक' जाती है। फिर इत्ती आसानी से काबू में नहीं आती।

लेकिन इस दफा मैंने खुद ही अपनी खोपड़ी पर कुल्हाड़ी मार ली है। मैंने अपनी एकमात्र खोपड़ी पर शीना बोरा मर्डर मिस्ट्री को समझने का 'प्रेशर' डाला है। मैं जानता हूं, इस चर्चित मर्डर मिस्ट्री को समझने का काम मेरा नहीं पुलिस का है, जिसे वो कर भी रही है। फिर भी, मैंने सोचा थोड़ा अपनी खोपड़ी पर भी प्रेशर डालके देखा जाए, शायद कुछ समझ में सके। पूरी मिस्ट्री का समझ में आना तो दूर की बात रही, अभी तो यही समझ नहीं पाया है कि इंद्राणी के पति कित्ते थे और असली वाले मां-बाप कित्ते। मिस्ट्री में इत्ता विकट घाल-मेल मचा हुआ है कि अच्छे-अच्छे दिमागदार के दिमाग का दही हो रखा है।

मेरा तो इंद्राणी की दिमागी-शक्ति को सलाम ठोकने का मन करता है। वल्लाह क्या धांसू दिमाग पाया है बंदी है। केवल पुलिस बल्कि परिवार के पारिवारिक ताने-बाने को भी खूब गच्चा दिया है। इत्ते सब पर भी बंदी के चेहरे पर पछतावे मात्र की 'शिकन' नहीं है। हर रोज एक नए खुलासे का इजहार पुलिस से कर देती है। बिचारी पुलिस को इत्ता व्यस्त कर रखा है कि कभी वो पति को पकड़ती है, कभी बेटे को, कभी बेटी को। फिर भी, तमाम राज ऐसे हैं, जिनका पर्दाफाश होना बाकी है।

अब इत्ते पेचों वाली मिस्ट्री का प्रेशर जब मैं अपनी खोपड़ी पर डालूंगा तो उसकी टें बोलना निश्चित है। आखिर खोपड़ी ही तो है, कोई रोबोट थोड़े है कि चुटकियों में समाधान हो गया।

समय के साथ इंसान भी कित्ता एडवांस हो लिया है, रिश्ता चाहे कैसा भी हो, उसकी वाट लगाने में कभी पीछे नहीं हटता। दिमाग का इस्तेमाल संबंधों को मधुर बनाने से कहीं ज्यादा, सामने वाले की ऐसी-तैसी करने में करता है। इंद्राणी ने तो अपना सारा दिमाग किसको कब, कहां, कैसे मारना-मरवाना है में ही जाया कर डाला। सही है, इंसान जब खुद से और दिमाग से उक्ता जाता है, तब शायद ऐसा ही किया करता है।

कहिए कुछ भी पर इस केस को समझना उत्ता ही मुश्किल काम है, जित्ता नेता के 'मन की बात' को समझना कि भीतर क्या चल रहा है।


बहरहाल, मैं तो अपनी खोपड़ी पर बने प्रेशर को इस मामले से हटा रहा हूं। इस केस को समझना मेरे बस की बात है, मेरी खोपड़ी के। खोपड़ी जित्ता स्वतंत्र रहे, उत्ता ही अच्छा। कहीं ज्यादा बुरा मान गई तो लेने के देने पड़ जाएं। मुझे मेरी खोपड़ी सबसे ज्यादा प्रिय है।

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