मंगलवार, 4 अगस्त 2015

पोर्न बैन : अरे, सरकार ये क्या किया!

सरकार पैसा दोगुना करने वाली साइट्स पर बैन लगा देती, मुझे बिल्कुल बुरा नहीं लगता। सरकार कार्टून साइट्स पर बैन लगा देती, मुझे बिल्कुल बुरा नहीं लगता। सरकार कथित उत्तेजना (तेल आदि) पैदा करने वाली साइट्स पर बैन लगा देती, मुझे बिल्कुल बुरा नहीं लगता। सरकार विज्ञापनों वाली साइट्स पर बैन लगा देती, मुझे बिल्कुल बुरा नहीं लगता। लेकिन, सरकार ने तो पोर्न साइट्स पर ही बैन लगा दिया। वो भी एक-दो नहीं पूरी 857 साइट्स पर।

एक साथ इत्ती सारी पोर्न साइट्स को बैन करना, भला कहां तक उचित है। पोर्न साइट्स को बैन करने से पहले सरकार ने एक दफा भी मुझ जैसे पोर्न-प्रेमियों के बारे में कुछ नहीं सोचा। यह तक जानने का प्रयास नहीं किया कि अगर पोर्न साइट्स पर बैन लग जाएगा तो मुझ जैसे पोर्न-प्रेमियों की रातें कैसे कटेंगी। अपनी दिमागी-स्ट्रैस को मैं कहां किस साइट, किस दर पर जाकर दूर करूंगा। और फिर उन बड़े-बड़े कथित अखबारों की साइट्स का क्या होगा, जहां पोर्नात्मक मसाला 18 प्लस के तहत परोसा जाता है। इन्हीं पोर्न साइट्स के विज्ञापनों के दम पर न जाने कित्ती और साइट्स की रोजी-रोटी चल रही है। बिना कुछ अगला-पिछला सोचे-समझे सरकार ने एकदम पोर्न को बैन कर मुझ जैसे पोर्न-प्रमियों के हित में जरा भी ठीक नहीं किया। मैं सरकार के इस 'तानाशाही' कदम की घोर निंदा करता हूं।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि मेरा और पोर्न का नाता बचपन से है। बचपन में मैं स्कूली किताबों से कहीं ज्यादा पोर्न के विषय में पढ़ा करता था। मेरे बस्ते में जित्ती किताबें कोर्स की रहती थीं, लगभग उत्ती ही पोर्न की भी। बचपन से लेकर आज तलक मैंने पोर्न को कभी 'अश्लीलता' के तौर पर नहीं देखा। हमेशा उसे अपना 'पथ-प्रदर्शक' ही माना है। जिसे देखकर दिल को सुकून और आंखों को राहत मिले, उसे देखने-पढ़ने में- मेरी समझ से- कोई बुराई नहीं।

हालांकि लोग ऐसा कहते-मानते हैं कि पोर्न में केवल अश्लीलता होती है, जिसे देखकर मन में कुंठाएं-उत्तेजनाएं जागती हैं और बच्चे बिगड़ जाते हैं। किंतु मैं ऐसे मिथकों का खंडन करता हूं। पोर्न में विमर्श के अलावा कुछ नहीं होता। रही बात कुंठा की तो कुंठित व्यक्ति को पोर्न तो क्या किसी भी बात-साहित्य-सामग्री में कुंठा या अश्लीलता नजर आ सकती है। सबकी अपनी-अपनी च्वॉइस है। लोकतंत्र में हम किसी को बाध्य नहीं कर सकते ये या वो मानने या न मनने के लिए।

सरकार ने पोर्न साइट्स पर बैन लगाने का फैसला कहीं सनी लियोनी की भारत में निरंतर बढ़ती प्रसिद्धि के तहत तो नहीं लिया? ऐसा हो भी सकता है और नहीं भी। होने के चांस इसलिए ज्यादा हैं क्योंकि कुछ बेहद सभ्यता-संस्कृति पसंद लोगों ने पिछले दिनों सनी लियोनी को वापस अपने देश भेजने की बात कही थी। मगर ऐसे कथित भद्र-पुरुषों को मैं अच्छे से जानता हूं, जो दिन में सनी लियोनी का विरोध और रात में उसकी फिल्मों पर दिल-जान लूटाने को बेताब रहते हैं।

पोर्न में अगर अश्लीलता होती तो मार्केट में उसकी इत्ती डिमांड भी न होती। अभी हाल एक रपट में पढ़ा था कि भारत में पुरुषों से ज्यादा महिलाएं पोर्न फिल्मों का लुत्फ उठा रही हैं। जब पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना ही है, तो यह भी सही। क्या हर्ज है इसमें। देश-दुनिया-समाज के बीच बदलाव ऐसे ही तो आते हैं।

मेरी समझ से सरकार को पुनः विचार करना चाहिए पोर्न साइट्स पर बैन लगाने के बारे में। पोर्न साइट्स के प्रति सरकार का अगर ऐसा ही अड़ियल रूख रहा तो मुझे जैसे पोर्न-प्रेमियों का क्या होगा? फिर तो मुझे पुरानी पोर्न सीडीज को 'ऐतिहासिक धरोकर' मान काफी सहेजकर रखना पड़ेगा। जिनको मेरी तरह पोर्न में 'दिलचस्पी' है, उनके लिए यह बैन यकीनन 'मानसिक प्रताड़ना' देने वाला है। बाकी सरकार की मर्जी।

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