सोमवार, 31 अगस्त 2015

मेरे शहर का स्मार्ट सिटी होना

मेरे शहर का नाम भी 'स्मार्ट सिटी' बनने की फेहरिस्त में शामिल हो गया है। भविष्य में मेरा शहर स्मार्ट सिटी के नाम से जाना-पहचाना जाएगा। यकीनन, यह मेरे तईं बेहद खुशी का विषय है। अब मैं भी लोगों से सीना तानकर कह सकूंगा कि मैं स्मार्ट सिटी का बाशिंदा हूं।

अभी तलक तो इंसान और वस्तुएं ही स्मार्ट हुआ करती थीं मगर अब शहर भी स्मार्ट हो जाएंगे। स्मार्ट हुए शहर देखने में कैसे लगेंगे, इसकी सहज ही कल्पना की जा सकती है। शहरों में हर ओर स्मार्टनेस ही स्मार्टनेस बिखरी पड़ी होगी। गली-मोहल्ले से लेकर सब्जी मंडी तक स्मार्ट होगी। ठेले-फड़ वाले स्मार्ट होंगे। यहां तक कि गाय-भैंसे तक स्मार्ट हो लेंगी। बेहद स्मार्टनेस के साथ वे दूध दिया करेंगी। उनकी सानी एवं साफ-सफाई भी बेहद स्मार्ट तरीके के साथ होगी। सबकुछ कित्ता बदल जाएगा न। स्मार्ट सिटी में स्मार्टनेस मुफ्त में दिखा करेगी।

मेरे शहर को स्मार्ट करने की बात तो अब चली है, जबकि मेरा शहर तो जाने कब से स्मार्ट है। यहां के लोग। यहां का करोबार। यहां की सड़कें-चौराहे। गली-मोहल्ले। हस्पताल-पार्क सब के सब स्मार्ट हैं। शहर को स्मार्ट सिटी का दर्ज मिल जाने से मेरा शहर अब 'ओवर-स्मार्ट' हो लेगा। शहर या लोग जब ओवर-स्मार्ट हो जातें हैं, फिर उनके भीतर मौजूद छोटी-छोटी 'अन-स्मार्ट बातें' कोई खास मायने नहीं रखतीं।

मतलब, क्या हुआ, जो शहर में एकाध जगह गढ्डे रह जाएंगे। क्या हुआ, जो मलिन बस्तियों को शहर से खदेड़ कर बहुत दूर फेंक दिया जाएगा। क्या हुआ, जो गरीब स्मार्ट सिटी में घुसने पर सौ बार सोचेंगे। क्या हुआ, जो स्मार्ट सिटी का बंदा कईयां होगा। क्या हुआ, जो मरीज के गुजर जाने के बाद एंब्यूलेंस पहुंचेगी। इस सब से इतर महत्त्वपूर्ण है, मेरे शहर का स्मार्ट सिटी होना।

आधुनिक होने से कहीं ज्यादा जरूरी होता है आधुनिकता का बोध। तो यह बदलाव मेरे शहर में धीरे-धीरे कर अब नजर आने लगा है। स्मार्ट सिटी में जब हर बंदा कानों में ईयर-फोन और हाथों में स्मार्टफोन लेके घुमेगा, तो कित्ती उम्दा फीलिंग आएगी, इसे महसूस किया जा सकता है। आपस में लोगों के दिल भले ही मिलें या न मिलें पर सिटी का स्मार्ट होना अधिक मायने रखता है। सिटी स्मार्ट तो हम स्मार्ट।

चूंकि मेरा शहर स्मार्ट सिटी होने की राह पर आगे बढ़ चुका हूं तो उसके अनुरूप अब मैं भी ढलने की कोशिश में लग गया हूं। यानी, धीरे-धीरे कर मैं भी स्मार्ट हो रहा हूं। स्मार्ट सिटी में रहने के लिए खुद का भी स्मार्ट होना बेहद जरूरी है। ताकि कल को कोई मुझ पर 'ओल्ड-फैशनड' होने का आरोप न लगा पाए।

यों भी, स्मार्ट सिटी में रहने वालों की बात ही कुछ और होती है। है कि नहीं...।

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