रविवार, 30 अगस्त 2015

प्याज से इश्क

कहने में कैसी शर्म- हां, मुझे प्याज से 'इश्क' है। प्याज से मेरा इश्क कोई साल-दो साल पुराना नहीं बल्कि 'बचपन' से है। घर वाले बताते हैं- मैंने जन्म लेते ही, सबसे पहला शब्द 'प्याज' ही बोला था। यही वजह है कि मेरा प्याज के प्रति इश्क कम नहीं बल्कि निरंतर 'जवान' ही होता गया। कहा जा सकता है कि मैं और प्याज एक-दूसरे के 'पूरक' बन चुके हैं।

प्याज के प्रति मेरे इश्क का यह आलम है कि मैं खाना बिना प्याज के खा ही नहीं सकता। एक बार को रोटी-दाल-चावल-सब्जी खाना छोड़ सकता हूं किंतु प्याज खाना नहीं। मेरी जीभ को जब तलक प्याज का 'स्वाद' न लगे 'तृप्त' होती ही नहीं। प्याज खाने में जो 'आनंद' है, उसे शब्दों में बयां करना मेरे तईं जरा मुश्किल काम है। प्याज पर मैं जान छिड़कता हूं।

मेरी सेहत पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि प्याज 80 रुपए किलो बिके या 800 रुपए किलो। मुझे तो मतलब केवल प्याज खाने से है। प्याज मेरी आत्मा, मेरे दिल में बसती है।

प्याज को लेकर इधर तमाम तरह की खबरें पढ़ने-सुनने को मिल रही हैं। लोग बाग प्याज के 80 पार जाने से बड़े परेशान व स्तब्ध हैं। कह रहे हैं- प्याज का 80 रुपए किलो बिकना सरकार, लोकतंत्र व रसोई के लिए 'खतरे की घंटी' है। सरकार से अपील कर रहे हैं कि जल्द से जल्द प्याज की कीमतों पर काबू पाए।

मेरा उन लोगों से बस इत्ता पूछना है कि प्याज 80 रुपए किलो क्यों नहीं बिक सकती? जब दालें और सब्जियां महंगी बिक सकती हैं तो प्याज क्यों नहीं? प्याज के महंगे बिकने पर ही पाबंदी क्यों लगनी चाहिए? आखिर प्याज ने किसी का क्या बिगाड़ा है? सिंपल-सी बात है, अगर आपका दिल ठुकता है तो प्याज खाइए। अगर नहीं ठुकता तो न खाइए। कोई प्याज चलकर आपसे कहने तो नहीं आ रही कि आप मुझे जरूर-जरूर खाएं।

मैंने अक्सर देखा है, जब भी प्याज के दाम थोड़े से बढ़ते हैं लोगों के पेट में बेइंतहा दर्द शुरू हो जाता है। एंवई प्याज को गरियाने लग जाते हैं। कुछ तो इत्ते 'क्रांतिकारी' हो जाते हैं कि बकायदा फेसबुक पर यह घोषण कर देते हैं कि वे महंगी प्याज नहीं खाएंगे। या प्याज के महंगा होने पर खुश हैं। अब उनसे मैं क्या कहूं! यह तो वही वाली बात हो जाती है कि बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद।

प्याज से- मेरी तरह- इश्क करो तो जानो प्याज किसे कहते हैं। यह प्याज ही है, जिसमें बंदे को रूलाने की कुव्वत होती है। वरना, कोई और फल या सब्जी आदमी को रूलाके तो दिखा दे। इसीलिए ज्यादातर लोग प्याज से सीधे-सीधे पंगा नहीं लेना चाहते। क्योंकि उन्हें मालूम है न प्याज का स्वभाव।

मुझे तो प्याज की खातिर रोने में भी मजा आता है। सच बताऊं, मैने जित्ते आंसू पूर्व प्रेमिकाओं के वियोग में नहीं बहाए, उससे कहीं ज्यादा तो प्याज के इश्क में बहा चुका हूं। प्याज के इश्क में आंसू बहाना मुझे अच्छा लगता है। जब-जब प्याज महंगी होती है तो मेरे दिल को बड़ा 'सुकून' मिलता। तब ही तो पता चलता है कि प्याज से 'असली इश्क' करने वाले कित्ते हैं और 'नकली' कित्ते।

जिन्हें प्याज के महंगा होने पर एतराज है, उनकी वे जाने। मगर मुझे कतई नहीं है। मुझे तो प्याज हर रूप-रंग-कीमत में 'सुंदर' ही लगती है। प्याज के प्रति मेरे इश्क का रंग गाढ़ा ही हुआ है। लव यू प्याज।

3 टिप्‍पणियां:

vandana A dubey ने कहा…

प्याज के प्रति आपका प्यार देख के मेरी तो आँखें भीग गईं ;)

vandana A dubey ने कहा…

प्याज के प्रति आपका प्यार देख के मेरी तो आँखें भीग गईं ;)

Udan Tashtari ने कहा…

Aah!!! Bepanah mohabbat!!:)