मंगलवार, 25 अगस्त 2015

तोते का गाली-प्रेम

जी न इसमें कतई दोष उस बिचारे तोते (हरियल) का नहीं, जो उस बुर्जुग महिला को गंदी-गंदी गालियां दिया करता था। दोषी तो दरअसल उस इंसान का है, जिसके सिखाए में आकर तोता भी गालियां देना सीख गया। यों भी, तोते के बारे प्रचलित है कि उसे जैसा बोलना सिखाओ, वो वैसा ही बोलने लगता है। तोते की 'रटन-शक्ति' बहुत तेजी होती है। इसीलिए तो रटनतूओं को रटनतू-तोता कहा जाता है।

तोते का गालियां देना अपने आप में 'रोमांच' का विषय है। मैं तो इस बात को सोच-सोचकर ही खासा रोमांचित हुआ जाता हूं कि तोता गंदी गालियां (जाहिर, उनमें कुछ मां-बहन-साला-साली की भी रही होंगी) देता किस तरह से होगा। गालियां देते वक्त उसकी आवाज (टोन) किस तरह की रही होगी। गौरतलब यह भी है कि तोता केवल उस बुर्जुग महिला को देखकर ही गालियां दिया करता था। किसी और को नहीं। हालांकि महिला ने पुलिस को बताया भी था कि उसके बेटे के सिखाने पर ही वो उसे गालियां दिया करता था। जो भी हो, तोते का गालियां देना एक बार को मन में रोमांच तो भर ही देता है न।

यह तो चलो तोता रहा जिसकी गाली देनी की आदत के बारे में पता चल गया हो सकता है कुछ और भी ऐसे पशु-पक्षी हों, जो शायद उस तोते की ही तरह गालियां देते हों। अभी जिनके बारे में हमें पता न चल पाया हो। क्या पता, मन ही मन इंसानों को भी गलियाते हों। क्योंकि पशु-पक्षियों का इंसान के बीच दिन-रात का रहना-उठना होता है। इंसान की हर प्रकार की आदतें उन्हें मालूम रहती हैं। जब जानवर इंसानों की और बातों को कॉपी कर सकते हैं तो फिर गालियों पर भी हाथ आजमा ही लेते होंगे। यह निश्चित ही खोज का विषय है।

वैसे इंसान की फितरत का भी जवाब नहीं। उसने तोते को कुछ और नहीं, सीधा गाली देना ही सिखाया-बताया। गालियों के सहारे ही वो अपने मन की भड़ास उस महिला पर निकाल लेना चाहता था। महिला ने बताया भी कि वो तोते से गालियां खा-खाकर मानसिक तौर काफी प्रताड़ित हुई है। जब उस तोते को पुलिस थाने में लाया गया, तब गाली का एक शब्द उसके मुंह से नहीं निकला। यानी, तोता भी आम आदमी और पुलिस के बीच अंतर को समझता है। वाकई बड़ा ही कमाल का तोता है ये तो।

सच बताऊं, अब तो मुझे भी अपने तोते से डर-सा लगने लगा है। कहीं एक दिन वो भी उस कथित तोते की राह पर न चल दे। उसके सामने भी तमाम तरह की बातें (गालियों से लेकर बुराई-भलाई तक) मैं कर लिया करता हूं। अक्सर ध्यान से उन्हें वो सुनता भी है। मगर, शुक्र है कि आज तलक उसने गाली कभी किसी को नहीं दी। पर पक्षी या जानवर के 'मूड' का क्या भरोसा। जब नाम ले सकता है तो गाली भी दे ही सकता है।

कथित तोते ने इंसान के खिलाफ गालियों का मोर्चा खोलकर यह बतला दिया है कि उससे 'पंगा' लेने का नहीं। ज्यादा पंगा लिया तो वो उसे उसी की जुबान में जवाब देने की ताकत रखता है। तोते ने अपनी पारंपरिक छवि को बदल डाला है। अब न उसे ज्योतिषी महाराज के कहे पर चलना है, न सीबीआइ के रूप में उपमा पानी है। अब वो बिंदास गाली बक सकता है।

इसीलिए तो कह रहा हूं, दोषी तोता (हरियल) नहीं, दोषी इंसान है। कार्यवाही इंसान के खिलाफ होनी चाहिए। बोलते वक्त तोते को क्या मालूम कि वो गाली दे रहा है या राम-राम कह रहा है।

1 टिप्पणी:

Nirmal Gupta ने कहा…

बहुत बढ़िया .