बुधवार, 19 अगस्त 2015

शर्मीले लोगों का पोर्न प्रेम

समाज में दो प्रकार के लोग पाए जाते हैं। एक वो, जो शर्माते नहीं। दूसरे वो, जो शर्माते हैं। जो शर्माते नहीं, वो अपनी बात या इच्छा 'बिंदास' होकर सामने रखते हैं। जो शर्माते हैं, वो बिंदास तो नहीं होते हां 'मनघुन्ने' जरूर होते हैं। शर्माने-शर्माने की आड़ में वो वो सबकुछ करते रहते हैं, जिसका न शर्माने वाले अक्सर विरोध करते रहे हैं। शर्माने वाले ऊपर से बहुत सीधे-सच्चे दिखते हैं पर भीतर से बेहद रसिया टाइप के होते हैं। न न हंसिए मत, एकदम सही कह रहा हूं।

अब यही देख लीजिए न, बिंदास टाइप के लोग पोर्न साइट्स पर बैन का विरोध भी कर रहे हैं और समर्थन भी। लेकिन शर्माने वाले एकदम 'चुप' हैं। इस बाबत न वे सरकार से कुछ कह रहे हैं, न फेसबुक पर कुछ फरमा रहे हैं। उन्होंने अपनी छवि शर्मीले टाइप की गढ़ ली है। अच्छा, सामने वाला भी जानता-समझता कि मियां शर्मीले हैं। ऐसे मुद्दों पर कुछ नहीं बोलते- चुप ही रहते हैं। पोर्न टाइप विषय उनके तईं 'अश्लीलता' समान है।

मगर एक अंदर की बात बताऊं, सबसे ज्यादा पोर्न शर्मीले टाइप लोग ही देखते हैं। शर्मिलापन तो उनका कथित आवरण है, दुनिया-समाज को बरगलाने का। पर भीतर से लड्डू पोर्न के लिए ही फूटते हैं।

दिन में कभी शर्मीले लोगों से पोर्न के विषय में बात करके देखिए, कमस से, ऐसा शर्माएंगे, ऐसा शर्माएंगे कि एक बार को लगेगा, कहीं धरती में न गढ़ जाएं। लेकिन रात होते ही, उनका कथित शर्मीलापन हवा हो लेता और पोर्न के प्रति एकदम बिंदास हो जाते हैं। पोर्न साइट्स-सीडीज का जो 'कलेक्शन' आपके-हमारे पास न होगा, उन कथित शर्मीले लोगों के पास होगा। ऐसा कि जिसे देखकर आप दांतों तले अंगुलियां चबा लेंगे।

आजकल तो आलम यह है कि हर बंदा पोर्न साइट्स पर बैन को लेकर 'बहस' करने में लगा हुआ है। चाहे सोशल मीडिया हो या समाज बहस छिड़ी हुई है, पोर्न साइट्स पर बैन हो तो क्यों हो और न हो तो क्यों न हो। सबके अपने-अपने तर्क हैं। जो अत्यंत बिंदास हैं, वो इस मुद्दे पर आपस में ही बंटे हुए नजर आते हैं। और, जो कथित शर्मिले हैं, उन्हें इस बहस से कोई लेना-देना नहीं, वे अपने में ही मस्त हैं। उनके तईं पोर्न 'आत्म-संतुष्टि' का विषय है। इसे वे अपने तलक ही 'महदूद' रखना पसंद करते हैं।

यह मुद्दा सबसे अधिक 'दिलचस्प' सोशल मीडिया (फेसबुक-टि्वटर) पर बना हुआ है। फेसबुक पर हर दूसरी पोस्ट और टि्वटर पर हर दूसरा ट्वीट पोर्न के बैन होने न होने पर ही केंद्रित होता है। चलो, पोर्न के बहाने ही सही, कम से कम समाज इस बारे में आपस में 'खुलकर' बात तो कर रहा है। वरना, तो पोर्न का नाम लेते ही हम 'हटो-बचो' की स्थिति में आ जाया करते थे।

वैसे आप मानो चाहे न मानो पोर्न को समाज के बीच 'बहसतलब' बनाया सनी लियोनी ने ही है। जब से उसने हिंदुस्तान की धरती पर कदम रखा है, पोर्न पर चर्चा हमारा 'ध्येय' सा बन गई है। साथ-साथ, समाज भी थोड़ा 'बोल्ड' हुआ है। इंटरनेट पर सबसे अधिक खोजी जाने वाली स्टार-मॉडल-एक्सट्रेस सनी लियोनी ही है। अब तो यह खबरें भी आने लगी हैं कि भारतीय महिलाएं पोर्न देखने में पुरुषों से कहीं ज्यादा आगे निकल गई हैं। हा हा हा हा वाकई हमारा समाज 'बोल्डनेस' के मामले में 'तरक्की' कर रहा है। जियो।

हां, कथित शर्मीले लोगों की पौ बारह है। उन्हें कोई मतलब नहीं पोर्न साइट्स पर बैन लगे, चाहे न लगे उन्हें तो देखने से मतलब। समाज की निगाह में वे 'शर्मीले' हैं मगर अंदर से कित्ते 'रसिया' टाइप हैं, ये उनसे बेहतर कोई नहीं जानता पियारे। कोई नहीं, लगे रहो शर्मीले लोगों, असली 'मजे' तुम्हारे ही हैं। जय हो।

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