सोमवार, 6 जुलाई 2015

डिजिटल होने की राह पर

प्रधानमंत्रीजी ने जब से 'डिजिटल इंडिया' की नींव रखी है, मेरे मोहल्ले में 'जश्न' का सा माहौल है। हर चेहरा डिजिटली खिला-खिला दिख रहा है। डिजिटल इंडिया को ध्यान में रखते हुए, मोहल्ले वाले लंबी-लंबी प्लानिंग बनाने में जुट गए हैं। प्लानिंग क्या है, छोड़ा-छाड़ी ही अधिक है।

मोहल्ले के लौंडों को 'डिजिटल इंडिया' में 'डिजिटल' ही अधिक आकर्षित कर रहा है। उनके तईं डिजिटल का मतलब है, केवल स्मार्टफोन और इंटरनेट...। स्मार्टफोन से उनका सरोकार केवल फेसबुक-टि्वटर-वाट्सएप से ही जुड़ा है। डिजिटल के बहाने स्मार्टफोन से और भी कई खास काम हो सकते हैं, इससे उन्हें ज्यादा कुछ लेना-देना नहीं। अब तलक वे स्मार्टफोन पर 'सादा इश्क' फरमा रहे थे, अब से 'डिजिटल इश्क' फरमाएंगे। डिजिटल टाइप ही उनकी प्रेमिकाएं होंगी। डिजिटल फॉरमेट में उनके बीच वायदे व लड़ाई-झगड़े होंगे। रिस्क लेकर एक-दूसरे से मिलने का झंझट भी कम होगा। अपने-अपने स्मार्टफोन पर एक-दूसरे से डिजिटली मिल लिया करेंगे।

वक्त के साथ-साथ इश्क में जहां इत्ती तब्दीलियां आई हैं, यह डिजिटल तब्दीली और सही।

मोहल्ले के राममूर्ति चचा अब डिजिटल तकनीक से ही अपनी डेयरी को चलाएंगे। डिजिटल विधि से अपनी गाय-भैंसों की देख-भाल व सानी किया करेंगे। डिजिटल तकनीक से ही उनका दूध निकालेंगे। यह भी खूब रहेगा कि हम मोहल्ले वाले पहली बार डिजिटल दूध पिएंगे। सोचिए जरा उन गाय-भैंसों के बारे में राममूर्ति चचा के यहां कित्ती डिजिटली खुश रहेंगी।

सुनने में यह भी आया है कि मोहल्ले के कुछ पति-पत्नी एक-दूसरे के साथ अब केवल 'डिजिटल रिलेशनशीप' में ही रहेंगे। डिजिटली एक-दूसरे से बातें करेंगे। डिजिटली एक-दूसरे का ख्याल रखेंगे। डिजटली एक-दूसरे के लिए शॉपिंग करेंगे। खाना भी डिजिटल फॉरमेट में ही खाएंगे-बनाएंगे। और, लड़े-झगड़ेंगे भी डिजिटली ही। यहां तक कि तलाक भी डिजिटली ही होगा। डिजिटल रिलेशनशीप हर प्रकार के सामाजिक व पारिवारिक बंधनों से मुक्त रहेगी।

जब सब डिजिटल हो रहे हैं तो मोहल्ले के भिखारी भला कैसे पीछे रह सकते हैं। मीटिंग कर मोहल्ले के भिखारियों ने तय किया है कि अब से वे सिर्फ 'डिजिटल भीख' ही लिया करेंगे। हिस्सा भी उनके बीच डिजिटल फॉरमेट ही बंटेगा। घर-घर, गली-गली, मोहल्ले-मोहल्ले जाकर भीख मांगने से उन्हें मुक्ति मिलेगी। भिखारियों ने भीख की फीस भी बढ़ा दी है। सौ-पचास नहीं सीधे पांच सौ रुपए। उनका कहना है, जब डिजिटल इंडिया में रहना है, तो भीख का स्टैंडर्ड खराब नहीं करेंगे। जिन्हें देना हो दे नहीं तो कट ले।

देख रहा हूं, मोहल्ले में हर किसी के बीच डिजिटल होने की होड़ ठीक वैसे ही मची है, जैसे पिछले दिनों गैस-सब्सिडी लेने की मची हुई थी।
मोहल्ले में बस एक मैं ही अभी डिजिटल नहीं हुआ हूं। जबकि बीवी हाथ धोकर मेरे पीछे पड़ी रहती है कि मैं किसी तरह डिजिटल हो जाऊं। यहां तक कि उसने धमकी भी दे डाली है अगर मैं डिजिटल नहीं हुआ तो मुझे तलाक भी दे सकती है। मगर इस डिजिटलगिरी को जिस नजरिए से मैं देख रहा हूं शायद बीवी न देख-समझ पाए। इसीलिए मैं अभी डिजिटल नहीं हो रहा हूं।

सोच के साथ शौचालय अभी ढंग से 'डेवलप' हुए नहीं हैं और हम लगे हुए हैं 'डिजिटल इंडिया' होने में। वाह...!

1 टिप्पणी:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

लगे रहिये । शुभकामनाऐं ।