शुक्रवार, 5 जून 2015

स्मार्टफोन और सेल्फी

मार्केट में किस्म-किस्म के 'स्मार्टफोन' अपना रंग जमाए हुए हैं। जो कहीं नहीं मिलता, अब स्मार्टफोन में मिलता है। स्मार्टफोन हमारे 'पर्सल स्टेटस' से कहीं ज्यादा हमारी 'सेल्फी' का 'स्टेटस सिंबल' है। जिसके कने जित्ता महंगा (बड़ा) स्मार्टफोन, उसकी उत्ती ही 'ग्लैमरस सेल्फी'। यू नो, स्मार्टफोन ने सेल्फी की 'भाषा-परिभाषा' को ही बदल कर रख दिया है। स्मार्टफोन होते हुए भी जिसने, खुद की सेल्फी न ली, मतलब कुछ न लिया।

ज्यादा दूर क्यों जाऊं, मेरे मोहल्ले में जित्ते घर हैं, उससे कहीं ज्यादा स्मार्टफोन हैं। हर बंदे-बंदी कने एक नहीं दो-दो स्मार्टफोन हैं। और, एक से बढ़कर एक सिल्की, सेक्सी और ग्लैमरस लुक वाले। उन स्मार्टफोनों पर मुंह से बात कम, की-पैड से चैट ज्यादा होती है। जिसे देखो दिन-रात लगा रहता है, या तो की-पैड चटकाने में या फिर सेल्फियां लेने में। साथ-साथ, वाह्टसएप-फेसबुक-टि्वटर पर भी समां बांधे रहता है, सो अलग। क्या खाया, क्या पिया, क्या फैलाया, क्या उलटाया, क्या बनाया, क्या सजाया, क्या बिछाया, क्या डुबोया सबकुछ फेसबुक और वाह्टसएप पर हर मिनट शेयर होता रहता है। लेकिन सबसे अधिक शेयर होने वाला आइट 'सेल्फी' ही है पियारे।

स्मार्टफोन और सेल्फी की जुगलबंदी कभी-कभी मुझे 'चोली-दामन' जैसी लगती है। यानी, दोनों एक-दूजे बिन अधूरे। अच्छा ही है न, कम से कम इस बहाने किसी को अपने चेहरे की रंगत को लेकर 'इफियरिटी कॉमपलेक्स' तो नहीं रहता। स्मार्टफोन में हर किसी को अपनी 'सेल्फी' 'सेक्सी' ही नजर आती है। मार्केट का भी जोर अब 'सेल्फी बेस्ड स्मार्टफोन' पर ही अधिक है।

आपसे क्या छिपाना, मुझे भी मेरा चेहरा सेल्फी लेते-लेते अब सेक्सी-सा लगने लगा है। कोई दूसरा कहता तो एक बार को झूठ मान लेता लेकिन जाने कित्ती ही दफा मुझे ऐसा मेरी वाइफ ने बोला है! यू नो, मेरी वाइफ मेरे बारे में कभी 'झूठ' नहीं बोलती!

बीत लिए वो जमाने जब कैमरे घर-घर की शान हुआ करते थे। अब स्मार्टफोन से ली सेल्फी ही बंदे-बंदी की 'शान' है।

2 टिप्‍पणियां:

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…


ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, आज विश्व पर्यावरण दिवस है - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

हिमकर श्याम ने कहा…

सुंदर व्यंग्य रचना