मंगलवार, 12 मई 2015

सलमान और किस्मत

मानना पड़ेगा- सलमान भाई की किस्मत चाचा चौधरी के दिमाग से भी ज्यादा तेज चल रही है। तेरहा साल बाद फैसले का आना। सजा सुनाया जाना। तुरंत ही बेल मिल जाना। फिर सजा पर भी रोक लग जाना। वाह! क्या अद्भूत किस्मत पाई है भाई ने। काश! ऐसी ही किस्मत ऊपर वाला हम सबको दे।

लेकिन ऊपर वाला भी बड़ा 'चालू' है। देख सब रहा है। मालूम हर सच है। मगर फिर भी रहता चुप है। न कोई 'रिएक्शन' देता है, न 'एक्शन' लेता है। सारा का सारा जिम्मा उसने नीचे वालों के कंधों पर डाल दिया है। बेट्टा जो मन में आए करो। हिसाब-किताब बाद में- ऊपर आने पर- ले लिया जाएगा।

मैं भी कित्ता मूर्ख हूं खामखा गरीबों की चिंता करता रहता हूं। हर वक्त चाहता हूं कि गरीब को न्याय मिले। खुशी-समृद्धि मिले। उसका विकास हो। लेकिन गरीब की हैसियत इत्ते सारे अमीरों-सेलिब्रिटियों के बीच- बकौल अभिजीत कुत्ते समान ही है। दिन-रात अमीरों की जी-हुजूरी करते रहो। जब मरो तो बे-मौत कि रोने या पूछने वाला ही कोई पास न हो।

अरे तो क्या हुआ जो सलमान भाई की गाड़ी कुछ गरीबों के ऊपर चढ़ी गई। जिनमें से एक खर्च हो लिया, दो-चार के चोट-फेट आईं। आखिर वो गरीब ही तो थे। कौन से अमीर या किसी वर्ल्ड फेम सेलिब्रिटी की औलाद थे। मरे गए। इस बहाने धरती का कुछ बोझ तो कम हुआ। यों भी गरीबों ने धरती पर बहुत बोझ बढ़ाया हुआ है। फुटपाथ को अपने बाप की जमीन समझकर सोते हैं। जब किसी नेक-ईमानदार सेलिब्रिटी की गाड़ी चढ़ जाती है। तो फिर रोते फिरते हैं- हमें इंसाफ दिलाओ। हमें पैसा दिलाओ। क्या सलमान भाई जैसे लोग इसी काम के लिए बने हैं। उनके कने अपने इत्ते बड़े-बड़े और खास काम हैं। वो तो पेच फंस गया जो उन्हें कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़े वरना...।

अब तो मुझे रोड पर चलते हुए भी डर-सा लगने लगा है। क्या पता कोई कार वाला, गैर-इरादतन ही सही, मुझे निपटा जाए। बादे में कह दे, जी, गाड़ी मैं नहीं मेरा ड्राइवर चला रहा था। थोड़े-बहुत दिन केस चलेगा फिर वही सलमान भाई वाले ट्रेक पर आ जाएगा। इसीलिए पियारे अपनी जिंदगी अपने हाथ। सड़क से लेकर परिवार तक में जित्ता बच सकते हो बचो। वरना फिर ऊपर वाला भी नहीं बचा पाएगा।

कह लीजिए जिसको जो कहना है सलमान भाई की सजा, जेल और बेल के खिलाफ। सलमान भाई की सेहत पर क्या फरक पड़ना है। वो कल भी मजे में थे, आज भी मजे में हैं और आगे भी मजे में ही रहेंगे।

गरीब तो कुत्ता है मरने दो साले को...। क्यों अभिजीत बाबू सही है न।

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