रविवार, 26 अप्रैल 2015

खुदकुशी पर राजनीति

कहा जा रहा है कि नेता लोग 'खुदकुशी' पर 'राजनीति' कर रहे हैं। अजीब बात है, राजनीति नेता नहीं करेगा तो क्या मंदिर का पुजारी करेगा? नेता को- हर बात, हर मुद्दे पर- राजनीति करने का पूरा 'हक' है। नेता जब तलक राजनीति नहीं कर लेता, न उसका सुबह का न रात का खाना हजम नहीं होता। चुनाव में जाने और वोट पाने के लिए राजनीति करना बेहद जरूर है। वरना, लोग नेता को भूल जाएंगे और राजनीति को भी।

क्या हुआ जो नेता लोग खुदकुशी पर राजनीति कर रहे हैं? कुछ गलत तो नहीं कर रहे! जित्ती हो सकती है, उत्ती ही कर रहे हैं। नेता अगर खुदकुशी पर राजनीति नहीं कर रहे होते न तो यह मामला इत्ता उछलता भी नहीं। वहीं का वहीं दब-दबा कर रह जाता।

फिर यह भी तो समझने की कोशिश कीजिए कि नेता लोग खुदकुशी पर राजनीति अपनी-अपनी राजनीति चमकाने के लिए नहीं बल्कि 'जनहित' की खातिर रहे हैं। किसी पर विषय या मुद्दे पर नेताओं द्वारा राजनीति जनता की भलाई के वास्ते ही की जाती है। नेता अगर जनता का ध्यान नहीं रखेंगे तो क्या मोहल्ले का चौकरीदार रखेगा।

एक तो किसान होकर उसने खुदकुशी कर ली और चाह रहे हैं कि नेता लोग राजनीति भी न करें! अरे, यह तो 'गोल्डन चांस' है उनके लिए। इस मुद्दे पर तो सौ फीसद राजनीति बनती है। किसान की खुदकुशी पर तो खासकर। देश का किसान जित्ती अधिक आत्महत्याएं करेगा, नेता लोग उत्ती ही राजनीति करेंगे। आखिर नेता को देश के किसान की चिंता है। हर पल वे उसकी बेहतरी के लिए ही सोचते हैं।

खुदकुशी के मामले में जिनको नेताओं की भूमिका संदिग्ध लग रही है, वे जाकर अपनी भैंस चराएं। नेता लोग एकदम सही रास्ते पर हैं। इस राजनीति का फायदा उन्हें आगे आने वाले चुनावों में अच्छे से मिलेगा। यों भी, वोट में सबसे अधिक प्रतिशत तो गरीबों-किसानों का ही होता है।

नेताओं को अगर देश के किसानों की चिंता न होती तो अपने सारे जरूर कामकाज छोड़-छाड़कर संसद में किसानों की आत्महत्या के मुद्दे पर बहस नहीं कर रहे होते। किसान आजकल नेताओं के लिए सबसे हॉट 'टर्निंग पांइट' है। आजकल तो हर दूसरा नेता यह कहता हुआ मिल जाता है कि मेरा संबंध भी खेती-किसानी से रहा है। मैं खुद किसान परिवार से हूं। गर्व है मुझे मेरे देश के नेताओं पर।

खुदकुशी करके जिसे जाना था वो तो खैर चला गया। बहुत से बहुत उसकी मौत पर 'शोक' जताया जा सकता है। लेकिन इस बहाने हमारे नेताओं को एक 'लॉलीपॉप' जरूर मिल गई है, चौबीस घंटे चूसने के लिए। जय हो नेताओं की। जय हो राजनीति की।

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