सोमवार, 20 अप्रैल 2015

बधाई हो, वो लौट आए हैं

आखिर वो आ ही गए। इत्ते दिनों से न केवल मुझे बल्कि देश को भी उनके लौटकर आने का इंतजार था। उनके इंतजार में मेरी तो आंखें ही 'पथरा' गईं थीं। लेकिन अब 'सुकून' है। अब मुझे हर रोज न अपनी गली, न अपने मोहल्ले, न अपने शहर के मुख्य चौराहों, न टीवी चैनलों पर उनकी खोज-खबर नहीं लेनी पड़ेगी। क्या बताऊं, इन दो महीनों उनके इंतजार में मैं कित्ता 'बेकरार' रहा हूं। मैंने तो उनकी 'गुमशुदगी' की रपट तक अपने इलाके के थाने में लिखवा दी थी। चूंकि अब वे घर लौट गए हैं सो अपनी वो रपट मैंने वापस ले ली है।

देख रहा हूं, उनके वापस आते ही पार्टी के कार्यकर्ताओं के चेहरों पर 'रौनक' लौट आई है। वे पहले से ज्यादा खुश और खुद को स्वतंत्र महसूस कर रहे हैं। नहीं तो इन महीनों में उन्हें किसी को जवाब देते नहीं बन पा रहा था कि उनके नेता कहां हैं? जित्ते मुंह थे, उत्ती बातें थीं। लोग बाग भी अपने-अपने हिसाब से जाने क्या-क्या अनुमान लगाए पड़े थे। हालांकि यह रहस्य अभी भी बरकरार है कि वे विदेश में थे या अपने देश में। पार्टी के भीतर कोई भी ठीक-ठाक बोलने को तैयार नहीं है।

फिर भी उन्हीं की पार्टी के सज्जन बता रहे थे कि वे मौज-मस्ती के लिए नहीं बल्कि पार्टी का रोड-मैप तैयार करने के वास्ते दो महीने की 'खास छुट्टी' पर गए थे। वाह! क्या बात है। पार्टी का रोड-मैप अब देश में नहीं विदेश जाकर तैयार होने लगा है। ज्यादा मुझे जानकारी नहीं, हो सकता है, विपश्यना से रोड-मैप ही तैयार होता हो! अगर वाकई ऐसा ही है तो एक दफा मैं भी विदेश जाकर विपश्यना करके अपने लेखन का रोड-मैप तैयार करना चाहता हूं। यों मेरे लेखन में कुछ भी ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। जो लेख जहां भेजो वहीं 'डंप' हो लेता है।

चलिए खैर तमाम तरह की बातों से इतर खुशी और राहत की बात यह है कि वे लौटकर आ चुके हैं। उनके लौटकर आने की खुशी में पार्टी वालों ने पटाखे-सटाखे भी खूब चलाए। पटाखे चलाना इसलिए भी बनता था क्योंकि पिछले चुनावों में उन बिचारों को यह मौका ही नहीं मिल पाया था। सारे के सारे पटाखे एक कोने में 'बेसहारा' से पड़े थे। इस बहाने ही सही पर पार्टी के भीतर कुछ तो 'आत्मविश्वास' आया। नहीं तो अब तलक न घर के रहे थे न घाट के।

फिलहाल, यह 'जश्न' मनाने का समय है। आप भी जश्न मनाइए और मुझे भी मनाने दीजिए। हां, उनसे इत्ती गुजारिश जरूर करना चाहूंगा कि अब अगर आगे से कहीं भी जाएं तो कम से कम हमें बताकर जरूर जाएं। ताकि हम रातों को चैन से सो लें और विपक्ष को जवाब दे सकें।

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