गुरुवार, 2 अप्रैल 2015

माई च्वाइस

दीपिका पादुकोण ने 'माई च्वाइस' के बहाने अपनी इच्छाएं क्या जाहिर कीं कि टि्वटर और फेसबुक पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगीं और चुटकुले बनने लगे। ऐसा ही कुछ तब भी हुआ था, जब दीपिका ने अपने शरीर के बहाने- मेरे पास ये है, वो है- टाइप कुछ कहा था।

लेकिन भाई लोग भला कहां मानने वाले हैं? उन्हें तो फिलहाल दीपिका की माई च्वाइस गाली जैसी लग रही है। दीपिका की माई च्वाइस पर तरह-तरह की बातें बना रहे हैं। गुस्सा जतला रहे हैं। आलोचना कर रहे हैं। तमाम प्रकार की नैतिकताओं का हवाला दे रहे हैं। वो सब ठीक है मगर दीपिका की च्वाइस दीपिका की है। उससे हमें या आपको क्या लेना-देना? अमां, हम एक लोकतांत्रिक मुल्क में रहे हैं। ऐसे में एक बंदे या बंदी को अपनी बात या च्वाइस जाहिर करने का हक तो बनता है।

और फिर दीपिका ने माई च्वाइस में अपनी च्वाइस ही तो बताई है, यह थोड़े न बोला है कि लड़कियों को यह सब करना ही चाहिए। या फिर मैं यह सब करने जा रही हूं। बात कहने और करने में बहुत फर्क होता है। इसीलिए तो इसे कथनी-करनी का अंतर कहा जाता है।

वक्त के साथ जब तकनीक बदली है तो क्या इंसान की च्वाइस न बदलेगी। हम 21वीं सदी के दौर में हैं। 16वीं सदी का जमाना हवा हुआ। बदलते वक्त के साथ कुछ तो आजाद-ख्याली लड़कियों में आएगी ही। बल्कि आनी चाहिए। लड़कियां कब तलक एक ही दायरे में सिमटी और एक जैसी परंपराओं को निभाती रहेंगी।

आज दीपिका ने अपनी च्वाइस जाहिए की है, कल को कोई और लड़की करेगी। च्वाइस तो च्वाइस है कभी भी, कैसे भी व्यक्त की जा सकती है। च्वाइस के हिसाब से ही आदमी अपना माइंडसेट बनाता है। हम सब अपनी-अपनी मर्जी के मालिक हैं। आपकी जो मर्जी हो वो आप करें, दीपिका की जो मर्जी है, उसे करने दें। फिर खाली-पीली पेट का हाजमा क्यों खराब करना पियारे।

अपने दिमाग को थोड़ा दिमागदार बनाओ। दुनिया चांद और मंगल पर पहुंच ली है और हम हैं कि एक व्यक्ति की च्वाइस पर ही अकड़े-भड़के जा रहे हैं। हद है। जमाना 'बोल्डनेस' का है। बोल्ड बंदा या बंदी ही सामने वाले को अपनी बोल्डनेस से क्लीन-बोल्ड कर सकते हैं। लजाने और शर्माने के दिन गुजर लिए।

यों दीपिका की माई च्वाइस पर मुझे रत्तीभर एतराज नहीं बस पूछना इत्ता भर है, यह च्वाइसनुमा बोल्डनेस तब कहां चली जाती है, जब महिलाओं को सरेराह छेड़ा और मार दिया जाता है? उनसे उनके अधिकार छिनकर अपने पास गिरवी रख लिए जाते हैं? बताओ दीपिका है तुम्हारे पास कोई जवाब। 

1 टिप्पणी:

अनूप शुक्ला ने कहा…

दीपिका कभी चिट्ठा पढ़ेंगी तब बतायेंगी।