बुधवार, 1 अप्रैल 2015

66 A खत्म होने के बाद

इत्ता खुश मैंने अपने मोहल्ले के लौंडो को पहले कभी नहीं देखा था, जित्ता कि आज थे। हंस-हंसकर एक-दूसरे को बधाईयां दे रहे थे। उनके सीने 56 इंच से थोड़ा चौड़े और चेहरे पर आत्मविश्वास का अक्स था। हालांकि रहते तो वे पहले भी फेसबुक और टि्वटर पर थे मगर अब सक्रियता में कुछ और इजाफा हुआ है।

पूछने पर पता चला कि मेरे मोहल्ले के लौंडे धारा 66 A को खत्म किए जाने पर इत्ता खुश हैं। हालांकि ये खुशी की बात केवल उन्हीं के लिए नहीं बल्कि हम सबके लिए है। मगर लौंडो के लिए कुछ ज्यादा ही। क्योंकि इस धारा के सबसे ज्यादा शिकार वे ही हुए हैं अब तलक। मामला चाहे कैसा या किसी से भी जुड़ा रहा हो।

66 A हट जाने से सोशल मीडिया पर खुलकर लिखना अब और आसान हो गया है। अब व्यक्तिगत भावना से आहत हुआ बंदा, ज्यादा उछलकूद नहीं कर सकेगा। अभिव्यक्ति स्वतंत्र रहेगी- चाहे फेसबुक हो या टि्वटर। लेकिन पियारे, क्या यह वाकई इत्ता आसान होगा? हमारे यहां की पुलिस का रंग-ढंग तो हर किसी को मालूम ही है। डंडे के आगे भला कौन सा कानून रहा या खत्म हुआ है। कानून खत्म होने के बाद भी खुदा-न-खास्ता अगर फिर कहीं से ऐसा कोई मामला सामने आ जाए तो ज्यादा आश्चर्य न कीजिएगा। क्योंकि अब हम जिस प्रकार के समाज बन रहे हैं, वहां असहमति और आलोचना की दीवारें बहुत तेजी से 'दरक' रही हैं। फिर चाहे 66 A रहे या खत्म हो कुछ खास फर्क नहीं पड़ता।

हम इत्ते तो सियाने हैं कि हर दो मिनट में, चाहे सोशल मीडिया हो या सोसाइटी, किसी न किसी की भावनाएं आहत होने की खबर आ ही जाती है। बेशक धारा 66 A खत्म जरूर हुई है मगर सहनशक्ति के दायरे उत्ते ही सिकुड़ हैं। भले ही, मेरे मोहल्ले या अन्य जगहों के लौंडे अवश्य खुश हुए हों किंतु मैं अभी भी किस्म-किस्म की शंकाओं से घिरा हुआ हूं।

देखा गया है, कभी-कभी ज्यादा आजादी भी खाना खराब कर देती है। फिर यहां से लेकर वहां तलक रायता फैलते जरा देरी नहीं लगती। गैर तो छोड़िए अपने भी ऐसे कन्नी काट लेते हैं मानो पहले कोई रिश्ता-नाता रहा ही न रहा हो। बीच का रास्ता तो यही है कि सोशल मीडिया पर जो भी लिखा जाए 'अपनी बचाते' हुए ही लिखा जाए। अगर अपनी बची है तो समझिए सबकी बची हुई है।

66 A से पहले के सीन तो हम देख ही चुके हैं अब बाद का सीन कैसा बनेगा देखना यह है। क्योंकि आजादी को तो आजादी की तरह ही लिया जाता है। शायद मेरे मोहल्ले के लौंडे इसी आजादी को पाकर इत्ता खुश हुए जा रहे हैं। खुद उनकी खुशी बनाए रखे। आमीन।