शुक्रवार, 6 मार्च 2015

सेंसेक्स संग होली

सेंसेक्स से मेरा अब का नहीं बरसों पुराना नाता है। चाहे गम हो या खुशी हम हमेशा साथ-साथ रहते हैं।

मेरे मुकाबले सेंसेक्स ज्यादा 'संवेदनशील' है। बात चाहे छोटी हो या बड़ी सेंसेक्स तुरंत दिल पर ले लेता है। मगर है दिल का बेहद साफ। न मेरे, न अपने निवेशकों के प्रति दिल में 'मैल' या 'बैर' नहीं रखता। सेंसेक्स के दिमाग की 'हटती' तब है, जब उस की प्रतिष्ठा पर राजनैतिक या अंतरराष्ट्रीय किस्म का जोर पड़ता है। एक दफा अगर सेंसेक्स की हट जाए तो फिर संभालना मुश्किल पड़ जाता है। पसीने आ जाते हैं सरकार से लेकर वित्तमंत्री तक को सेंसेक्स को मनाने में।

आजकल सेंसेक्स 'बेहद प्रसन्न' है। लगभग हर रोज मुस्कुरा रहा है। सेंसेक्स को यों मुस्कुराता देख, मेरा दिल भी खुश रहता है। अपनी खुशी को दोगुना करने के लिए इस दफा मैंने होली सेंसेक्स के साथ मनाना तय किया है। तीस हजारी होकर खुशियों के जो रंग सेंसेक्स ने बिखेरे हैं, उसका 'सैलिब्रेशन' तो बनता है। सेंसेक्स ने जो कर दिखाया, इसका हमें जाने कब से इंतजार था।

सेंसेक्स के साथ होली मनाने के अपने फायदे हैं। मेन फायदा तो यही है कि सेंसेक्स के साथ होली न 'सियासी' होती है न 'औपचारिक'। यह 'शुद्ध दोस्ताना' होली होती है। नेताओं की तरह नहीं कि राजनीतिक फायदे की खातिर आज इसके साथ होली मना ली, तो कल को उसके साथ। न ही सेंसेक्स बात-बात में ईमानदारी-सादगी की नौटंकियां किया करता है। सेंसेक्स 'शुद्ध पूंजीवाद' का समर्थक है, मेरी तरह। अपने निजी फायदे की खातिर सेंसेक्स न अंबानी पर वार करता है न अडानी पर। सेंसेक्स का सारा जोर 'कमाई' पर रहता है। सेंसेक्स बढ़ता है, तो देश की अर्थव्यवस्था के रंग मजबूत होते हैं।

संवेदी होने के साथ-साथ सेंसेक्स 'रंगीन तबीयत' भी है। मस्ती के मूड में जब होता है, तो क्या दीवाली, क्या होली झूमकर नाचता-गाता-खिलखिलाता है। अपनी मस्ती चाल से सेंसेक्स ने इस बार की होली को रंगीन बना दिया है। दलाल पथ से लेकर जनपथ तक सब के चेहरे सेंसेक्स की रंगीनियत में सराबोर हैं।

कुछ लोग हैं, जिन्हें सेंसेक्स का तीस हजारी हजारी होना अखर रहा है। सवाल कर रहे हैं कि सेंसेक्स आखिर बढ़ क्यों रहा है? सेंसेक्स पर यह कौन-सी मस्ती छाई हुई है? दरअसल, वे 'मूर्ख' हैं, जो सेंसेक्स की बढ़त से जलते हैं। उन्हें क्या पता, जो मजा सेंसेक्स की बढ़त में है, वो कद की बढ़त में भी नहीं। ऐसे लोग बेहद छोटी सोच के होते हैं। वे अपनी होली तो 'बद-रंग' करते ही है, साथ-साथ चहाते हैं कि सेंसेक्स भी होली पर मुंह लटकाए रहे। लेकिन सेंसेक्स हमारा स्मार्ट है, उसे दीवाली पर जगमगाना और होली पर रंगीन होना अच्छे से आता है।
 
एक मैं ही नहीं, सेंसेक्स के साथ होली कोई भी मना सकता है। सेंसेक्स के द्वार हमेशा सबके लिए खुले हैं। सेंसेक्स के दरबार में न कोई ऊंचा है न नीचा। सेंसेक्स सबको एक जैसा महत्त्व देता है।

फिलहाल, इस दफा होली मैं सेंसेक्स के साथ मना रहा हूं। अगर आपका भी मन है, तो बेखटक आ जाइए। आप आएंगे तो होली की मस्ती और रंगीन हो लेगी।

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