मंगलवार, 17 मार्च 2015

पत्नी और सेंसेक्स

पियारे, लाइफ में पत्नी के बाद अगर किसी दूसरे को 'इंर्पोटेंस' दी है तो वो 'सेंसेक्स' ही है। बल्कि कहना चाहिए, सेंसेक्स मेरी लाइफ में पहले आया और पत्नी बाद में। लेकिन पत्नी के लाइफ में आने के बाद से सेंसेक्स एक स्टेप नीचे खिसक गया। या कहूं, खिसकाना पड़ा। अगर नहीं खिसकाता तो एक दिन पत्नी के हाथों मेरा खिसकना तय था। क्या कीजिएगा, पत्नी के लाइफ में आने के बाद से अति-महत्त्वपूर्ण चीजें भी 'गौण' या 'दूसरे पायदान' पर खुद-ब-खुद चली ही जाती हैं।

मेरा 'इंट्रस्ट' पत्नी और सेंसेक्स दोनों को ही करीब से जानने में रहा है। लेकिन दोनों को इत्ता आसान भी नहीं करीब से जानना। क्योंकि दोनों (पत्नी और सेंसेक्स) के न मूड, न एटिट्यूड, न चाल, न ढाल, न पसंद, न नापसंद का कोई भरोसा नहीं। यह मेरा, पत्नी और सेंसेक्स के बारे में, व्यक्तिगत अनुभव रहा है कि दोनों का ही 'दिल' बेहद नाजुक होता है। कब, कौन-सी बात दिल पे लेकर 'बिदक' जाएं, कुछ नहीं पता। चलो, पत्नी के दिल को किसी न किसी 'डिमांड' या 'गिफ्ट' के सहारे 'खुश' किया भी जा सकता है किंतु सेंसेक्स का दिल अगर एक दफा बैठ गया तो फिर साक्षात वित्तमंत्री भी मैदान में आ जाएं, खुश करना कभी-कभी 'टेढ़ी खीर' हो जाता है। ऐसा न जाने कित्ती ही दफा हुआ है कि सेंसेक्स एक दफा बिदका तो फिर सबकुछ 'तबाह' करके ही कंट्रोल में आया।

प्रायः जो लोग यह 'दावा' करते हैं कि वे अपनी पत्नी और सेंसेक्स की चाल से पूरी तरफ वाकिफ हैं, दरअसल, 'सफेद झूठ' बोलते हैं। (हां, कुछ 'अपवाद' भले ही हो सकते हैं।) देखो पियारे, पत्नी और सेंसेक्स की चाल शतरंज के पियादों की चाल से भी कहीं ज्यादा अनएस्पेक्टिड और खतरनाक होती है। दोनों ही कब, कहां और किस लेवल पर मात दे दें, पता नहीं चलता। क्या भरोसा, सीधी चाल चलती पत्नी कब पति को उसी के घर में 'टंगड़ी' मार दे। या फिर सीधी चाल चलता सेंसेक्स कब नीचे की ओर लुढ़कना शुरू कर दे। इसीलिए, पति और निवेशक को पत्नी और सेंसेक्स की चाल के अनुसार ही अपनी चाल के दायरे तय करने चाहिए। क्या नहीं...।

बेशक, आज की तारीख में सेंसेक्स एकदम 'जौली मूड' में है।  30 हजार के पार निकल कर खुद की 'कामयाबी' पर 'झठला' रहा है। सरकार और अर्थव्यवस्था के साथ 'कदमताल' भी कर रहा है। पर क्या भरोसा कल को किसी बात पर बिदक ले और लुढ़कना शुरू कर दे। सेंसेक्स की चढ़त एक बार को सहन हो सकती है किंतु लुढ़कना कतई सहन न हो पाता। न जाने कित्ते ही घर सेंसेक्स की लुढ़काहट में तबाह हो लिए हैं अब तक। यह फैक्ट है कि सेंसेक्स किसी को बख्शता नहीं और न ही आज तलक किसी का सगा हुआ है।

हालांकि पत्नी सेंसेक्स जित्ती 'रिजिड' तो न होती मगर कुछ कम न होती। पत्नी का 'जौली मूड' कब किसी बात पर 'रौद्र रूप' धारण कर ले, कोई नहीं जानता। हां, इत्ती 'गुंजाइश' पत्नी के मूड के साथ जरूर रहती है कि उसे 'एडजस्ट' किया जा सकता है। पर सेंसेक्स के साथ तो वो भी नहीं है। एक दफा जो बिगड़ा सो बड़ी मुश्किल से सुधरने में आता है। देखिए न, सन् 2008 के बाद से अब 2014-2015 में आनकर थोड़ा सुधरा है। मगर फिर भी 'गारंटी' कोई नहीं है।

खैर, सेंसेक्स के साथ 18 साल और पत्नी के साथ 11 साल के 'अनुभव' के हिसाब से यह जरूर बतला सकता हूं कि दोनों को ही समझना मुश्किल ही नहीं नामुकिन है। इसीलिए, अपनी 'बचाते' हुए दोनों के साथ जहां तलक संभव हो 'एडजस्ट' करते रहिए। बाकी तो जो है सो है ही पियारे।

1 टिप्पणी:

बी एस पाबला ने कहा…

दोनों साथ दें तो वारे न्यारे कर सकते हैं