सोमवार, 23 फ़रवरी 2015

मेरी पतलून और पीएम का सूट

आखिर शर्म कैसी बतलाने में कि मेरे कने दो ही पतलूनें हैं! जिसमें से एक- 'दहेज' में मिली थी और दूसरी- मेरी 'कमाई' की है। सोच रहा हूं, दोनों पतलूनों में से किसी एक को 'नीलाम' कर दूं। पहनते-पहनते अब 'उक्ता'-सा गया हूं। दहेज में मिली पतलून को नीलाम कर नहीं सकता क्योंकि यह 'ससुराल का माल' है। कहीं अगर बीवी को पता चल गया तो घर में हुक्का-पानी बंद होने का खतरा हो सकता है। हां, खुद की कमाई से बनवाई पतलून को नीलाम कर सकता हूं। इस पतलून पर बीवी भी कई दफा मुझे 'टोक' चुकी है। कहती है, 'तुम्हारी यह पतलून तुम्हारे लेखन जित्ती ही 'फालतू' है। फैंको इसको।'

बीवी क्या जाने अपनी कमाई से सिलवाई गई एक मात्र पतलून को फैंकना कित्ता 'कष्टकारी' होता है। लेकिन मेरे कने मेरी पतलून को नीलाम करने के अलावा दूसरा कोई चारा भी तो नहीं है। पतलून की नीलामी से आए रुपयों से मैं दूसरी पतलून खरीदूंगा। हिंदी के लेखक के साथ यही सबसे बड़ी समस्या है कि वो इत्ता भी नहीं कमा पता कि अपने तईं ढंग की कोई पतलून-सतलून ही खरीद सके।

दरअसल, खुद की पतलून को नीलाम करने का 'आइडिया' मुझे पीएम के 'लखटकिया सूट' की नीलामी को देखकर आया। पीएम के नीलाम हुए सूट की चर्चाएं हर तरफ जंगल में आग की माकिफ फैल हुई हैं। हर कोई चकित है, पीएम के सूट की नीलामी के भाव को सूनकर। ताजा खबर यही है कि पीएम का सूट मात्र चार करोड़ रुपए में एक हीरा व्यापारी ने खरीद लिया है। चार करोड़...आश्चर्य कैसा; आखिर पीएम का सूट था। कोई मुझ जैसे ऐसे-गैरे, नत्थू-खैरे की पतलून थोड़े ही।

पीएम के सूट के चर्चे तब भी बहुत हुए थे, जब ओबामा के साथ गार्डन में घुमते-टहलते हुए उन्हें इस सूट में देखा गया था। तब सूट की कीमत पर तमाम तरह के कयास लगे थे। कोई बोला 'दस लाख' का है। कोई बोला 'नौ लाख' का है। इस बीच खबर यह भी आई कि सूट 'मात्र सात हजार' का है! उड़ाने वालों ने सूट को 'बदनाम' करने के तईं लाखों की कीमत की 'अफवाहें' फैला दीं थीं। अफवाहों का क्या है, अफवाहों के हाथ-पैर तो होते नहीं। बस यहां से वहां उड़ती रहती हैं।

चलो जो भी हो मगर पीएम ने सूट को नीलाम कर 'अच्छा' ही किया। नीलामी से जुटा पैसा 'स्वच्छता' के वास्ते खरच किया जाएगा। साथ-साथ, अफवाहबाजों का मुंह भी बंद होगा।

खैर, पीएम का सूट चार करोड़ में नीलाम हो गया। पर मेरी पतलून का क्या होगा? यह कित्ते में नीलाम हो पाएगी, फिलहाल इसी उधेड़-बुन में बिजी हूं।

हालांकि मेरी पतलून पर 'साढ़े दस रुपए' की बोली अभी तलक लग चुकी है। बाकी मेरा 'नसीब'।

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