मंगलवार, 20 जनवरी 2015

Ek Patra Chetan Bhagat Ke Naam

पियारे Chetan Bhagat,

चाहता तो मैं यही था कि तुम्हें यह लैटर 'रोमन लिपि' में ही लिखूं लेकिन लिख इसलिए नहीं पा रहा हूं क्योंकि यह न्यूजपेपर रोमन लिपि में न छपता है न छापता। इसलिए हिंदी में (कहीं-कहीं अंगरेजी शब्दों के साथ) लिख रहा हूं।

यार, तुम जब लिखते हो गजब करते हो। अपनी राइटिंग से न केवल राइटिंग फिल्ड बल्कि मार्केट में भी 'सेंसेशन' बनाए रहते हो। पर, तुम्हारी राइटिंग की मार्केटिंग स्ट्रेटजी को तुम या तुम्हारे चाहने वाले तो समझ सकते हैं किंतु हम हिंदी के राइटर नहीं समझ पाते। और पिल पड़ते हैं, तुम्हें और तुम्हारे लेखन को तरीके-तरीके से 'गरियाने'। हालांकि, यह हमें अच्छे से मालूम है कि तुम्हें गरियाकर हमें मिलने-मिलाने वाला कुछ नहीं पर क्या करें, इस बहाने 'मन की भड़ास' ही निकाल लेते हैं। यों भी, हिंदी राइटिंग में किसी भी फिल्ड के राइटर के पाठकों के बीच जल्दी फेमस होने पर भड़ास निकालना परंपरा सी रही है। सो, आजकल तुम निशाने पर हो।

तुमने यह कहकर कि "लेखन में देवनागरी की जगह रोमन लिपि अपनाइ जानी चाहिए" हम हिंदी राइटर्स को बेचैन-सा कर दिया है। तुम्हें नहीं पता कि तुमने कित्ती बड़ी बात कह दी है। तुम्हारे इस कहन से हम हिंदी के राइटर्स की कित्ती और किस हद तलक 'भाषागत भावनाएं' आहत हुई हैं। कुछ तो इस कदर आहत हैं कि तुम्हारे समस्त लेखन और किताबों को ही खारिज कर, तुम्हारा जबरदस्त 'बॉयकॉट' करने को कह रहे हैं। कह रहे हैं कि तुम रीडर या सोसाइटी के नहीं केवल 'मार्केट' के लेखक हो। मार्केट ने ही तुम्हें इत्ता बड़ा राइटर बनाया है।

मैं जानता हूं, तुम पर हमारे 'विरोध' का कोई असर न होगा। क्योंकि तुमने वो आर्टिकल लेखन के हिसाब से थोड़े मार्केट की डिमांड के हिसाब से लिखा था। मार्केट में जो चल रहा है, तुम अक्सर उसे ही सामने लाते हो। अच्छा है। किंतु पियारे चेतन हम हिंदी के राइटर्स न समझते ये मार्केट-सार्केट की बातें। हम तो सीधा-साधा सा लेखन करना जानते हैं। किताब बिकी तो ठीक, न बिकी तो भी ठीक। अब हम तुम थोड़े न हैं कि किताब रिलिज होने से पहले उसका मस्त एड बनवाएं या प्रोमोशन करें।

तुम्हारी समझ ने जित्ता काम किया, उत्ता तुमने अपने आर्टिकल में लिख दिया। चलो सही किया। कोई माने या न माने यह उसकी मर्जी।

लास्टली, बस एक बात जानना चाहता हूं तुमसे, अपनी अगली किताब तुम 'रोमन लिपि' में ही लाओगे न? अगर तुम ऐसा करते हो तो, बाइ 'हाफ गर्लफ्रैंड' की कसम, मैं सबसे पहले तुम्हारी किताब खरीदकर पढ़ूंगा और उस पर मस्त रिव्यू भी लिखूंगा। 

3 टिप्‍पणियां:

Kajal Kumar ने कहा…

Bhagat pe kirpa jarur aayegi :)

अनूप शुक्ला ने कहा…

चेतन को मजाक करने की आदत है यार। बच्चा है। माफ़ करो। :)

Anshu Mali Rastogi ने कहा…

चलिए आपके कहे पर माफ किए देते हैं।