बुधवार, 28 जनवरी 2015

ओबामा के जाने के बाद

हालांकि बराक ओबामा जा चुके हैं मगर फिजा में उनकी मौजूदगी अब भी बरकरार है। किस्म-किस्म की बातें-चर्चाएं ओबामा की भारत यात्रा को लेकर हो रही हैं। खबरिया चैनलों पर भी ओबामा के बहाने बहस का दौर 'गर्म' है।

अभी तलक तो बातें ओबामा की सिक्योरिटी को लेकर हो रही थीं मगर अब ओबामा से भारत को क्या मिला; इस पर हो रही हैं। विदेश नीति के जानकार पंडित लगे हुए हैं, अपने-अपने तरीके से ओबामा की भारत यात्रा का 'गुणा-भाग' करने में।

इत्ती चर्चा-बहस-बातें होने के बाद भी मुझ जैसा (कॉमन मैन) अभी तलक यह न जान-समझ पाया है कि ओबामा की यात्रा से भारत को क्या मिला? भारत के युवाओं की झोली में क्या आया? हां, परमाणु करार पर दोनों देशों में 'सहमति' जरूर बनी पर पियारे आम आदमी परमाणु करार या पावर का क्या करेगा? परमाणु करार न उसे रोटी देगा, न मकान, न कपड़ा, न रोजगार। फिर भी, 'संतुष्टि' के तईं बकौल गालिब- दिल के खुश रखने को गालिब यह ख्याल अच्छा है।

कुछ सुनने में यह भी आया कि ओबामा के दल ने हमारे देश के वरिष्ठ सीईओ के साथ देश में बिजनेस बढ़ाने के वास्ते मेल-मुलाकात की थी। इस बिजनेस मीट के बाबत खबरिया चैनलों पर भी पूरे दिन चर्चाएं होती रहीं। कोई अमेरिका के कानून समझाता रहा था तो कोई भारत के युवाओं के हुनूर पर बहस करता रहा। देख-सुनकर लग तो ऐसा रहा था कि ओबामा के आने के साथ ही न केवल भारत बल्कि यहां के युवा-बेरोजगारों के दिन बस 'फिरने' ही वाले हैं! लेकिन बात घुम-फिरकर वहीं आ गई कि इस बिजनेस मीट का जमा-हासिल क्या सामने आया? न मीडिया ने ढंग से बतलाया न सरकार ने समझाया। 'शायद' मीडिया और सरकार अभी ओबामा की 'खुमारी' से बाहर नहीं निकल पाए हैं!

ओबामा की खुमारी में बहुत से लोग (भक्त-टाइप) ओबामा के 'संबोधन' को भी 'ढंग' से न समझ पाए होंगे। खासकर, धार्मिक कट्टरता और स्त्री सशक्तीकरण की बात को। होता है.. होता है.., जब विचार से कहीं ज्यादा व्यक्ति का व्यक्तित्व हम पर हावी हो जाता है। ठीक ऐसा तब भी हुआ था जब बिल क्लिंटन हिंदुस्तान आए थे।

हैरानी क्या, मेरे मोहल्ले से लेकर सोशल मीडिया तलक ओबामा की सिक्योरिटी, च्यूंगम, डैशिंगलुक या फिर प्रधानमंत्री के ड्रेसिंग सेंस के ही चर्चे अधिक रहे।

सरकार ओबामा की यात्रा को हो सकता है दिल्ली चुनाव में भुना ले जाए पर कॉमन मैन अब भी वहीं है, जहां कल था। क्यों पियारे सही है न।

2 टिप्‍पणियां:

अजय कुमार झा ने कहा…

ओ बामा .ओ बामा रे ..हम तो इंडिया थे घूमने .....

Kapil S. ने कहा…

mulakat bharat mein doosri baar hui hai, ek chir parichit andaaz mein hui hai,pehchano apni shakti ko, 66 varshon ki mehnnat aaj dile naushaad. s.kapil.