गुरुवार, 22 जनवरी 2015

ओबामा का भारत आना


कोई मजाक बात है! पता है, ओबामा, बाराक हुसैन ओबामा, अमेरिका के राष्ट्रपति, भारत आ रहे हैं। वो भी 26 जनवरी- गणतंत्र दिवस- के मौके पर। तो फिर हम क्यों नहीं उनके 'वैलकम' में 'पलक-पाबड़े' बिछाएंगे। कोई 'मामूली नेता' आ रहा होता तो भी ठीक था, किंतु यह तो अमेरिका के राष्ट्रपति हैं। अब इत्ते बड़े मुल्क के राष्ट्रपति के वास्ते सुरक्षा के इंतजाम भी तो बड़े-बड़े ही होंगे न, क्यों पियारे। चकल्लसबाजी में कहीं कोई खामी रह-रवा गई तो दुनिया हम ही सुनाएगी। कहेगी- अमेरिका के राष्ट्रपति को भारत बुला तो लिया मगर सिक्योरटी देना आता नहीं। बताइए, बुरा न लगेगा ऐसा सुनकर।

सुनने-पढ़ने में आ रहा है कि ओबामा की सिक्योरटी के इंतजाम बहुत 'तगड़े' हैं। सिक्योरटी का सारा जिम्मा अमेरिकी-सुरक्षा एजेंसियों ने अपने हाथों में ले रखा है। मैं यही पढ़कर घंटे-दो घंटे अंगुलियों को दांतों के बीच भींचे रहा कि ओबामा की निगरानी में 15 हजार सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहें हैं। साथ ही, उनकी सुरक्षा में सुरक्षा-कर्मियों के अलावा खास किस्म के कुत्ते भी शामिल रहेंगे। ये कुत्ते किसी भी खतरे को इंसानों से कहीं ज्यादा तेज भांप लेते हैं। और, मात्र 'सूंघ' के दाम पर ही केस को 'सॉल्व' कर डालते हैं। इन कुत्ते के तईं विशेष प्रकार का भोजन तैयार होगा।

बताइए, अमेरिका ने गोला-बारूद के साथ-साथ कुत्तों के क्षेत्र में भी कित्ती तरक्की कर ली है। एक हमारे यहां के कुत्ते हैं, जो डॉग-शो में ही करतब-सरतब दिखाने में व्यस्त रहते हैं।

सुरक्षा का ताम-झाम अकेली राजधानी (दिल्ली) में ही नहीं, आगरा में भी इसी जैसा है। आगरा जाकर वे ताजमहल का दीदार करेंगे। आगरावालों की तो किस्मत ही चमक जाएगी कि ओबामा (अमेरिकी राष्ट्रपति) उनके शहर में हैं। लेकिन शहर में बरसों पुराना एक मशहूर 'पागलखाना' भी है। पता नहीं, ओबामा वहां का दौरा करेंगे या नहीं। जब भी कोई बड़ी हस्ती आगरा आती है, पता नहीं क्यों, पागलखाना जाना पसंद नहीं करती? हो सकता है, सुरक्षा एजेंसियों को वो जगह सुरक्षा के हिसाब से उचित न लगी हो। बता दूं, पागल कभी किसी को 'हानि' नहीं पहुंचाते। ऐसा मेरा व्यक्तिगत अनुभव है। क्योंकि मेरे शहर में भी एक 'पागलखाना' है।

अब कहने वाले कह रहे हैं कि जित्ती सिक्योरटी ओबामा को दी जा रही है, इसकी आधी से भी आधी (या फिर नामात्र को भी) हमारे यहां 'आम आदमी' को नहीं दी जाती। आम आदमी की सुरक्षा में सीसीटीवी कैमरा तो दूर की बात है, एक पुलिसवाला तक नहीं होता। 'नादान' हैं वो लोग जो ओबामा की सिक्योरटी पर सवाल उठा रहे हैं। अरे भई वो ओबामा हैं ओबामा, अमेरिका के राष्ट्रपति। उनकी सिक्योरटी अमेरिका में भी इत्ती ही टाइट रहती है, जित्ती भारत में रहेगी। वो कोई आम आदमी थोड़े न हैं! भला आम आदमी सिक्योरटी लेकर क्या करेगा? वो कोई ओबामा जित्ता 'फेमस' थोड़े है? आम आदमी को अपनी सुरक्षा आप करनी चाहिए। जैसा कि मैं किया करता हूं।

बहुत ही दबी जुबान में सुनने में आया है कि कुछ वामपंथी-प्रगतिशील टाइप के लोग ओबामा की भारत यात्रा का विरोध लाल-काले झंडे या बैंड दिखकर करेंगे। करें, खूब करें। अब उनके कने यही सब करने को रह गया है। मुझे लगता है, उनका ये विरोध 'जमीन' पर नहीं 'फेसबुक' पर ही होगा। आजकल वे सरकार, मंत्री, व्यवस्था आदि के खिलाफ विरोध सीधा फेसबुक पर ही दर्ज करवाने लगे हैं। 'जमीनी' राजनीति या विरोध अब उनके बस का रहा नहीं शायद।

अरे हां, 'आहत भावनाओं' के मारे संगठनों ने भी ओबामा की यात्रा और उन पर खरच की जा रही भारी-भरकम सिक्योरिटी का विरोध नहीं किया है। हो सकता है, उनके दिल में भी ओबामा से एक दफा हाथ मिलाने की तमन्ना पल रही हो। तब कहीं पढ़ा था, पहली दफा जब बिल क्लिंटन भारत आए थे, तब उनसे हाथ मिलाकर बहुत से सांसदों-नेताओं-मंत्रियों ने अपने हाथों को कई दिनों तलक धोया नहीं था। (बातें हैं बातों का क्या...)

अब आ रहे हैं तो आएं ओबामा भारत। जिनकी सेहत पर फर्क पड़ना हो पड़े। फिलहाल, आम आदमी तो अभी 'भीषण ठंड' का 'प्रकोप' ही झेल रहा है।

3 टिप्‍पणियां:

अनूप शुक्ला ने कहा…

सूरज भाई ने भी मुंह फुला सा रखा है जबसे सुना है कि ओबामा जी आ रहे हैं।

Anshu Mali Rastogi ने कहा…

हा हा हा।
क्या बात है अनूपजी। अब तो सूरज महाराज को भी ओबामा पर 'मेहरबान' होना ही पड़ेगा।

Kavita Rawat ने कहा…

ओबामा साहब के आते ही आम आदमी की ठण्ड कोसों दूर भाग खड़ी होगी ..
बहुत बढ़िया ...