रविवार, 7 दिसंबर 2014

दाएं-बाएं की कमाई वाले यादव सिंह

ऐसा लोगों को लगता है कि सरकारी पद पर रहकर 'दाएं-बाएं' से पैसा कमाना बहुत 'आसान' होता है जबकि यह इत्ता आसान होता नहीं। तमाम तरह की नजरों और संबंधों का खास ख्याल रखना पड़ता है। हर प्रकार की जवाबदेही हर वक्त सिर पर सवार रहती है। अगर औहदा ऊंचा है फिर तो जिम्मेवारी और अधिक बढ़ जाती है।

लेकिन फिर भी यादव सिंह जैसे वीर सरकारी बाबू दाएं-बाएं से बड़ी होशियारी से पैसा कमा ही जाते हैं। और, थोड़ा-बहुत नहीं कमाई का आंकड़ा करोड़ों में पहुंचा देते हैं। कमाल यह है कि दाएं-बाएं से कमाए धन की रत्तीभर 'शिकन' उनके चेहरे पर नजर नहीं आती। न स्वभाव न व्यवहार में ही कभी लगता है कि मियां इस या उस कमाई से 'परेशान' हैं। हर वक्त हंसते-मुस्कुराते और अपने पद की जिम्मेवारी को मुस्तैदी से निभाते रहते हैं! सरकारी पदों की कमाईयुक्त प्रतिभा एवं प्रतिष्ठा यादव सिंहों के कारण ही तो बरकरार है! पिछले दिनों शायद इसी को लेकर नेताजी ने सरकार एवं अधिकारियों को चेताया व हड़काया था। मगर यहां अपनी 'कमाईखोर आदतों' से बाज कौन आया है?

इसी व्यवस्था में कुछ जलनखोर टाइप के लोग भी होते हैं, जिन्हें दाएं-बाएं से कमाई गई दौलत 'पाप' नजर आती है। यह जलनखोरों की 'कु-दृष्टि' का ही नतीजा रहा कि बेचारे यादव सिंह की अभी तलक दाएं-बाएं से कमाई दौलत को 'ग्रहण' लगा गया। यादव सिंह की काली कमाई का सारा चिट्ठा अब सरकार और जनता के सामने है। दाएं-बाएं से कमाई करने के मामले में यादव सिंह ने ऊंचे-ऊंचे अधिकारियों तक को मात दे दी। दो किलो हीरे और 11 करोड़ तो नगद ही मिले हैं। बाकी लाखों की तो बात ही छोड़िए।

वाकई इत्ती कमाई करने में यादव सिंह को कित्ती 'मेहनत' करनी पड़ी होगी! कित्ते ही अफसरों-अधिकारियों-बाबूओं-नेताओं-मंत्रियों का 'ख्याल' रखना पड़ा होगा! न जाने कित्ती ही दफा ईश्वर को भी 'खुश' करना पड़ा होगा! भजन-जागरण-दान न जाने क्या-क्या करना-करवाना पड़ा होगा! मुझे यादव सिंह की इस दाएं-बाएं से की गई कमाई पर 'फख्र' है! ऐसी 'स्मार्टनेस' हर किसी में न होती है प्यारे।

जरूर यह 'भेदिया' यादव सिंह की 'लंका' का ही रहा होगा- जो आज उन्हें फंसाकर खुद 'हंस' रहा होगा।

फिलहाल, अभी यादव सिंह को कुछ दिनों 'रोना' होगा। थोड़े दिनों बाद लोग बाग सब भूल जाएंगे। फिर कोई नया यादव सिंह अपनी करोड़ों की कमाई के साथ सामने आ जाएगा और सारा ध्यान उस पर केंद्रित हो लेगा। हमारे यहां प्रायः ऐसा ही होता चला आया है। इसीलिए तो भ्रष्टाचार अपने पर हर समय हंसता-मुस्कुराता रहता है।

1 टिप्पणी:

Kavita Rawat ने कहा…

थोड़े दिनों बाद लोग बाग सब भूल जाएंगे।
...सच एक को भूले तो दूसरा तैयार..