सोमवार, 1 दिसंबर 2014

ज्योतिष और शिक्षा मंत्री

चित्र साभारः गूगल
तो क्या हुआ अगर वो शिक्षा मंत्री हैं? तो क्या हुआ अगर वो हाथ दिखलाने ज्योतिषी महाराज कने चली गईं? तो क्या हुआ अगर उनके हाथ और भाग्य में 'राष्ट्रपति' बनने की 'लकीरें' हैं? तो क्या हुआ अगर उनकी ज्योतिष और ज्योतिषी में 'अगाध श्रद्धा' है?

लेकिन मीडिया को इस सब से क्या! उसे तो बस हर बात और हर मुद्दे को 'ब्रेकिंग न्यूज' बनाकर चलाने से मतलब। 'टीआरपी' बढ़नी चाहिए, चाहे शिक्षा मंत्री के ज्योतिषी के पास जाने से बढ़े या अपने चैनलों पर कथित ज्योतिषियों को बैठाकर। जबकि शिक्षा मंत्री खुलकर यह कह चुकी हैं कि उनका ज्योतिषी महाराज कने जाना, हाथ दिखलाना, भाग्य जानना, ज्योतिष में आस्था रखना नितांत 'व्यक्तिगत' मामला है। पर भाई लोगों को तो 'चिकोटी' काटने से मतलब। जिसके जो मन में आ रहा है- फेसबुक और टि्वटर पर कथित फोटू को शेयर कर लिखे चला जा रहा है। बताइए, क्या समय आ गया है, मंत्री लोग व्यक्तिगत तौर पर ज्योतिषियों या बाबाओं के पास भी नहीं जा सकते? उनसे कथित आर्शीर्वाद भी नहीं ले सकते? हद है यार।

वैसे, ज्योतिषियों और बाबाओं से नेताओं-मंत्रियों-फिलमी सितारों का पुराना नाता-रिश्ता रहा है। ऐसे तमाम नेता-मंत्री-फिलमी लोग हैं, जो अपने 'अच्छे' की शुरूआत पंडित-ज्योतिषी-बाबा से पूछकर ही किया करते हैं। ग्रहों की चाल-ढाल की जानकारी जित्ती खुद ग्रहों को नहीं रहती, उनके ज्योतिषियों को रहती है। चंद्रास्वामी से लेकर संत रामपाल तक लंबी फेहरिस्त है। और सभी के साथ किस्म-किस्म की कहानियां-विवाद जुड़ें हैं। मगर फिर भी शिक्षा मंत्री का ज्योतिषी महाराज कने जाना, व्यक्तिगत मामला भले ही हो, किंतु उद्देश्य तो 'अगला पद' कौन-सा ही रहा होगा?

कोई आश्चर्य नहीं अगर शिक्षा मंत्री ज्योतिष से प्रभावित होकर संस्कृत की तरह ज्योतिष को भी पाठ्यक्रम में शामिल करवाने की पहल कर दें। आखिर भाग्य जानने की तमन्ना किसके दिल में नहीं होती? अगर इस बहाने ज्योतिषियों की दुकानदारी और अच्छे से चल पाती है तो क्या हर्ज है? आखिर बाजार में कमाई का हक सबको है।

बात जब चली है तो फिर मैं क्यों छिपाऊं कि मेरी 'आस्था' भी ज्योतिष और ज्योतिषियों में अपार है। मैं तो हर हफ्ते सनिचर वाले दिन अपने मोहल्ले के ज्योतिषी महाराज कने जाया करता हूं, अपने भाग्य का उलटा-सीधा जानने। आज जो मैं इत्ता बड़ा लेखक बन पाया हूं, यह सब मेरे मोहल्ले के ज्योतिषी महाराज की किरपा से ही है। उन्होंने बहुत समय पहले ही मेरा हाथ देखकर मुझे बतला दिया था- 'बेटा, एक दिन तुम जरूर 'ऊंचे दर्जे' के लेखक बनोगे। हर अखबार में छपोगे। लेखन से तुम्हें वो प्रसिद्धि मिलेगी, जैसे बड़े-बड़े लेखकों को मिला करती है। बस प्रत्येक सनिचर तुम नीला वस्त्र धारण किया करो। सांप को दूध और गाय को देसी घी की डेढ़ रोटी खिलाया करो। फिर देखना तुम्हारा भाग्य और ग्रह हर वक्त तुम पर 'मेहरबान' रहेंगे।' तब से अब तलक मैं लगातार यही करता चला आ रहा हूं। ज्योतिषी महाराज की किरपा से मेरी लेखन की दुकान मस्त चल रही है। (लेकिन यह मेरा नितांत व्यक्तिगत मामला है। कृपया, इसमें राजनीति कतई न खोजें।)

देख लीजिएगा, अगर शिक्षा मंत्री के ज्योतिषी महाराज ने कहा है कि वे राष्ट्रपति बनेंगी तो अवश्य बनेंगी। क्योंकि नेता-मंत्री लोगों के ज्योतिषी कभी झूठ (!) नहीं बोलते। राजनीति में जाने कित्ती कुर्सियां ज्योतिषियों की भविष्यवाणी पर ही टिकी हैं।

भाई लोगों दिमाग पे अधिक लोड न लो। वे देश की शिक्षा मंत्री हैं। उन्हें मालूम है कि शिक्षा का भाग्य और उनके हाथों की लकीरें ज्योतिष से कैसे संवर-सुधर सकती हैं।

1 टिप्पणी:

yashoda agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना बुधवार 03 दिसम्बर 2014 को लिंक की जाएगी........... http://nayi-purani-halchal.blogspot.in आप भी आइएगा ....धन्यवाद!