गुरुवार, 20 नवंबर 2014

अजी, भगवान रोहित शर्मा बोलिए

चित्र साभारः गूगल
बस मौका मिलना चाहिए हम तुरंत अपने 'भगवान' गढ़ लेते हैं। भगवान गढ़ने के लिए हमें ज्यादा सोचना-समझना नहीं पड़ता। जहां बाजार का रूख और दीवानों की चाहत होती है, उसी में से एक भगवान निकल आता है। फिर जमकर भगवान को दोनों तरफ से भुनाया जाता है। मीडिया से लेकर विज्ञापन जगत तक में भगवान की पूछ होती है।

अभी तलक हमारे कने सचिन तेंदूलकर नाम के भगवान हुआ करते थे। कुछ समय विराट कोहली में भी भगवान का अक्स देखा गया। लेकिन श्रीलंका के खिलाफ 264 रन की 'चमकदार' पारी खेलकर अब हमें रोहित शर्मा के रूप में एक 'नया भगवान' मिला है। आइए, हम सब क्रिकेट के इस नए भगवान का स्वागत-सत्कार करें।

सही है न, कुछ दिन रोहित शर्मा को भी 'आनंद' ले लेने दीजिए अपने भगवान सरीखा होने का। कुछ दिन मीडिया को रोहित शर्मा के बहाने अपनी टीआरपी बढ़ाने और बाजार व विज्ञापन जगत को अपने नए ब्रांड हीरो से नोट कमा लेने दीजिए। क्या हर्ज है। बाजार का सीधा-सा फंडा है, जो चमकता है वो ही बिकता है।

रोहित शर्मा ने श्रीलंका के खिलाफ 264 रन ही नहीं बनाए बल्कि अपनी तरक्की, अपने मजबूत पैर जमाने के तमाम रास्ते खोले दिए हैं। देखते रहिए, अब रोहित शर्मा की पहचान एक क्रिकेटर के रूप में कम विज्ञापन के एंटरटेनर के रूप में ज्यादा होगी। क्योंकि हमारी टीम इंडिया के खिलाड़ियों का यह गुडलक रहा है कि वे अच्छी परफारमेंस देने के बाद तुरंत किसी न किसी कंपनी के ब्रांड या विज्ञापन जगत के हीरो हो-बन जाते हैं। यह परंपरा सचिन से लेकर विराट कोहली तक कायम है।

जबकि अन्य खेलों में खिलाड़ी कित्ता ही जोर क्यों न लगा ले उसे केवल जरूरत के मुताबिक ही पूछा या समझा जाता है। कुछ इनाम-इकराम देकर उस खिलाड़ी से किनारा कर लिया जाता है।

किंतु क्रिकेट के खिलाड़ी होने का अपना अलग ही सुख है। यहां एक अच्छी पारी में ही बंदा भगवान और बुरी पारी में खाक में मिला दिया जाता है। बेचारे अपने वीरेंद्र सहवाग को ही देख लो। आज सहवाग न बाजार में है न विज्ञापन में। मगर सचिन रिटायर्ड होने के बाद भी दोनों जगह डटे हुए हैं। भगवान होने का फायदा।

बहुत संभव है कि अब कुछ रोहित शर्मा जैसा बनना चाहते चाहेंगे। उनके जैसा खेलना चाहेंगे। क्यों न हो, आखिर रोहित शर्मा ने वन डे में 264 रन जो ठोके हैं। जो ठुकाई करेगा उसे पूजा जाएगा। यही क्रिकेट की चाहत का रूल है प्यारे।

चलो खैर रोहित अभी तुम कुछ दिन खुद में भगवान होने जैसा फील करो। हमने तुम्हें भगवान जैसा मान लिया है। तुम्हारी असली किस्मत तो अभी बाजार और विज्ञापनों की चकाचौंध से चमकने वाली है। हम क्रिकेट के गढ़े हुए भगवानों को प्रायः ऐसे ही सिर पर बैठाते हैं।

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