मंगलवार, 4 नवंबर 2014

मैं गधा हूं

चित्र साभारः गूगल
हालांकि यह कहने का मुझे शौक तो नहीं लेकिन इधर कुछ दिनों से मुझे ऐसा महसूस होने लगा है। मेरी सोच, मेरी हरकतों में गधेपन की मात्रा निरंतर बढ़ती ही जा रही है। मसला चाहे सामाजिक हो या साहित्यिक या फिर आर्थिक मैं अपने गधेपन का परिचय दे ही देता हूं। अभी उस रोज भरी सभा में मैंने कह दिया कि 'मैं समाज को अपने दम पर हांक चाहता हूं। साहित्य को दुलत्ती मारना चाहता हूं। आर्थिक समस्या को अपनी पीठ पर ढोना चाहता हूं।' तब ही एक बंदे ने खीझकर कहा कि 'बंधु, आप गधे हैं। आपकी सोच में गधापन व्याप्त है। जाकर किसी अच्छे जानवरों के डॉक्टर से इलाज करवाएं। या फिर अपने मुंह को बंद रखा करें।'

इसका मतलब मेरी बीवी सही कहती थी कि 'मैं गधा हूं'। मैं बीवी के कहे पर ज्यादा कान इसलिए नहीं देता था कि वो फेंकती है। लेकिन उस बंदे की झाड़ ने अब मुझे सौ फीसद यकीन दिलवा दिया है कि, मैं वाकई गधा ही हूं। साथ ही, मैं यह भी मानने लगा हूं कि पतियों के बारे में बीवीयों की राय हर वक्त 'गलत' नहीं होती प्यारे।

वैसे मैं मेरे गधा होने को बेहद 'सहजता' से लेता हूं। इंसानों के बीच एक मैं बंदा हूं, जो गधा प्रजाति के काफी करीब है। वरना, किसी बंदे से एंवई कहकर देख लीजिए- 'गधा' या 'कुत्ता', कसम से आपके सिर पर सवार हो बैठेगा। अरे, कुछ लोग तो 'पागल' शब्द पर ही विदक से जाते हैं। किंतु मैं मेरे गधे होने जैसे का कतई बुरा नहीं मानता। बुरा क्यों मानूं, अब जो हूं सो हूं।

गधा जैसा होकर मैं खुद को किशन चंदर की एक गधे की आत्मकथा के बेहद नजदीक पाता हूं। यह किशन चंदर ही थे, जिन्होंने गधे को इत्ती नेमती बरती कि गधा पाठकों और दुनिया के बीच 'सुपर-हीरो' बन गया। मुझे तो जहां भी कोई गधा नजर आ जाता है, बेहद श्रद्धा के साथ उसके समक्ष नतमस्तक हो जाता हूं। और, उससे गुजारिश करता हूं कि प्यारे अपने गधेपन का असर मुझ पर कायम रखना।

बात थोड़ी कड़वी लग सकती है मगर है सौ टका सत्य कि हम बहुत से मामलों में अभी भी गधे ही हैं। पारंपरिक रूढ़ियों और मानसिक यथास्थितिवाद को खत्म करने की हम हिम्मत कर ही नहीं पाते। जबकि अब हम मंगल पर कदम रख चुके हैं। स्त्री को गुलाम और अहंकार को अपना अधिकार मानते-समझते हैं। कभी-कभी तो हम गधे से भी बदत्तर हो जाते हैं।

गधा होकर गधेपन के साथ रहने में मुझे 'आनंद' आता है। इसे मैं अपने भीतर एक विशेष प्रकार की खूबी मानता हूं। यह खूबी मुझमें ताउम्र बरकार रहे। आमीन।

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