शुक्रवार, 21 नवंबर 2014

काले धन का रूतबा

चित्र साभारः गूगल
काले धन ने अपना क्या 'रूतबा' गांठा है। आज हर किसी की जुबान पर बस काले धन के ही चर्चे हैं। चाहे किसी के पास हो या न हो लेकिन 'चाहत' यही है कि थोड़ा काला धन हमारे पास भी होना चाहिए था! काला धन पास होता तो सरकार से लेकर मीडिया तक में नाम के चर्चे होते। चार लोग एक-दूसरे को जानते। न केवल देश बल्कि विदेशी अखबारों में भी मय सेल्फी नाम छपता।

न जी न अब इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस मामले में किस तरह से 'बदनाम' हो रहे हैं। बदनामी बंदों के लिए अब 'सेकेंडरी' चीज हो गई है। मतलब तो नाम होने से है। चाहे काला धन रखने पर हो या कोयला। तरह-तरह के घपलों-घोटालों में अब तलक न जाने कित्तों के नाम सामने आए हैं, कुछ तो जेल की हवा भी खा आए हैं लेकिन मजाल है उनके चेहरों पर किसी ने 'शिकन' तक देखी हो। या उन्हें अपनी बदनामी का अहसास भी हुआ हो। चाहे जेल जाकर ही सही पर नाम तो हुआ न। अब नाम होना बदनाम होने से कहीं ज्यादा जरूरी है प्यारे।

देखिए न, कित्ता हंगामा मच रहा है काले धन पर। तमाम तरह की चीजें-बातें एक-एक कर सामने आ रही हैं। काला धन रखने वालों के कुछ नाम भी सामने आए हैं। समाज के ईमानदार लोग उन पर 'लानत' भेज रहे हैं। मगर क्या उनकी 'सेहत' पर कोई असर पड़ा? क्या उनके चेहरे बुझे हुए से दिखे? क्या उन्हें अपने करेक्टर की चिंता हुई? नहीं न। तो फिर हम-आप क्यों परेशान हैं कि हाय! उनके कने काला धन है। हाय! उनके पास नंबर दो की कमाई है।

सच यह है कि अब कोई अपनी बदनामी पर 'शर्मसार' नहीं होता। बदनामी अब 'उच्च-चरित्र' का 'प्रमाणपत्र' बन गई है। बेशक आपके कने काला धन हो या आपकी करतूतें काली हों- समाज में 'इज्जत' आपकी वैसी ही बनी रहेगी। यहां आपसे आपकी बदनामी का सबब पूछने कोई नहीं आएगा। क्योंकि लोगों कने इत्ता समय ही कहां है, जो बेफालतू के कामों में अपना कीमती समय खोटी करें।

यह तो सिर्फ काला धन है समाज में अपने रूतबे की ठसक बरकरार रखने के लिए इंसान क्या-क्या नहीं करता। रूतबा गांठने के लिए वो अपने घर का कूड़ा पड़ोसी के दरवाजे पर डालने तक में शर्म महसूस नहीं करता। चाहे विधायक या सभासद ही क्यों न हो- रूतबा गांठने के लिए उसे अपनी गाड़ी की नेमप्लेट पर लिखना कभी नहीं भूलता।

प्यारे, पूरी दुनिया ही रूतबे के जलवे के बल पर चल रही है। रूतबा चाहे काला धन रखकर बने या काला जादू चलाकर कौन 'परवाह' करता है यहां?

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