गुरुवार, 20 नवंबर 2014

अगर सरकार न होती तो जनता भी कहां होती!

चित्र साभारः गूगल
भला ऐसी कौन-सी सरकार होगी जो जनता की चिंता न करती हो? दिन-रात जनता की फिक्र में न लगी रहती हो? जनता के जागने से पहले न जागती और जनता के सोने से पहले न सोती हो? जनता की तरक्की पहले अपने हित बाद में देखती हो?

जी हां, यकीन कीजिए, बरसों से हम ऐसी शालीन-सुशील सरकारों के बीच ही तो रहते चले आए हैं! न जी मैं झूठ नहीं सौ टका सच बोल रहा हूं। सरकार है तो जनता हैं। वरना, जनता को कौन पूछता है?

खैर जाने दीजिए पिछली सरकार ने जो किया सो किया। वैसे इत्ता बुरा भी न किया! ठीक है.. कुछ घपले-घोटाले अवश्य किए पर बदले में मनरेगा, आधार, आरटीआइ आदि भी तो दिया। यों, कमियां किस सरकार या नेता में नहीं होतीं। जनता का फर्ज है, सरकार और नेता लोगों की कमियों पर परर्दा डाल केवल अपने काम से मतलब रखना। भई, मैं तो यही करता हूं। अपनी इज्जत के माफिक ही सरकार को इज्जत देता हूं। आखिर सरकार मेरी माई-बाप जो ठहरी।

अब वर्तमान सरकार को ही लीजिए। क्या 'चकाचक' सरकार (अ-भक्तों से माफी साहित) है। पहले दिन से ही- प्रधानमंत्री के साथ- सिर्फ और सिर्फ जनता के भले में जुट गई है। गजब यह है कि सरकार से कहीं ज्यादा, जनता के प्रति फिकरमंद, प्रधानमंत्री हैं। पहले दिन उन्होंने संसद की सीढ़ियों पर मत्था क्या टेका जनता उनकी 'मुरीद' हो गई। न केवल अपनी बल्कि विदेशी घरती पर भी अपनी छवि की धाक जमा आए। आजकल जिधर देखो उधर बस प्रधानमंत्री के ही चर्चे हैं। अब सरकार से ज्यादा महत्त्वपूर्ण प्रधानमंत्री हो गए हैं। इससे भक्त लोग भी खासा खुश हैं।

मगर फिर भी सरकार जनता के तईं अपना काम निरंतर कर रही है। चुनावों में किए गए वायदों को भिन्न-भिन्न तरीकों-तकनीकों के माध्यम से पूरा करने की कोशिशों में लगी है। न न 'हंसिए' मत। खुली आंखों से देखिए सरकार के कामों को।

प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया गया सफाई अभियान ही देख लीजिए। सोशल नेटवर्क के साथ-साथ पब्लिक डोमेन में भी कित्ता हिट जा रहा है। टीवी और अखबार में सेल्फियों के साथ कित्ते ही बड़े-बड़े नेता-सेलिब्रिटी-बिजनेसमैन झाड़ू लिए देखने को मिल रहे हैं। गली-मोहल्लों तक में हर कोई झाड़ू थामे सेल्फियों के साथ सफाई करने-करवाने में जुटा है। सबका एक ही उद्देश्य है- सड़क और घर-बाहर को गंदगी-कचरा मुक्त रखना। अभियान को झाड़ू और सेल्फी के साथ 'प्रमोट' किया जा रहा है। यह बड़ी बात है प्यारे।

जन-धन योजना में भी सरकार की मंशा जनता-हित ही तो है। सरकार चाहती है कि हर किसी का बैंक में अकाउंट हो। अपनी कमाई बैंक में रखे। आड़े-टेढ़े वक्त में बैंक की सहायता ले। इसीलिए उसने गरीबों को भी बीमा की सुविधा दी है। ताकि मरने पर परिवार को कोई 'आर्थिक-गम' न हो। अब इसे सरकार का जनता के प्रति मोह या हित न कहें तो और क्या कहेंगे।

काले धन पर सरकार ने जनता से किया वायदा निभाया। चक्करबाजी में उसे कोर्ट की करारी फटकार तक सहनी पड़ी। लेकिन काला धन वापस लाना है तो लाना है। खुद प्रधानमंत्री भी बोल चुके हैं कि पाई-पाई काला धन लाकर ही चैन की सांस लेंगे। अब इससे ज्यादा सरकार और क्या करे।

सरकार ने सबसे बड़ा चमत्कार महंगाई दर में कमी करके किया है। हमें 'सस्ताई के युग' में लाकर खड़ा कर दिया। खबरिया चैनल वाले और अखबार बता रहे हैं कि यहां-वहां महंगाई कम हुई है। मसलन, सोना-चांदी सस्ता हुआ है। कच्चा तेल सस्ता हुआ है। स्मार्टफोन सस्ते हुए हैं। कंप्यूटर से लेकर साड़ी-चप्पल तक सस्ती हुई है। दूध-आटा-दाल-तरकारी-मकान भी शायद जल्द ही सस्ते होगें। चिंता न करें, सरकार प्रयासरत है। सेंसेक्स में बनी भीषण तेजी हमें एक नए 'गुलाबी आर्थिक युग' में ले जाएगी। सेंसेक्स की बढ़त पर दलाल पथ से लेकर दलालों तक के चेहरे खिले हुए हैं। बेतरतीब पैसा आ रहा है। हम सरकार के कारण ही आर्थिक स्तर पर मजबूती पा रहे हैं।

इत्ता सब सरकार जनता के लिए ही तो कर रही है। सरकार है इसीलिए तो जनता का अपना वजूद है! क्या नहीं...। 

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