गुरुवार, 9 अक्तूबर 2014

झाड़ू और सेल्फी

चित्र साभारः गूगल
झाड़ू और सेल्फी आजकल एक दूसरे के पूरक बने हुए हैं। फेसबुक औरटि्वटर पर झाड़ू के साथ सेल्फियों की बाढ़-सी आई हुई है। कल तलक जिस झाड़ू को 'हेय दृष्टि' से देखा जाता था, आज मंत्री से लेकर आम आदमी तक झाड़ू पकड़कर खुद पर 'गर्व' महसूस कर रहे हैं। स्वच्छता अभियान का हिस्सा बनने से ज्यादा कोशिश हो रही है, झाड़ू के साथ सेल्फी बनाकर सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर डालने की।

भाई लोग झाड़ू के साथ सेल्फी लगाकर यह भी पूछ रहे हैं कि कैसा लग रहा हूं? कहीं से कोई सुधार करना हो तो बताएं? बताइए, फेसबुक औरटि्वटर के नशे ने भाई लोगों को इत्ता दीवाना बना दिया है कि अब झाड़ू के साथ सेल्फी पर भी राय मांगने लगे हैं। अगर राय न भी दें तो कम से कम लाइक ही मार दें।

प्रधानमंत्री के सफाई अभियान का जमीनी नफा-नुकसान चाहे जो निकले पर सोशल नेटवर्किंग पर इसे मस्त भुनाया जा रहा है। दरअसल, हम भारतवासी ऐसा मानते हैं कि हम खुद जरा भी गंदगी नहीं करते। वो तो दूसरा कर जाता है, जिसके कारण सुननी हमें पड़ती है। हम हमेशा इस प्रयास में रहते हैं कि केवल हमारा घर-कमरा ही स्वच्छ-साफ रहे, चाहे अपना कचरा पड़ोसी के दरवाजे के आगे क्यों न बिखेर दें। हम हमारे घर की सफाई देखकर यह अनुमान लगा लेते हैं कि न केवल पूरा भारत बल्कि पूरा विश्व साफ-सुथरा है। फिर हमें क्या जरूरत है, सड़कों-चौराहों-गली-मोहल्लों में बिखरे कूड़े-करकट को उठाने की? यह हमारी ड्यूटी थोड़े न है प्यारे।
 
अब देखिए न, कल स्वच्छता अभियान के तहत हाथ में झाड़ू थामे सेल्फी को फेसबुक-टि्वटर पर डालकर जिन-जिन ने सफाई की थी, आज वही सारी जगहें पुनः गंदी पड़ी हैं। अब उस जगह न कोई मंत्री हाथ में झाड़ू लिए नजर आ रहा है न मोहल्ले का सभासद। सब झाड़ू के साथ अपनी-अपनी तस्वीरें खींचवा कर, आराम फरमा रहे हैं। अखबारों में छपी अपनी तस्वीरों को देखकर प्रसन्न हो रहे हैं। और तो और वो जगह भी उसी तरह गंदी पड़ी है, जहां कल प्रधानमंत्री ने स्वयं झाड़ू लगाई थी, कचरा उठाया था।

लेकिन इस गंदगी पर ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं क्योंकि हमने बहुत कुछ सेल्फी के माध्यम से ही साफ कर दिया है। सड़क पर झाड़ू से सफाई करते हुए सेल्फी का फेसबुक या टि्वटर पर आना, हमारे सफाई-पसंद होने की 'सोशल निशानी' है। समाज और सोशल नेटवर्किंग की दुनिया में चीजें या प्राथमिकताएं अब 'जमीन' से नहीं बल्कि 'सेल्फी' से तय होती हैं। तब ही तो झाड़ू के साथ सेल्फी का चलन हमें महत्त्वपूर्ण बनाए हुआ है। सोने पर सुहागा फिल्मी हस्तियों का इस अभियान का हिस्सा बनना है।

खैर, हमें स्वच्छता अभियान की जरूरत से क्या मतलब, हमारा सेल्फी झाड़ू के साथ मस्त लग रहा है, ढेरों लाइक और कमेंट धड़ाधड़ आ रहे हैं, काफी है। बाकी सरकार जाने या प्रधानमंत्री।

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