मंगलवार, 21 अक्तूबर 2014

स्वच्छता अभियान के बहाने

चित्र साभारः गूगल
इधर, जब से 'अच्छे दिन' (!) आए हैं भगवान अधिक सक्रिय हो गए हैं। यों तो भगवान धरती और इंसान की हर अंदरूनी-बाहरी हकीकत को जानते हैं फिर भी स्वर्ग से आंखों-देखा हाल लेते रहते हैं। जब कभी लाइव नहीं देख पाते तो अपने फेसबुक, टि्वटर या व्हाट्सएप पर वीडियो मांगवाकर देख लेते हैं। आप क्या समझते हो सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर एकांउट केवल आप ही का है, जी, अब भगवान भी यहां मौजूद हैं। क्यों न होंगे, 21वीं सदी में अब भगवान भी 'हाइटेक' हो चले हैं। फेसबुक, टि्वटर, व्हाट्सएप, यू-टयूब का वे भी उत्ता ही इस्तेमाल कर रहे हैं, जित्ता कि आप-हम।

आजकल भगवान की खास नजरें धरती पर प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए 'स्वच्छता अभियान' पर ज्यादा टिकी हुई हैं। 24x7 अपने स्मार्टफोन की 'विशेष एप' से जायजा लेते रहते हैं, कहां, किधर, कित्ती सफाई हुई! किसने झाड़ू वाकई सफाई के लिए थामी हुई है और किसने सिर्फ सेल्फी के लिए। कौन कॉरपोरेट अपनी कंपनी के प्रचार या कौन फिल्मी सेलीब्रिटी अपनी फिल्म के प्रोमोशन के लिए झाड़ू लगा रहा है। उन्हें उन आला मंत्रियों-नेताओं-विधायकों-सभासदों के चेहरे तक मालूम हैं, जिन्होंने 02 अक्तूबर वाले दिन ही कैमरों के सामने झाड़ू उठाई थी, उसके बाद से नदारद हैं। चूंकि वो भगवान हैं, जाहिर है, इसीलिए मेरी-तेरी इसकी-उसकी इधर-उधर की खबर रखते हैं। लेकिन हम इंसान लोग खुद को 'होशियार' मानकर यह समझते हैं कि भगवान को कुछ पता ही न होगा। जबकि हममें से आधे से ज्यादा लोग हर रोज भगवान के आगे धूप-बत्ती जलाते हैं और घंटों पाठ करते हैं। फिर भी भगवान को पटा नहीं पाते।

दरअसल, भगवान खुद बहुत दुखी है धरती पर पसरी गंदगी को देखकर। जित्ती गंदगी धरती पर पसरी है, उससे कहीं ज्यादा इंसान के मन में जमी है। भगवान ने अक्सर मुझसे व्यक्ततिगत मुलाकातों में धरती और इंसान की गंदगी पर विस्तार से बात की है। जाने कित्ते ही स्टेटस फेसबुक और टि्वटर पर अपडेट कर डाले हैं। मगर धरती वाले भगवान की बात सुनते ही कहां हैं? आजकल तो उनमें झाड़ू लेकर जगह-जगह जाकर अपनी सेल्फियां फेसबुक और टि्वटर पर अपलोड करने की हिरस लगी हुई है। जिन्होंने जिंदगी में कभी झाड़ू की सींक तलक न पकड़ी होगी, वो ऐसे झाड़ू लगाते हुए मिल रहे हैं मानो पूरी गली-मोहल्ले-शहर की स्वच्छता का दरोमदार उन्हीं पर है।

धरती पर स्वच्छता को लेकर की जा रही नाटक-नौटंकियां ही भगवान को कष्ट दे रही हैं। भगवान ने अपने ट्वीट्स में लिखा भी है- धरती पर स्वच्छता कम 'स्वच्छ चेहरे' अधिक दिखाई पड़ रहे हैं। जित्ती गंदी सड़कें हैं, उससे कहीं ज्यादा गंदी तो नालियां और कूड़ेदान हैं। लोग-बाग घर का कूड़ा पड़ोसी के या अपने घर के आगे डालकर ही संतुष्ट हो लेते हैं। कमाल है, धरती का इंसान जेब में पचास हजार का स्मार्टफोन तो शौक से रखता है किंतु पांच रुपए सफाई वाले को देने में आनाकानी करता है। नेता लोग गांव-देहात में शौचालय बनवाने के बजाए, पैसा अपनी जेब में सरका लेते हैं। शहर के बाबू लोग तो और भी सियाने हैं, कपड़े साफ पहनते हैं किंतु गली-मोहल्ला गंदा रखते हैं।

भगवान को यह भी शिकायत है कि धरती वाले मन के बहुत मैले हैं। जाने कित्ते जन्म से इंसान अपनी गंदगी ऊपर ला रहा है। क्या करें बर्दाशत कर रहे हैं, इसके सिवाय कोई चारा भी तो नहीं।

सच कहूं तो भगवान की चिंता और शिकायत वाजिब है। यहां स्वच्छता अभियान के तहत झाड़ू लगाना महज 'फैशन' बना हुआ है। लोग-बाग इस फैशन को सोशल नेटवर्किंग पर सेल्फी के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। झाड़ू अब स्वच्छता की नहीं, सेल्फी की प्रयाय बनती जा रही है। भगवान इस स्वच्छता को देख रहे हैं।

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