बुधवार, 22 अक्तूबर 2014

सेंसेक्स संग दिवाली

चित्र साभारः गूगल
सेंसेक्स संग दिवाली मनाने का 'आनंद' ही कुछ और है प्यारे। दिवाली पर सेंसेक्स सेंसेक्स न रहकर 'रॉकेट' बन जाता है। दिवाली पर बाजार से ज्यादा सेंसेक्स की मर्जी चलती है। इस दिन सेंसेक्स किसी को निराश नहीं करता। खुद खुश रहता है और दलाल पथ को भी खुश रखने की कोशिश करता है।

सेंसेक्स देश की अर्थव्यवस्था का 'रोल-मॉडल' होने के साथ-साथ बाजार का 'दिल' भी है। अर्थव्यवस्था के चेहरे पर आया गुलाबीपन और बाजार को मिली एनर्जी सेंसेक्स के कारण ही तो बरकरार है। सेंसेक्स जब इठलाता हुआ चलता है, पूरी दुनिया का तन-मन डोलता है। अमेरिका भी हमारे सेंसेक्स के दम भरने पर मन ही मन मुस्कुराता है। क्यों न मुस्कुराएगा, अब हम भी प्रगतिशील देशों की सूची में बहुत आगे तक निकल आए हैं। यह सब हमारे सेंसेक्स की मेहनत का नतीजा है प्यारे।

सेंसेक्स ने बाजार को एक नई पहचान, नई परिभाषा दी है। बताया है, चाहे खुशी हो या गम कैसे मस्त रहा जाता है। त्योहार को 'मार्केट-ओरियंटिड' कैसे बनाया जाता है। अब हर त्योहार पर बाजार की अपनी अलग पहचान है। ग्राहक के बीच खरीदने-बेचने की आदत तो सेंसेक्स की ही देन है। इसीलिए तो दिवाली पर सेंसेक्स और बाजार दोनों की इत्ती पूछ रहती है।
 
मौके को भुनाने की कला सेंसेक्स अच्छे से जानता है। मौका चाहे चुनावी नतीजों का हो या कंपनियों के रिजल्ट का- सेंसेक्स उस हिसाब से अपने मूड को ढाल लेता है। अभी आए चुनावी नतीजों पर सेंसेक्स ने जिस प्रकार की मस्त चाल दिखलाई, हर कोई तर गया। दिवाली से पहले ही सेंसेक्स ने दलाल पथ को अपनी चाल से 'जगमग' कर दिया। अपने चाहने वालों को अतिशबाजी का पूरा मौका दिया। यही तो सेंसेक्स की खूबी है।

नई सरकार और नए आर्थिक फैसलों ने सेंसेक्स को 'बूस्टर' देने का काम किया है। नई सरकार आने के बाद से बहुत कम ऐसे चांस आए हैं, जब सेंसेक्स का मूड बिगड़ा हो। मूड तब ही बिगड़ा है, जब सेंसेक्स पर अतिरिक्त बोझ पड़ा हो। नहीं तो सेंसेक्स अपनी चाल में मस्त हर दिन एक नया मुकाम बनाने में व्यस्त रहता है। दुनियादारी की अधिक परवाह नहीं करता, अपने दम पर देश की अर्थव्यवस्था को संवारने में लगा रहता है। सरकार साथ दे तो 'सोने पे सुहागा'।

दरअसल, सेंसेक्स संग दिवाली मनाना मुझे इसीलिए भी काफी पसंद है क्योंकि उसके कने 'पॉजीटिव एनर्जी' बहुत है। अप्रत्याशित गिरावट में मूड को लाइट रखने और कहा-सुनी पर न के बराबर कान देने की कला सेंसेक्स की लाजवाब है। मैंने तो देश की अर्थव्यवस्था के बुरे दिनों में भी सेंसेक्स को 'कूल' रहते करीब से देखा है। इत्ते दवाबों के बीच सेंसेक्स किस तरह से खुद को बुरे दिनों में से निकालकर अच्छे दिनों में लाया है, वो ही जानता है।
इसीलिए तो आज हम सब अच्छे दिनों के बीच सेंसेक्स संग मस्त दिवाली मना रहे हैं।

खुशहाल-समृद्ध सेंसेक्स मन को बहुत भाता है। अपनी मस्त चाल में इठलाता सेंसेक्स मन में दोगुना उत्साह भर देता है। सेंसेक्स की कामयाबी ने दलाल पथ का चेहरा ही बदल दिया है। दलाल पथ पर हर वक्त दिवाली का सा माहौल रहता है। इसी उत्साह ने ही तो हमें और बाजार को 'उत्सवधर्मी' बने रहने का मंत्र दिया है। छोटी-बड़ी खुशियों और त्योहार को उत्सव बना लेना ही तो कला है।

अपनी उत्सवधर्मिता को जीवंत बनाए रखते हुए इस दफा अपनी दिवाली सेंसेक्स संग।

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