शुक्रवार, 17 अक्तूबर 2014

हुदहुद के बहाने

चित्र साभारः गूगल
ज्योतिषी बताते हैं, जब ग्रह-नक्षत्र ठीक न चल रहे हों तो अन्य उपायों के साथ नाम बदलकर भी देख लेना चाहिए। नाम बदलने से बहुत फर्क पड़ता है। बिगड़े काम बनने लगते हैं। लाइफ में थोड़ा चेंज आता है। समाज के बीच एक नई पहचान बनती है।

कभी-कभी नाम फैशन के अनुरूप भी बदल लेना चाहिए। फिल्म लाइन में तो नाम बदलने का रिवाज-सा रहा है। वहां सितारे कुंडली और व्यक्तित्व के कारण भी नाम बदल लेते हैं। युसूफ साहब से लेकर गुलजार तक लंबी लिस्ट है। एकता कपूर तो इस मामले में दो कदम आगे हैं। वे ज्योतिषी के कहेनुसार अपने नाम के शब्दों को घटा-बढ़ा लेती हैं। एक एकता कपूर ही नहीं, वहां ऐसा कई सितारे करते हैं। बेशक आप उन्हें अंधविश्वासी कह सकते हैं, इससे उनकी सेहत पर फर्क नहीं पड़ता। अरे भई, अपना नाम है- चाहे नथ्थूलाल रखें या अंगूरीदेवी। चाहे नाम को घटाए-बढ़ाएं किसी को क्यों एतराज होना चाहिए?

इसीलिए मैं मेरे ज्योतिषी की बात मान अपना नाम बदल रहा हूं। ज्योतिषी ने कहा है, नाम बदल लेने से मेरी प्रसिद्धि समाज के साथ-साथ साहित्य जगत में भी एकदम से बढ़ जाएगी!

ज्योतिषी ने सलाह दी है कि मैं अपना नाम हुदहुद रख लूं। हुदहुद एक अच्छा और अलग-सा नाम है। आजकल खासा लाइम-लाइट में भी है। मेरी पर्सनाल्टी को सूट भी करता है। मुझे प्रायः ऐसे नामों की ही तलाश रहती है, जो सुनने-बोलने में भीड़ से कुछ अलग हों। ज्यादा कुछ नहीं तो सामने वाला नाम सुनकर हंस ही ले। मेरे नाम (हुदहुद) के बहाने अगर कोई हंस लेता है, तो काफी है मेरे लिए। मेरी कोशिश भी यही रहती है, चाहे मेरा चेहरा देखकर, मेरा लिखा पढ़कर, मेरा नाम सुनकर, मेरी हरकतें देखकर अगर कोई मुझ पर हंस-मुस्कुरा देता है तो इससे बड़ा सम्मान क्या होगा मेरे लिए। दूसरों पर हंसने और खुद पर हंसवाने में बहुत फर्क होता है प्यारे।

लोग खामखां अच्छे नाम की तलाश में गूगल करते रहते हैं, तूफानों के नाम पर नामकरण किया करें न। लैला, कैटरीना, सुनामी, नीलोफर, सैंडी, हुदहुद कित्ते ही खूबसूरत-खूबसूरत नाम हैं। ये ऐसे नाम हैं, जिनकी गिरफ्तर में अगर बंदा आ भी जाए तो खुद को 'लक्की' महसूस करे। मैं खुद चाहत हूं कि मैं ऐसे खूबसूरत नामों वाले तूफान की आगोश में कभी आऊं। चाहे तबाह क्यों न हो जाऊं। इस बहाने दुनिया में मेरा नाम तो होगा।

हुदहुद ने भले ज्यादा तबाही न मचाई हो पर टीवी चैनल वालों को टीआरपी का झुनझुना तो थमा ही दिया। रात-दिन चैनल वाले हुदहुद का झुनझुना बजाए चले जा रहे हैं। हुदहुद के आने-जाने की पल-पल की खबर चैनलों के पास है। मौसम विभाग से ज्यादा बेचैन तो चैनल वाले हैं। कुछ एंकरों ने तो इत्ता सहास दिखाया है कि हुदहुद को जहां पर आना था, वहीं पहुंचकर लाइव शो किया। हुदहुद के आने की खबर को इत्ते जोशिले अंदाज में बयां कर रहे थे मानो भारत-पाकिस्तान का वन-डे मैच होने जा रहा हो।

जब हुदहुद के नाम का फायदा टीवी चैनल वाले उठा रहे हैं तो फिर मैं क्यों उठाऊं, अपना नाम हुदहुद रखकर।

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