शनिवार, 19 जुलाई 2014

सोशल मीडिया पर गॉसिप

चित्र साभारः गूगल
प्यारे, जमाना 'सोशल मीडिया' का है। हर कोई सोशल मीडिया पर मौजूद है। सोशल मीडिया पर किसी बात या मुद्दे का 'गॉसिप' बन जाना, बहुत ही सहज है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग सिर्फ गॉसिप करने के लिए ही तैयार और तैनात रहते हैं। राई को अगर पहाड़ बनाना है, तो सोशल मीडिया पर आएं।

समय आने पर सोशल मीडिया सबकी 'क्लास' लेता है। लेकिन इस क्लास में 'गंभीरता' से परहेज किया जाता है। गंभीरता यहां बरकरार इसलिए भी नहीं रह सकती क्योंकि गॉसिप का तड़का उस पर हावी रहता है। जहां गॉसिप, वहां गंभीरता या वैचारिता का भला क्या काम?

सोशल मीडिया पर गॉसिप का असर देखिए, शायद मारिया शारापोवा ने कभी सपने में सोचा भी न होगा कि उनका सचिन को न जानना, उनके ताईं बवाले-जान बन जाएगा। क्या फेसबुक, क्या टि्वटर पर शारापोवा के कमेंट की वो खिल्ली उड़ी कि वो भी खुद हैरान थीं। सोशल मीडिया पर आने वाला हर दूसरा कमेंट शारापोवा पर केंद्रित रहता था। बात ही बात में गॉसिप के दीवानों ने तो यहां तक लिख दिया कि वे मारिया शारापोवा को ही नहीं जानते।

मारिया शारापोवा पर गॉसिप का बाजार ठंडा पड़ा ही था कि वैदिक-हाफिज की मुलाकात ने इसे फिर से गर्मा दिया। अब सोशल मीडिया पर गॉसिपबाजों की गॉसिपिंग का केंद्र वैदिक-हाफिज बने हुए हैं। फेसबुक और टि्वटर पर वैदिक-हाफिज की मुलाकात को दो बिछड़े भाईयों के मिलन की निगाह से देखा जा रहा है। अखबारों में भले ही इस मुलाकात पर गंभीर खबरें या लेख आ रहे हों लेकिन सोशल मीडिया का माहौल एकदम गॉसिपमय है। गॉसिप भी ऐसी-ऐसी कि वैदिक-हाफिज पढ़ लें तो मन ही मन 'मुस्कुरा' दें।

जो हो पर सोशल मीडिया ने महिलाओं से गॉसिपिंग का एकाधिकार वापस लेकर हर किसी को उपलब्ध करवा दिया है। अब महिलाएं यह नहीं कह सकतीं कि सोशल प्लेटफार्म पर वे ही सबसे अधिक गॉसिप करती हैं। गॉसिपबाजी में अब बच्चे-जवान-बूढ़े सब के सब शामिल हो गए हैं। कहना न होगा, सोशल मीडिया का अस्तित्व ही गॉसिपिंग पर टिका है प्यारे। बिना गॉसिप सोशल मीडिया भला किस काम का!

सही भी है न, हर समय धीर-गंभीर-वैचारिक बातों-मुद्दों से बंधे रहना भी दिमाग को खतरे में डाल सकता है। फिर क्यों न, सोशल मीडिया पर गॉसिपिंग ही कर ली जाए। ताकि दिमाग और मूड रिलेक्स फील करें।

बहरहाल, जिन्हें मारिया शारापोवा, वैदिक-हाजिफ, नील नीतिन मुकेश, अरविंद केजरीवाल, राहुल गांधी आदि पर गंभीर-वैचारिक बहसें करनी हो करें किंतु सोशल मीडिया पर गॉसिपिंग यों ही चलती रहेगी। आखिर गॉसिप ही तो सोशल मीडिया की जान है प्यारे।