बुधवार, 4 जून 2014

मेरा प्यारा उत्तर प्रदेश

चित्र साभारः गूगल
आजकल जिसे देखो वो मेरे उत्तर प्रदेश की बुराई-खिंचाई में लगा है। जाने क्या-क्या और कैसा-कैसा कहा जा रहा है। अखबारों और चैनलों पर उत्तर प्रदेश सरकार की कानून-व्यवस्था पर तीखी बहस छिड़ी है। कोई उत्तर प्रदेश को 'अपराध प्रदेश' बता रहा है तो कोई 'जंगल राज' की संज्ञा दे रहा है। कुछ के पेट में केवल इसीलिए दर्द है क्योंकि उत्तर प्रदेश में बत्ती गुल है।

जबकि ऐसा कुछ नहीं है। मैं स्वयं मेरे प्यारे उत्तर प्रदेश से हूं। यहां का सैंतीस साल पुराना निवासी हूं। मेरे परदादा से लेकर दादा तलक उत्तर प्रदेश में रहे हैं। न कभी उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार से शिकायत रही और न ही मुझे है। मुझे सरकार के भीतर-बाहर 'शिकायत' जैसा कुछ लगता-दिखता ही नहीं फिर क्यों करूं ? खामखां, अपना और मुख्यमंत्रीजी का टाइम खराब करूं ! मेरे कने निजी परेशानियां ही इत्ती हैं, फिर क्यों अतिरिक्त परेशानी मोल लूं!

एकदम सबकुछ 'चकाचक' तो चल रहा है मेरे प्यारे उत्तर प्रदेश में। अब हिंसा-अपराध का क्या है, यह तो कभी भी कहीं भी घट सकते हैं। बेचारे मुख्यमंत्रीजी या उनके अधिकारी अब चप्पे-चप्पे पर तो मौजूद रह नहीं सकते! अरे भई इत्ता बड़ा प्रदेश है। इत्ती बड़ी जनसंख्या है। इत्ते सारे शहर-गली-मोहल्ले-गांव-कस्बे-सडक़ें-चौराहें हैं। हालांकि कोशिश उनकी पूरी रहती है कि हिंसा-अपराध न के बराबर हों फिर भी अगर कुछ छुट-पुट हो जाता है, अब इसमें सरकार या मुख्यमंत्रीजी क्या करें? अपराधियों के साथ-साथ अधिकारियों तक को इत्ता 'टाइट' किया हुआ है, फिर भी दो-चार दगा दे ही जाते हैं।

यों भी, इत्ते बड़े प्रदेश को अकेले दम पर संभालना हंसी-ठिठोली नहीं है प्यारे। भीतर तक का 'तेल' निकल आता है। यह कोई गुजरात थोड़े है कि बातें बनाईं और काम हो गया। यह उत्तर प्रदेश है, मेरा प्यारा उत्तर प्रदेश।

कुछ लोग बत्ती को लेकर ही हाय-हाय कर रहे हैं। अरे भई क्यों कर रहे हो हाय-हाय? अच्छी-खासी तो बत्ती आ रही है! दिनभर में अगर 17-18 घंटे बत्ती नहीं भी आती, तो इत्ता दुखी क्यों हो? सरकार कने जित्ती बत्ती होगी, उत्ती ही तो मिलेगी। हमारे मुख्यमंत्रीजी ने केंद्र को लिख रखा है- उधार की बत्ती के लिए। जब मिल जाएगी, तो दे दी जाएगी। मुख्यमंत्रीजी कोई खुद थोड़े ही रख लेंगे सारी बत्ती। जनता की बत्ती, जनता के हवाले।

बत्ती या सरकार को दोष देने से अच्छा है, गर्मी को दीजिए। गर्मी को बोलिए 40-44 के पार पारे को न लेकर जाया करे। हम जनता को 'प्रोब्लम' होने लगती है।

मेरे मानिए, उत्तर प्रदेश को गलत निगाह से देखने वाले चश्मे का नंबर बदल डालिए। ऐसा कुछ भी नहीं है, जैसा मेरे प्यारे उत्तर प्रदेश के बारे में कहा-बोला-लिखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश में केवल 'समाजवादी राज' है। एक दफा यहां बसकर तो देखो प्यारे- सब मालूम पड़ जाएगा।

4 टिप्‍पणियां:

mahendra mishra ने कहा…

बढ़िया व्यंग्यात्मक प्रस्तुति

Yogi Saraswat ने कहा…

एकदम सही लिखा है आपने ! उत्तर प्रदेश अब रेप प्रदेश बन रहा है

अंशुमाली रस्तोगी ने कहा…

बहुत शुक्रिया आपका।

HARSHVARDHAN ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को ब्लॉग बुलेटिन की आज कि विश्व पर्यावरण दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।