सोमवार, 16 जून 2014

अभी-अभी तो सरकार बनी है

चित्र साभारः गूगल
अभी सरकार को बने दिन ही कित्ते हुए हैं। अभी सरकार के मंत्री लोगों ने काम को हाथ में लिया ही है। अभी किस्म-किस्म की योजनाओं-परियोजनाओं पर बातचीत और विचार-विमर्श शुरू ही हुआ है। मगर लोग हैं कि अभी से सरकार के पीछे पड़ गए हैं। सरकार के काम-काज में नुक्स निकालना शुरू कर दिए हैं। हंगामा काट रहे हैं कि सरकार ने अभी तक यह नहीं किया, वो नहीं किया। जो वायदे किए थे, उनमें से अभी तक एक भी नहीं निभाया।

कमाल है। हमारे देश के लोग जल्दी में कित्ता रहते हैं। हर सपने को रात भर में ही पूरा कर लेना चाहते हैं। चाहे जल्दबाजी में सपना टूट ही क्यों न जाए। पर जल्दी है तो है। जल्दबाजी के मारे मैंने ऐसे लोग भी खूब देखें हैं, जो उबलती चाय मुंह में डाल लेते हैं, फिर दुनिया भर में मुंह जलने की दास्तां सुनाते फिरते हैं।

अमां, थोड़ा धीरज धरो। दिमाग को थोड़ा ठंडा करो। अभी-अभी तो सरकार बनी है, अभी-अभी कैसे सारे चुनावी वायदों को पूरा कर सकती है। टाइम लगेगा, टाइम। यह भारत है, भारत। यहां घड़ी भी इंसान की फितरत और चुस्ती को देखकर अपनी चाल चलती है। और फिर सरकारी काम-काज या वायदे होते-होते ही तो हो पाएंगे। अब बस यह मत पूछना कि कब, कहां और कैसे? क्योंकि यह तो खुद सरकार और उसके मंत्रियों को भी नहीं पता होता।

गंगा की साफ-सफाई के बाद महंगाई को काबू में रखने की मंत्रणा सरकार ने शुरू तो कर दी है पर अभी इसमें भी टाइम लगेगा। महंगाई कोई मैगी थोड़े है कि पानी में डाला और दो मिनट में तैयार। इत्ते सालों में बढ़ी अनाप-शनाप महंगाई को रोकना बहुत बड़ा टास्क है। कित्ता भी जल्दी हो कम से कम पांच साल तो लग ही जाएंगे इस काम में। हमारे देश में जरा-जरा सी बात पर तो महंगाई बढ़ जाती है। लग रहा है, इस दफा मानसून भी अपने रंग महंगाई के रूप में दिखाने को तैयार बैठा है। हालांकि सकरार इससे निपटने को प्रतिबद्ध है पर गारंटी जैसे कोई बात नहीं।

अब महंगाई बढ़े या घटे हमारे देश की जनता हर हाल में एडजस्ट करना जानती है। इस हकीकत को महंगाई भी अच्छे से समझती है।

अच्छे दिनों का वायदा करके आई सरकार से अच्छा करने की उम्मीद जरूर रखें किंतु उसके सिर पर तो न सवार हों। सरकार को एक ही काम थोड़े है। इत्ता बड़ा देश है, इत्ते लोग हैं, सबको साथ लेकर चलना हंसी-खेल थोड़े है। फिर भी, जो जल्दबाजी में हैं, उनसे इत्ता ही कहा जा सकता है, प्यारे धीरज धरो। कहीं जल्दबाज में 49 दिनों की सरकार का हश्र पुन: न देखना पड़े।

2 टिप्‍पणियां:

yashoda agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना बुधवार 18 जून 2014 को लिंक की जाएगी...............
http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

Smita Singh ने कहा…

बेहद अच्छा लेख। बधाई।