रविवार, 15 जून 2014

सूरज महाराज पर एफआइआर

चित्र साभारः गूगल
अब तलक तो मैं टालता रहा। एकाध दफा प्यार व गुस्से से भी समझाया। सोचा कि सुधर जाएंगे। अक्सर मई-जून में उनके मिजाज कुछ ऐसे ही 'आक्रमक' से हो जाते हैं। तब वे न किसी की सुनते हैं, न किसी को कुछ समझते। लेकिन प्यारे 'बरदाशत' की एक सीमा होती है। भला आज के जमाने में ऐंवई कौन किसी की बरदाशत करता है? मैं कर रहा हूं, यह मेरा 'बड़प्पन' है। पर मैं मेरे बड़प्पन का 'नाजायज फायदा' किसी को भी उठाने नहीं दे सकता। चाहे वो सरकार हो या सूरज महाराज।

काफी सोचने-विचारने के बाद मैंने यह तय किया है कि मैं सूरज महाराज पर 'एफआइआर' दर्ज करवाऊंगा। क्योंकि मेरे कने अब इसके अलावा दूसरा कोई 'सहज रास्ता' नहीं बचा है। इत्ता समझाने-बुझाने के बाद भी जब कोई नहीं माने फिर भुगतने को तैयार रहे।

इधर कुछ दिनों से सूरज महाराज ने हद ही कर रखी है। न दिन में चैन लेने दे रहे हैं, न रात में चैन से सोने दे रहे। चौबीस घंटे अपने तापमानी-प्रकोप से हमारे पसीने छुड़ाते रहते हैं। कुछ काम से बाहर निकलो कि सिर पर भन्नाने लग जाते हैं। न छतरी के बस में आ पा रहे हैं न गमछे के। सड़क चलता और घर-दफ्तर में बैठा हर आदमी हर वक्त बौखलाया-सा मिलता है। मानो अभी कच्चा चबा जाएगा।

इस 46-47 डिग्री तापमान में चाहे सिर पर ठंडे पानी की बोतल उड़ेल लो या बरफ की सिल्ली क्यों न रख लो, सब बेकार। सूरज महाराज अपनी प्रचंडता से हर ठंडक के साधन और सामान की बाट लगाए हुए हैं। हालत यह है कि ठंडक न एसी में बैठकर मिल पा रही है, न फिज्र में। सबकुछ को बेदम-सा कर रखा है सूरज महाराज और गर्मी ने मिलकर।

एक तरफ सूरज महाराज की गर्मी का प्रकोप है तो दूसरी तरफ बत्ती के नखरे। अव्वल तो आती नहीं। आती है तो असर नहीं जमा पाती। एसी को छोड़िए, पंखा ही चल जाए तो गनीमत। वोल्टेज ने हाल वो बेहाल किया हुआ है कि बत्ती का होना अक्सर न होने जैसा ही लगता है। बिजली विभाग वालो से शिकायत करो तो कहते हैं कि ऊपर से ही नहीं मिल पा रही। ऊपर से वालो से शिकायत करो तो कहते हैं कि नीचे वालो ने हालत खराब कर रखी है। सरकार से कहो तो कहती है कि अपराध-बलात्कार तो रोके नहीं रुक रहे, बत्ती की बाद में देखी जाएगी!

जनता बेचारी भी क्या करे, रोज-ब-रोज बत्ती और गर्मी को लेकर सड़कों पर 'अंदोलित' होती रहती है लेकिन नतीता कुछ नहीं निकलता। हार कर कुछ हालात से समझौता कर लेते हैं, तो कुछ मुकदमें के लफड़े में पड़ जाते हैं।

इत्ते पर हमारे सूरज महाराज का दिल नहीं पिघलता। हर रोज पारे का एक नया रिकार्ड कायम कर आसमान से आग उगल रहे हैं। वो तो मेरा बस नहीं चलता, नहीं तो मैं सूरज महाराज की इस हरकत पर उन्हें जाने का कब का 'थप्पड़' जमा चुका होता। लेकिन आजकल सूरज महाराज के नजदीक भी जाना सीधा मौत को दावत देने जैसा है।

इसीलिए मैंने निर्णय लिया है कि सूरज महाराज पर एफआइआर होनी ही चाहिए। ताकि उन्हें भी तो एहसास हो कि सेर से बढ़कर सवा सेर धरती पर मौजूद है- मुझ जैसा। सूरज महाराज ऐसे सुधरने वाले नहीं। हफ्ता-दस दिन हवालात में रहेंगे, अपनी गर्मी को खुद झेलेंगे, न पंखा मिलेगा, न एसी; सारी अक्ल ठिकाने आ जाएगी। सताते वाले को जब तलक सजा न मिले हमेशा चौड़ा होकर ही घुमता है।

बहरहाल, सूरज महाराज के खिलाफ एफआइआर तैयार है। दर्ज करवाने निकल रहा हूं। उम्मीद है, गर्मी से जल्द ही राहत मिलेगी।

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