बुधवार, 11 जून 2014

गर्मी, तुम अभी और पड़ो

चित्र साभारः गूगल
हे! गर्मी, प्यारी गर्मी, अभी तुम और पड़ो। अभी ढंग से पड़ी ही कहां हो! पारा अभी 46-47 डिग्री के इर्द-गिर्द ही तो डोल रहा है। बात तो तब है, जब यह 50-55 डिग्री के भी पार पहुंच जाए। लोगबाग न सिर्फ बे-हाल बल्कि बे-सब्र हो जाएं। हर किसी की जुबान पर बस गर्मी हाय! गर्मी का ही नाम हो। गर्मी से निजात न एसी की ठंडक से मिले, न ठंडे पानी की बोतल से, न ठंड-ठंडा कूल-कूल पाउडर से। साथ-साथ, पहाड़ भी मैदान जैसे ही गर्म हो जाएं। पहाड़ की ठंडक 'दिव्यस्पप्न' सी लगने लगे।

एक तरफ गर्मी की मार सताए तो दूसरी तरफ बत्ती के नखरे। पूरा दिन बस बत्ती के ही इंतजार में बीत जाए। और जब आए तो ऐसी आए कि आने का अहसास तक न हो। न इनवर्टर, न बैटरी सबकुछ धरा का धरा रह जाए। बस हाथ-पंखा पास हो। उसी से गर्मी के गुस्से को शांत किया जाए।

हो सकता है, कुछ को मेरे गर्मी के समर्थन में लिखे इस लेख पर घोर आपत्ति हो। कुछ मेरे खिलाफ मिथ्या-प्रचार में भी जुट जाएं। अब हो तो हो। मुझ पर कोई फर्क  नहीं पड़ता। जब हमने प्रकृति को कहीं का नहीं छोड़ा प्यारे, फिर प्रकृति हमें क्यों छोड़े? ईंट का बदला ईंट से देने में जो मजा है, वो किसी और में नहीं। हरे-भरे पेड़ों के कटने की सजा इंसान भी तो कुछ झेले। चाहे भीषण गर्मी के रूप में, चाहे सर्दी के।

इन दिनों गर्मी हमारा 'इम्तिहान' ले रही है। देख रही है कि हम उसे किस हद तक झेल पाते हैं। देख रही है कि हम 47-48 डिग्री पारे में भी कैसे खुद को 'ठंडा' रख पाते हैं। गर्मी गर्मियों में नहीं पड़ेगी तो क्या दिसंबर-जनवरी में पड़ेगी प्यारे? होना तो यह चाहिए कि जित्ता गर्मी पड़ रही है, उत्ता ही हम 'स्ट्रांग' बने उसे झेलने के लिए। मजा तो तगड़े से मुकाबला करने में है।

गर्मी से क्या शिकायत करना? गर्मी तो पड़ेगी ही। शिकायत करनी है, तो उनसे करें, जिन्होंने गर्मी को प्रचंड होने पर मजबूर किया।

एन्जॉय गर्मी को भी किया जा सकता है, बर्शेते बिना नाक-मुंह-भौं सिकोड़े। गर्मी को गर्मी की तरह लेंगे तो गर्मी का अहसास भी न होगा। अगर समस्या मानेंगे तो गर्मी यों ही सताएगी। गर्मी में अगर बौखलाएंगे तो अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारेंगे।

इसीलिए तो मैं गर्मी से बराबर यही कह रहा हूं कि हे! गर्मी, प्यारी गर्मी अभी तुम और पड़ो। और पड़ो। और पड़ो। इत्ती पड़ो कि मेरी कुल्फी तुम्हारे तापमान से क्षणभर में पिघलकर 'गर्म पानी' बन जाए।

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