गुरुवार, 8 मई 2014

मेरी जांच भी करवा लो

चित्र साभारः गूगल
मेरी मित्र-मंडली में शायद ही कोई ऐसा मित्र हो जिसकी किसी न किसी मामले में जांच न चल रही हो। मेरे मित्र नौकरियों से ज्यादा व्यस्त अपने खिलाफ चल रही जांचों में रहते हैं। बड़ी बात यह है कि कोई भी मित्र अपने खिलाफ जांचों को लेकर परेशान या बेचैन नहीं दिखता। आए दिन उनके घरों के आगे कभी इनकम टैक्स, कभी सीबीआइ, कभी एसआइटी के अफसरों की गाड़ियां खड़ी ही रहती हैं। अखबारों में आए दिन उनके खिलाफ चल रही जांचों की खबरें भी छपती हैं। अड़ोसी-पड़ोसी भले ही उन्हें अच्छा इंसान न मानतें हों पर इससे मित्रों की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता। वे गर्व के साथ अपने खिलाफ चली रही जांचों के बारे में मुझे बतलाते हैं।

अपने मित्रों के बीच मैं खुद को बेचारा-सा महसूस करता हूं। हर वक्त इसी गम में घुलता रहता हूं कि मेरे खिलाफ क्यों कोई जांच नहीं चलता? क्यों कोई मेरी भी शिकायत सरकार से नहीं करता? जबकि मेरी और मेरे मित्रों की कमाई के साधन लगभग एक जैसे ही हैं। जिन तरकीबों से वे नोट कमाते हैं, मैं भी। हर नामी-गिरामी उद्योगपति से जित्ते उनके करीबी संबंध हैं, मेरे भी। लेकिन फिर भी पता नहीं क्यों किसी की भी निगाह मुझ पर टेढ़ी नहीं होती।

सच बताऊं, जाने कित्ती ही दफा मैं अपने फेसबुक-टि्वटर एकाउंट पर लिख चुका हूं कि हां, मेरे कने भी काला धन है। मैं भी अपना काला धन स्विस बैंक खाते में ही रखता हूं। आए दिन स्विट्जरलैंड के चक्कर भी लगाता हूं। देश के ऊंचे नेताओं-व्यापारियों के यहां मेरा लगभग रोज का आना-जाना भी है। फिर भी मेरे खिलाफ कोई क्यों नहीं जांच बैठाता? जबकि जांच बैठनी चाहिए। मुझसे भी लंबी-चौड़ी बातचीत होनी चाहिए। मीडिया में मेरा भी नाम खूब उछलना चाहिए। किसी विदेशी अखबार को मेरे खिलाफ तथ्य जुटाकर खबर प्रकाशित करनी चाहिए। जैसाकि दामादश्री के खिलाफ किया। मगर कोई पहल ही नहीं करता। क्या सब डरते हैं मुझसे?

एक लेखक कने काला धन होना बहुत बड़ी बात है। पर कोई मानने को तैयार ही नहीं। मेरे मित्र भी कहां मानते हैं। हजारों दफा उनको बोल चुका हूं कि यार, मेरे खिलाफ भी जांच बैठवा दो। मगर कोई सुनकर ही नहीं देता। हंसकर टाल जाते हैं। पता नहीं क्यों मुझे ईमानदार समझते हैं? जबकि मैं ईमानदार कतई नहीं हूं। अपने परिवार और मोहल्ले का छंटा हुआ बेईमान हूं मैं। बेईमानी ही मेरी पूंजी है। बेईमानी ही मेरी साधना है।

गजब देखिए, अभी हाल काला धन वालों की जो सूची जारी हुई उसमें भी तो मेरा नाम नहीं है। यह मेरे तईं बेहद शर्म की बात है।

खैर, मैं पुनः सरकार से गुजारिश करता हूं कि मेरी भी जांच करवा लो प्लीज।

1 टिप्पणी:

Ankur Jain ने कहा…

उम्दा प्रस्तुति। व्यंग्यपूर्ण, रोचक शब्दों से सुसज्जित।।