रविवार, 25 मई 2014

'मेरी जिद' बनाम 'केजरीवाल जिद'

चित्र साभारः गूगल
यों तो जिद्दी मैं भी कुछ कम नहीं लेकिन केजरीवाल की जिद के आगे मेरा जिद्दीपन पानी मांगता है! मेरी जिद 'क्षणिक' होती है लेकिन केजरीवाल की जिद 'अनिश्चित'। मैं जिद मांग और माहौल को देखकर करता हूं लेकिन केजरीवाल समय-असमय कैसी भी जिद करने का दम रखते हैं। एक दफा केजरीवाल अपनी जिद पर जम जाएं तो मजाल है किसी माईकलाल की कि उन्हें डरा पाए। सच्ची, मैं केजरीवाल की जिद के आगे बेहद बौना हूं। पत्नी भी ताना मारते हुए कहती है- भई, जिद हो तो केजरीवाल जैसी वरना न हो। जो बंदा अपनी जिद की खातिर कोर्ट से भिड़ जाए, उसे वीरता-चक्र मिलना सौ फीसद बनता है।

हर कोई जिद करने में फरफैक्ट नहीं होता। मैंने अपने आस-पास न जाने कित्ते ही जिद्दीयों को देखा है, परंतु प्रभाव कोई भी नहीं छोड़ पाया। कुछ तो जिद इसीलिए करते हैं क्योंकि उनके कने करने को कुछ नहीं होता। और जिद्दें भी ऐसी-ऐसी की भेजा पगला जाए। मेरे मौहल्ले में ही एक जिद्दी पहलवान हैं। उनका नाम जिद्दी पहलवान इसीलिए पड़ा क्योंकि वे सचमुच के पहलवान न बन सके। एक और जिद्दी महाशय हैं। उन्हें इस बात का मलाल है कि वे जिद-जिद में यह ही तय नहीं कर पाते कि जिद किस बात पर करनी है, किस पर नहीं। एक तो मेरे पड़ोसी ही हैं, वे कभी-कभी इत्ती जिद कर लेते हैं कि पागलखाने तक ले जाने की नौबत आ जाती है।

मैंने बोला न कि जिद करना हर किसी के बस की बात नहीं। वो तो केजरीवाल का जिगर इत्ता मजबूत है, जो प्रत्येक किस्म की जिद को बर्दाशत कर लेता है। भला कोर्ट-कचहरी-पुलिस से भिड़ना सामान्य आदमी के बस का कहां। चूंकि केजरीवाल सौ फीसद आम आदमी हैं इसीलिए जिद के पक्के और धरना एक्सपर्ट हैं।

हां, यह सही है कि चुनाव में केजरीवाल और उनकी पार्टी बुरी तरह हारे मगर फिर भी उन्होंने रस्सी के बल बने रहना ही मंजूर किया। जमानत जब्त गई तो क्या, जनता ने खारिज कर दिया तो क्या, पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ा तो क्या मगर केजरीवाल अपनी जिद, अपने हट पर अड़े रहे। इसको कहते हैं, बड़ा क्रांतिकारी, बहुत ही बड़ा क्रांतिकारी। जिद के साथ-साथ क्रांतिकारिता (!) का जज्बा (!) केजरीवाल में गजब का है। बधाई उन्हें।

जिस तरह से केजरीवाल टोपी या मफलर की ब्रांडिग हुई, उसी तरह से केजरीवाल-जिद की भी ब्रांडिग होनी चाहिए। बाजार में टिके रहने के तईं बहुत जरूरी है। केजरीवाल ने हमें सीख दी है कि राजनीति या सामान्य जीवन में भी कोई काम 'शांति' से मत करो, जब करो 'हल्ला' मचाकर करो। इससे चेहरा और वैल्यू दोनों बढ़ते हैं।

प्रयासरत हूं कि मैं भी अपनी जिद में 'केजरीवाल-जिद' जैसा इफेक्ट ला सकूं ।

5 टिप्‍पणियां:

yashoda agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना मंगलवार 27 मई 2014 को लिंक की जाएगी...............
http://nayi-purani-halchal.blogspot.in आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

J.L. Singh Singh ने कहा…

बस यही कहूँगा कि ...कुछ तो बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी ...पूरे देश में हलचल, मीडिया में हलचल, सोसल साइट्स पर हलचल, व्यंग्य विनोद, कटाक्ष, कार्टून आदि कहाँ से बनते अगर भरपूर इनपुट न मिले तो...
सादर

dr.mahendrag ने कहा…

बाल हठ , तिरिया हठ व और भी कई हठ सुने पर अब केजरी हठ भी साहित्य व लोकजीवन की बातों में जुड़ जाना चाहिए आधुनिक युग के अनुरूप उसका ब्रांड रजिस्टरड हो जाना चाहिए अन्यथा यह हिंदुस्तान है अन्य कोई इस पर अधिकार जमा लेगा

sushma 'आहुति' ने कहा…

behtreen....

वाणी गीत ने कहा…

केजरीवाल जिद ब्रांड अच्छा है ! काश वे दिल्ली को ब्रांड बना पाते !