शनिवार, 24 मई 2014

अच्छे दिन और सेंसेक्स

चित्र साभारः गूगल
अच्छे दिन शुरू होने का स्वागत सबसे पहले प्यारे सेंसेक्स ने किया। छप्पन इंची का सीना फुलाकर सेंसेक्स ने अर्थव्यवस्था के गालों पर गुलाबी चुंबन धर दिया। दलाल पथ गुलजार हुआ। सालों से मुरझाए चेहरों पर मुस्कुराहट की चमक साफ दिखी। मैंने भी चैन की लंबी सांस ली कि अब हमारा सेंसेक्स जन-हित के वास्ते बहुत कुछ करेगा।

सेंसेक्स को अच्छे दिनों की तलाश हर समय रहती है। अच्छे दिनों में रहकर सेंसेक्स कहीं अधिक बेहतर कर पाता है। सरकार से कहीं अधिक फिक्र सेंसेक्स को निवेशकों की रहती है। उसकी कोशिश यही होती है कि उसके दर पर आया प्रत्येक निवेशक कुछ न कुछ 'लेकर' ही जाए, 'खो' कर नहीं। क्योंकि खोना सेंसेक्स को पसंद नहीं। खोई चीज या इज्जत का दोबारा मिल पाना बेहद मुश्किल होता है। सेंसेक्स ने तो इस 'अपमान' को जाने कित्ती ही दफा खुद पर झेला है। इत्ते-इत्ते बुरे दिन देखे कि कोई दुश्मन भी न देखे।

बावजूद इत्ती कठिनाईयों के सेंसेक्स अपनी जमीन पर सिर्फ इस उम्मीद पर बना रहा कि एक न एक दिन 'अच्छे दिन' जरूर आएंगे। और देखिए अच्छे दिन आ भी गए। इसे कहते हैं- सकारात्मकता में जीने का फल।

वरना, हम तो जरा से दुख में ही इत्ते नकारात्मक और बेचैन से हो जाते हैं कि आते हुए अच्छे दिन भी हमारे पास आने में कतराते हैं। कुछ लोग तो नकारात्मकता को ही अपने जीने और जीवन का उद्देश्य बनाकर हर समय 'रोते' रहते हैं।

किंतु प्यारे सेंसेक्स के साथ ऐसा नहीं है। सेंसेक्स नकारात्मकता से ज्यादा सकारात्मकता में यकीन रखता है। तब ही तो एक दिन में हजार अंक बढ़कर और पच्चीस हजारी होकर मंदड़ियों को मुंह चिढ़ा गया। बेचारे मंदड़िए परेशान हैं सेंसेक्स की तेज रफ्तार को देखकर।

सेंसेक्स के उत्साहित मूड को देखकर लगता तो यही है कि यह रफ्तार अब नहीं थमेगी। थमनी चाहिए भी नहीं। क्योंकि 'बुरी नजर' वालों को सबक सिखाना भी तो जरूरी है प्यारे। देखा नहीं, पिछली सरकार में बेचारे सेंसेक्स की क्या हालत हो गई थी। पटकनी दे-देकर उसका वो हाल कर दिया था कि बेचारा न चेहरा दिखाने लायक रहा था न छिपाने। दुनिया भर के बाजारों में सेंसेक्स के साथ-साथ अर्थव्यवस्था की जग-हंसाई हुई सो अलग।

वो कहते हैं न कि सब दिन एक समान नहीं होते। अच्छे दिनों के आगाज के बाद शायद अब ऐसा ही कुछ होने वाला। जिस हल्ले के साथ अच्छे दिन आने वाले हैं को विज्ञापित किया गया- अब यही समय उन्हें लाने का भी है।

खैर, सेंसेक्स के रास्ते अच्छे दिनों की अच्छी शुरूआत हुई तो है। अब यह देखना आगे है कि ये अच्छे दिन सेंसेक्स के साथ-साथ जनता के मिजाज को कब तक प्रसन्न रख पाते हैं। उम्मीद पर दुनिया पहले टिकी होती थी अब तो प्यारे अच्छे दिनों पर ही टिकी है।

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