मंगलवार, 6 मई 2014

जीजाजी की जमीनी लहर

चित्र साभारः गूगल
सिवाय जीजाजी की जमीनी लहर के कोई दूसरी लहर मुझे न चलती हुई दिख रही है न बहती हुई। आज हर जगह, हर कहीं बस जीजाजी की जमीनी लहर के ही चर्चे हैं। चाहे टीवी पर बहस हो या सड़क-चौराहे पर बातचीत जीजाजी की जमीनी लहर ही प्राथमिकता में है। आखिर प्राथमिकता में हो भी क्यों न? जीजाजी ने महज पांच साल में जो चमत्कार करके दिखाया, वो हर किसी के बस की बात नहीं कर पाना। चमत्कार को नाम आप कुछ भी दे लीजिए लेकिन कर वाकई कमाल ही दिया।

मुझ जैसा दोयम दर्जे का लेखक ऐसे चमत्कार के बारे में सोचना तो बहुत दूर की बात है, कल्पना भी नहीं कर सकता। चलो कल्पना अगर कर भी ले तो साकार करने लायक सोर्स नहीं मिलेगा। लेकिन जीजाजी के साथ ऐसा कोई रगड़ा नहीं था। उन्हें कल्पना तो करनी ही नहीं थी। उनके सोर्स ही इत्ते तगड़े थे कि पांच साल में लाख से करोड़ बन गए।

खैर, सोर्स कित्ता भी रहा हो मगर मेहनत तो जीजाजी की ही थी। हवा में या लहर पर संघर्ष तो कोई भी कर सकता है किंतु सीधे जमीन पर संघर्ष करना, हर किसी के बूते की बात नहीं। इस जमीनी संघर्ष के वास्ते मैं जीजाजी की बेहद इज्जत करता हूं। लोगों को अक्सर उदाहरण दिया करता हूं- जमीनी संघर्ष को लहर में बदलने का दम सिर्फ और सिर्फ हमारे जीजाजी में ही है। सोच रहा हूं, जीजाजी पर एक किताब ही लिख डालूं। वैसे भी, महान व्यक्तित्व पर किताब लिखना सम्मान की बात है प्यारे।

यह देखकर मुझे अच्छा नहीं लगता कि कुछ लोग बेवजह ही जीजाजी की जमीनी लहर के विरोध में आकर खड़े हो जाते हैं। जमीनी संघर्ष का हिसाब मांगते हैं। लाख के करोड़ बनने पर बेतुकी बयानबाजी करते हैं। फिलहाल, भाभीजी ने उचित ही विरोधियों को हद में रहने की हिदायत दी है। ऐंवई किसी के जमीनी संघर्ष पर उंगली उठाना, ठीक नहीं।

आगे सरकार चाहे किसी भी आए पर जीजाजी का जमीनी संघर्षर ऐसे ही जारी रहना चाहिए। जीजाजी के जमीनी संघर्ष पर बनी लहर को देखकर मुझे बेहद आत्मबल मिलता है। दिल में बार-बार उमंग-सी जागती है कि मैं भी जीजाजी जैसी जमीनी लहर बना पाऊं। क्योंकि लेखन से तो लहर बनने से रही!

अभी चुनाव जरा निपट लेने दीजिए फिर जुगाड़ करता हूं जीजाजी के संपर्क में आकर जमीनी संघर्ष के गुण सिखने की। लाख से करोड़ बनाने के लिए जीजाजी से बेहतर मुझे कोई दूसरा बंदा नजर नहीं आता। नहीं भूलना चाहिए कि हमारे जीजाजी सीधे जमीन से जुड़े इंसान हैं।

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