शुक्रवार, 4 अप्रैल 2014

श्रीनि से खास बातचीत

चित्र साभारः गूगल
आज हमसे खास बातचीत के लिए मौजूद हैं पूर्व बीसीसीआइ अध्यक्ष श्री श्रीनि। आइए, उन्हीं से जानते-समझते हैं, स्पाट फिक्सिंग का पूरा मसला है क्या?

एंकरः- सर, स्वागत है टाइम बम चैनल पर।
श्रीनिः- थैंक्स।

एंकरः- अंदर-बाहर बहुत हल्ला मचा है, आपने क्रिकेट में स्पाट फिक्सिंग को जगह देकर खेल को नुकसान पहुंचाया है।
श्रनिः- सब बकवास है। सब झूठे आरोप लगा रहे हैं मुझ पर। भला मैं क्यों क्रिकेट को नुकसान पहुंचाऊंगा? क्रिकेट मेरी आत्मा में बसता है। मैं क्रिकेट की पूजा और भलाई के लिए बना हूं। फिर भी, अगर स्पाट फिक्सिंग हुई है, तो इसमें इत्ता हंगामा खड़ा करने की क्या जरूरत है? आजकल जमाना ही फिक्सिंग का है।

एंकरः- लेकिन सुनने में यही आ रहा है कि फिक्सिंग के तार आपसे जुड़े हैं। साथ-साथ आपके दमाद मयप्पन ने भी खूब नोट पिटे हैं।
श्रीनिः- अजी, लोगों का क्या है। लोगों का तो काम है कहना। दरअसल, ये लोग मेरी निष्ठा-प्रतिष्ठा से जलते हैं। मेरी क्रिकेट (खेल) के प्रति ईमानदारी से चिढ़ते हैं। इत्ते कम टाइम में मैंने आइपीएल को जानते हैं, कहां से कहां पहुंचा दिया! आइपीएल में ग्लैमर और मनी का प्रचार एवं संचार मेरी ही देन है। अब इसका क्रेडिट चाहे जो ले ले। रही बात मेरी दमाद की। उन बेचारो को क्रिकेट और आइपीएल का एबीसीडी तक नहीं मालूम। ऐंवई यहां आकर फंस गए। जबकि मैंने बहुतेरा समझाया था उन्हें।

एंकरः- सुप्रिम कोर्ट की हड़काई के बाद आपको गद्दी छोड़नी ही पड़ी। कुछ पूर्व क्रिकेटर भी ऐसा ही चाहते थे।
श्रीनिः- देखिए, मैं माननीय सुप्रिम कोर्ट के फैसले का सम्मान करता हूं। न ही मैंने कभी ऐसी जिद की कि मैं गद्दी नहीं छोड़ूंगा। अरे, गद्दी तो पिछवाड़े का मैल है। आज मेरे नीचे हैं, कल किसी और के होगी। पर, मेरा कहना अब भी यही है, मैं निर्दोष हूं। रही बात पूर्व क्रिकेटरों की तो मुझे सब मालूम है, कौन कित्ता पानी में है और कित्ता ईमानदार।

एंकरः- अच्छा सर, यह तो आप मानेंगे न कि स्पाट फिक्सिंग में आपका हाथ रहा है। आपको सारी जानकारी होने के बावजूद आपने न किसी खिलाड़ी को डांटा न टोका- बेटा ऐसा न करो, यह अच्छी चीज नहीं।
श्रनिः- व्हाट स्पाट फिक्सिंग? क्या आप मुझे फिक्सर मानते हैं? यार, मुझे क्या मालूम आइपीएल में कौन खिलाड़ी किस जुगाड़ में लगा है। कौन किस के साथ मिलकर कहां सेटिंग कर रहा है। मेरी कने वैसे ही इत्ते काम रहते थे, अब इत्ती छोटी-छोटी बातों के लिए भी मैं टाइम देने लगूं, तो हो गया। और फिर वे दूध पीते बच्चे तो हैं नहीं। उन्हें नहीं मालूम फिक्सिंग बुरी चीज है, इससे दूर रहना चाहिए। फिक्सिंग में शामिल वे रहे और कीचड़ मेरे पाक-दामन पर उछाली जा रही है। यह ठीक नहीं।

एंकरः- सर, अंतिम सवाल। पद छोड़ने के बाद अब आप क्या करेंगे; भजन करेंगे या फिक्सिंग मामले में चली जांच में सहयोग देंगे।
श्रीनिः- अब भजन करने के अतिरिक्त मेरे कने बचा क्या है? अच्छा-खासा काम-धंधा चल रहा था, कमाई हो रही थी, पर क्या करें? किस्मत से ज्यादा कभी किसी को कुछ मिला है यहां? मैं हर तरह की जांच के लिए तैयार हूं। लेकिन मेरी जांच करवाने से पहले ललित मोदी की भी तो जांच करवाइए। फिक्सिंग का सारा खेल तो उन्हीं का रचा है। मैं फिर कह रहा हूं, मुझे फंसाया गया है। मैं बस क्रिकेट को जानता हूं, फिक्सिंग या फिक्सर को नहीं।

एंकरः- हमसे बातचीत करने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया आपका।

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