बुधवार, 30 अप्रैल 2014

दामादश्री की 'जमीनी ईमानदारी'

चित्र साभारः गूगल
ऐसा आपको 'भ्रमवश' लग रहा है कि दामादश्री ने (घपला टाइप) कुछ किया है। जबकि दामादश्री ने कुछ नहीं किया है। दामादश्री कुछ कर ही नहीं सकते। दामादश्री को मैं अच्छे से जानता हूं। दामादश्री बेहद सहज व नेक दिल के इंसान हैं। ईमानदारी के जित्ते किस्म के गुण उनके भीतर हैं, इत्ते मेरे भीतर भी नहीं। बल्कि हकीकत यह है- जमीनी ईमानदारी पर दूर-दूर से लोग दामादश्री से सलाह लेने आते हैं। जमीनी ईमानदारी पर उनके स्कूल-कॉलेजों-यूनिवर्सिटियों में लेक्चर होते हैं।

दामादश्री को न केवल जमीन बल्कि जमीनी पेचीदगियों का अच्छा-खासा ज्ञान है। उनकी सुबह भी जमीन के लिए होती है और रात भी। जमीनी संघर्ष में वे इत्ते व्यस्त रहते हैं कि कब लाख के करोड़ बन जाते हैं, उन्हें खुद पता नहीं चलता। जमीनें जब से दामादश्री के संपर्क में आई हैं, काफी 'खुश' रहने लगी हैं। एक हजार रुपए गज की जमीन को दस हजार रुपए गज कर देना, दामादश्री के बाएं हाथ का गेम है।

जमीन पर रहकर जमीनी हितों के बारे में सोचना व करना बहुत बड़ी बात होती है। इत्ता समर्पित तो मैं अपने लेखन के प्रति नहीं रह पाता।

दामादश्री पर ऐंवई 'टोंड' कसने के बजाए हमें उन पर गर्व होना चाहिए। बहस या बुराई इस पर नहीं होनी चाहिए कि इत्ते कम समय में दामादश्री ने लाख से करोड़ कैसे और क्यों बना लिए बल्कि बात इस पर होनी चाहिए कि वे हाथ का साथ पाकर इत्ती दूर निकल आए। हाथ से हाथ मिलकर जो जमीनी संघर्ष दामादश्री ने किया, हर कोई नहीं कर सकता। ऊंचे संबंधों का लाभ उठाने की तकनीक हमें दामादश्री से समझनी चाहिए।

मुझे लगता है दामादश्री की जमीनी ईमानदारी से प्रभावित होकर ही शायद विपक्ष ने उन पर लघु-फिल्म बनाई होगी। फिल्म में भी दामादश्री को जमीन से जुड़ा बंदा ही बताया गया है। उनकी जमीनी मेहनत पर पूरा फोकस रखा गया है। साथ ही, काफी कुछ दामादश्री पर प्रकाशित पुस्तक में भी दर्ज है। इत्ते कम समय में इत्ता मान-सम्मान मिलना, वाक‌ई अद्भूत है। मैं दिल से प्रभावित हूं दामादश्री से।
 
दामादश्री का जमीनी संघर्ष व ईमानदारी बताती है कि हमें कभी भी जमीन के प्रति अपना मोह नहीं त्यागना चाहिए। नजरों को हर वक्त कमाऊ जमीन पर टिकाकर रखना चाहिए। जहां-जिस जमीन से लगे कि लाभ मिलने की संभावनाएं हैं, तुरंत उसका सौदा कर उसको इज्जत बख्शनी चाहिए। जमीन पर रहकर जमीन के लिए काम करने वाले लोगों की समाज को आज बहुत जरूरत है। यह प्रसन्नता की बात है कि दामादश्री जैसे 'नेक शख्स' हमारे बीच मौजूद हैं।

दरअसल, खिल्ली दामादश्री की वही लोग उड़ा रहे हैं, जिन्होंने जमीन के लिए कभी कुछ नहीं किया। केवल अपने लिए ही जिए, केवल अपने लिए ही सोचा। लेकिन दामादश्री ने हर वक्त हर कहीं जमीन की चिंता की और उसके लिए लड़े भी।

किसी को न हो किंतु मुझे दामादश्री की जमीनी ईमानदारी पर बेहद गर्व है।

1 टिप्पणी:

dr.mahendrag ने कहा…

लोगों को समझ नहीं,नुक्ताचीनी के बजाय उन पर गर्व होना चाहिए, भविषय में कांग्रेस की सरकार में उनके लिए वित्त मंत्री का पद सुरक्षित कर दिया जाये कांग्रेस भी इस बात की घोषणा पहले से कर दे