शुक्रवार, 7 मार्च 2014

सेंसेक्स, तुम बढ़े चलो

प्यारे सेंसेक्स, अच्छा लगता है, जब तुम बढ़ते हो। अच्छा लगता है, जब शिखर पर पहुंचकर तुम मुस्कुराते हो। अच्छा लगता है, जब दलाल पथ पर चहलकदमी बढ़ जाती है। अच्छा लगता है, जब अर्थव्यवस्था तुम्हारे दम पर छलांगे मारती है। अच्छा लगता है, जब निवेशकों की जेबें भरने लगती हैं। अच्छा लगता है, जब बुरे दिन गुरजरने लगते हैं। अच्छा लगता है, जब तुम मंदडि़यों को टंगड़ी मारते हो।

आज तुम्हें बाइस हजार की ऊंचाई पर देखना बेहद सुखद अनुभव है मेरे लिए। इस सुखद अनुभव का लुत्फ एक मैं ही नहीं, हम सब ले रहे हैं। एक लंबे दौर के बाद आज तुम यहां पहुंचे हो। बीच में जाने कैसे-कैसे तूफानों का तुमने सामना किया। जाने कैसे-कैसे दर्द झेले। जाने कित्तों की कित्ती-कित्ती बातें सुनीं। कभी सरकार ने तुम्हारा साथ नहीं दिया, तो कभी बुरी खबरें तुम्हें सताती रहीं। लेकिन फिर भी तुम डरे नहीं डटे रहे। विपरित परिस्थितियों में भी हौसला नहीं छोड़ा। हालांकि तुम्हारी बेरूखी का काफी नुकसान लोगों को उठाना पड़ा मगर इसमें तुम्हारी गलती भी क्या थी प्यारे।

हवा का रूख ही कुछ ऐसा था कि सबकुछ उड़ा चला जा रहा था। न सरकार संभाल पा रही थी, न तुम संभल पा रहे थे। हां, बीच-बीच में कभी-कभार रिलिफ रैली आ जाया करती थी, तो थोड़ा-बहुत हम-तुम मुस्कुरा लिया करते थे। पर कित्ते दिन...। 2008 के बाद से तो ऐसा ग्रहण लगा कि हटने का नाम ही नहीं लिया। जाने कित्ते निपट लिए और कित्ते बरबाद हो गए। पर तुम भी क्या करते। जो होना है, सो होना है।

लेकिन अब बाइस हजार के शिखर पर पहुंचकर तुमने काफी राहत दी है हम सब को। उम्मीद की किरणें फिर से नजर आने लगी हैं। अब जो होगा अच्छा ही होगा पर विश्वास मजबूत होने लगा है। इस मजबूती को और सहारा तब मिलेगा जब देश में एक मजबूत सरकार आएगी। यों भी, तुम्हारी मजबूती भी सरकार के कंधों पर ही तो टिकी है, है न प्यारे।

अब जब जैसे-तैसे तुम्हारे कदम नई ऊंचाई की तरफ बढ़े हैं, तो कुछ खुजलीखोरों को खुजली हो रही है कि तुम एकतरफा बढ़ क्यों रहे हो? तुम्हारी बढ़त पर उन्हें संशय है। तुम्हारा बाइस हजारी होना उन्हें पच नहीं रहा। कह रहे हैं, यह बस कुछ दिनों की तेजी है। फिर से तुम फर्श पर नजर आओगे। जाने कैसे-कैसे जलन और खुजलीखोर है, हमारे समाज में, जिन्हें न दूसरे की कामयाबी अच्छी लगती है, न पीना। हां, दूसरी की बीवी उन्हें अपनी बीवी से बेहतर जरूर नजर आती है।

शायद इसीलिए खुजलीखोर मैलुए कहलाते हैं।

प्यारे सेंसेक्स, जिन्हें जो कहना है, कहने दो। जलने वालों को जलने और खुजली वालों को खुजलाने दो। पर तुम वीर की तरह ऊंचाई के पथ पर बस बढ़े चलो, बढ़े चलो। तुम्हारे बढ़े चलने में ही हम सब की बढ़ाई निहित है। तुम टॉप पर बने रहोगे तो देश की अर्थव्यवस्था भी शाइनिंग करती रहेगी।

फिलहाल, तुम्हें बाइस हजारी होने की शुभकामनाएं।

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