शनिवार, 22 फ़रवरी 2014

मंत्रीजी के नाम खत

आदरणीय मंत्रीजी,

जिंदगी में अब तलक किसी नेता या मंत्री को मैंने कभी खत नहीं लिखा। लेकिन आपको लिख रहा हूं। एक आप ही हैं, जो मेरी पीड़ा, मेरी भावना को समझ सकते हैं।

पहले तो आपको बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं कि आपकी लापता भैंसें सुरक्षित वापस मिल गईं। वरना एक दफा चोरी हुआ जानवर मिलता कहां है। गए साल मेरी दो बकरियां चोरी हो गईं थी, आज तलक न मिल पाई हैं। पीएम से लेकर सीएम तक गुहार लगवा ली मगर हासिल कुछ न हुआ। मन मसोसकर रह गया।

चलिए खैर जो हुआ सो हुआ। होनी को भला कौन टाल सका है।

दरअसल, मंत्रीजी बात यह है कि दो रोज पहले मेरी इकलौती पतलून कहीं गुम हो गई। हर जगह, हर कोना, हर छत, हर गली, हर कूचा ढूंढवाकर देख लिया किंतु कुछ पता न चला। पतलून गुमशुदगी की रपट भी थाने में दर्ज करवा दी। मगर थानेदार महोदय कुछ खास ध्यान नहीं दे रहे। जब भी जाता हूं, तो टला देते हैं, यह कहते हुए कि पतलून ही तो गुम हुई है, बीवी थोड़े। अब उनको मैं यह कैसे समझाऊं कि यह मात्र पतलून नहीं, मेरी इज्जत है। शादी की प्रथम वर्षगांठ पर बीवी ने गिफ्ट की थी। और यह कहा था कि अब जब भी कहीं किसी समारोह या सम्मेलन में जाना इसे ही पहनकर जाना। उसे उसी तरह सहेज-संभालकर रखना जैसी अपनी इज्जत को रखते हो। खबरदार, कहीं गुम की तो...।

लेकिन मेरी पीड़ा को न थानेदार महोदय समझ रहे हैं न पड़ोसी। और बीवी ने तो साफ कह दिया है कि दो दिन में अगर पतलून खोजकर नहीं लाए तो तलाक दे दूंगी। अजीब-सी उलझन में हूं। क्या करूं, क्या न करूं, कुछ समझ नहीं आता। बिन पतलून मुझे मेरी जिंदगी अंधकार में नजर आती है। यों भी, इंसान की इज्जत केवल दो वजह से ही सुरक्षित रहती है; एक टोपी, दूसरी पतलून। अफसोस, मेरी कने अब दोनों में से कुछ नहीं है। टोपी भीड़ में कहीं खो गई और पतलून... न जाने कौन दबाए बैठा है। कहीं इसके पीछे विदेशी हाथ तो नहीं!

मंत्रीजी, अब मेरी इज्जत आपके हाथ है। आपसे विनम्र विनती है कि मेरी खोई पतलून को खोजवाने का आदेश पुलिस विभाग को दें। चाहें तो खुफिया या क्राइम विभाग को भी इस काम में लगा सकते हैं। मुझे पूरी उम्मीद है कि आप मेरी पीड़ा, मेरी भावना को अच्छे से समझ पाएंगे क्योंकि एक भुगतभोगी दूसरे भुगतभोगी को बेहतर समझ सकता है।

और हां पहचान के लिए बताए देता हूं कि मेरी पतलून लाल कलर (कृपया, लाल कलर से भ्रमित न होइएगा) की है। ज्यादा धुलने-सुखने के कारण लाला कलर फीका-सा पड़ने लगा है। पतलून में छह जेबें हैं; दो आगे, दो पीछे, दो घुटने से ऊपर। पतलून बे-क्रीज है। नीचे से उसको फोल्ड करके पहनता हूं। कुछ लंबी ज्यादा है।

मेरी पतलून को खोजवाना आपके तईं कोई बहुत बड़ा काम नहीं है। आप एक दफा आदेश दे दीजिए फिर देखिए पुलिसिया विभाग कित्ती मुस्तैदी से काम करता है। आपके गुस्से के आगे आज तलक भला कोई ठहरा है। मैं तो कहता हूं, यह भैंसों का सौभाग्य है कि वे आपकी सरपरस्ती में सुरक्षित व मौज से रह रही हैं।

मेरी दिली तमन्ना है कि एक दफा जाकर देख आऊं आपके तबले और भैंसों को। ज्ञानी बताते हैं कि मंत्रीजी की भैंसों को देखकर सबाब मिलता है। मैं यह सबाब लेना चाहता हूं मंत्रीजी।

लेकिन उससे पहले मेरी गुहार पर एक्शन लेकर मुझे मेरी इज्जत लौटवा दीजिए मंत्रीजी। घर-बाहर मेरी इज्जत बस इसी पर टिकी है।

आशा है कि आप निराश न करेंगे। निश्चिंत रहिए, पतलून खोजवाने में जो खरचा आएगा सब दे दूंगा। पर तलाक से पहले-पहले मुझको बचा लीजिए। कहीं ऐसा न हो पतलून भी जाए और बीवी भी।

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